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Budaun News: प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रहा चीनी मांझा
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दुकान में लगीं मांझे की चकरी।संवाद
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बदायूं। चीनी मांझा प्रतिबंधित है, बावजूद इसके दुकानदार चोरी छिपे पतंगों के साथ इसकी बिक्री कर रहे हैं। शहर के छह सड़का व बड़े बाजार इलाके में चीनी मांझा बेचने वालों की कई दुकानें हैं, इसके अलावा बहुतायत में गली-मोहल्लों की दुकानों पर भी इसकी बिक्री की जा रही है।
चीनी मांझा से आए दिन घटनाएं होती रहती हैं, इसलिए शासन ने इसे काफी पहले से ही प्रतिबंधित घोषित कर रखा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को पुलिस अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं कि चीनी मांझे की बिक्री कहीं भी न होने पाए, अगर इससे कहीं किसी की मौत हो जाती है तो आरोपी समेत दुकानदार पर भी हत्या का केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। आदेश मिलने के बाद एसएसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को गहन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
शहर की बात करें तो घंटाघर के आसपास पतंगों की दुकानों के साथ-साथ चोरी-छिपे चाइनीज मांझे की बिक्री भी हो रही है। दुकानदार खुलेआम इसकी बिक्री नहीं करते। लोगों के मांगने पर इसे उपलब्ध करवा दिया जाता है। लोगों का कहना है कि इस मांझे से सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बल्कि पतंगबाज व राहगीरों के भी घायल होने का खतरा रहता है।
शहर में दो ही थोक विक्रेता बताए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार अपराह्न दो बजे छह सड़का, घंटाघर व बड़ा बाजार स्थित मांझा और पतंग की दुकान की पड़ताल की गई। देखने में आया कि विक्रेता दुकान पर बैठे हैं। पतंगों को आगे कर रखा है, जबकि सामने सामान्य मांझा रखा हुआ है। खरीदने के लिए लोग पहुंच रहे थे। दुकानदार ने बताया कि शहर में पांडा, सिंथेटिक और डोरी मांझा बेचते हैं। चीनी मांझे के बारे में पूछा तो बेचे जाने से इंकार कर दिया। हालांकि जिन ग्राहकों को मांझा दिया गया वह चीनी ही लग रहा था। बड़े बाजार में एक दुकानदार ने बताया कि चीनी मांझा प्रतिबंधित है, इसलिए छिपाकर बेचना पड़ता है। पकड़े गए तो कार्रवाई के बारे में उन्हें पता है।
बता दें कि चीनी मांझा बेचने, खरीदने और इस्तेमाल करने पर पांच वर्ष की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अब नई सजा का भी प्रावधान किया जा रहा है। हत्या की श्रेणी में आने के बाद सजा आजीवन कैद तक पहुंच सकती है।
एक पैकेट में होती हैं चीनी मांझे की 28 चकरी
थोक विक्रेता के मुताबिक, चीनी मांझे के डिब्बे में 28 चकरी होती है। इसकी कीमत 700 रुपये है। यानी एक चकरी की कीमत 25 रुपये है। विक्रेता के अनुसार, इसकी फुटकर कीमत 35 रुपये की करीब होती है।
देसी और चीनी मांझे में अंतर
देसी मांझा विशेषकर सूती धागे पर चावल और गोंद का लेप लगाकर बनाया जाता है। इसमें कांच भी हल्की मात्रा में मिलाया जाता है ताकि वह पतंग के अन्य धागे को काट सके। वहीं चीनी मांझे में नायलॉन और प्लास्टिक का धागा इस्तेमाल होता है। इस पर विशेष रसायन के साथ महीन कांच मिलाकर तैयार किया जाता है। यह देसी मांझे की अपेक्षाकृत अधिक मजबूत और धारदार होता है। यही कारण है कि इसके पेड़, तारों आदि में उलझने पर पक्षियों की जान को खतरा होता है। इसके साथ ही इंसानों की गर्दन व अन्य अंग कटने की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं।
जिले में चीनी मांझे की बिक्री की जानकारी नहीं है। शासन के आदेश का पालन कराते हुए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्र मेंं पतंग और मांझे की दुकानें चेक करा लें। अगर कहीं प्रतिबंधित चीनी मांझा मिले तो कार्रवाई करें। -डॉ. बृजेश कुमार सिंह, एसएसपी
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चीनी मांझा से आए दिन घटनाएं होती रहती हैं, इसलिए शासन ने इसे काफी पहले से ही प्रतिबंधित घोषित कर रखा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को पुलिस अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं कि चीनी मांझे की बिक्री कहीं भी न होने पाए, अगर इससे कहीं किसी की मौत हो जाती है तो आरोपी समेत दुकानदार पर भी हत्या का केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। आदेश मिलने के बाद एसएसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को गहन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
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शहर की बात करें तो घंटाघर के आसपास पतंगों की दुकानों के साथ-साथ चोरी-छिपे चाइनीज मांझे की बिक्री भी हो रही है। दुकानदार खुलेआम इसकी बिक्री नहीं करते। लोगों के मांगने पर इसे उपलब्ध करवा दिया जाता है। लोगों का कहना है कि इस मांझे से सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बल्कि पतंगबाज व राहगीरों के भी घायल होने का खतरा रहता है।
शहर में दो ही थोक विक्रेता बताए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार अपराह्न दो बजे छह सड़का, घंटाघर व बड़ा बाजार स्थित मांझा और पतंग की दुकान की पड़ताल की गई। देखने में आया कि विक्रेता दुकान पर बैठे हैं। पतंगों को आगे कर रखा है, जबकि सामने सामान्य मांझा रखा हुआ है। खरीदने के लिए लोग पहुंच रहे थे। दुकानदार ने बताया कि शहर में पांडा, सिंथेटिक और डोरी मांझा बेचते हैं। चीनी मांझे के बारे में पूछा तो बेचे जाने से इंकार कर दिया। हालांकि जिन ग्राहकों को मांझा दिया गया वह चीनी ही लग रहा था। बड़े बाजार में एक दुकानदार ने बताया कि चीनी मांझा प्रतिबंधित है, इसलिए छिपाकर बेचना पड़ता है। पकड़े गए तो कार्रवाई के बारे में उन्हें पता है।
बता दें कि चीनी मांझा बेचने, खरीदने और इस्तेमाल करने पर पांच वर्ष की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अब नई सजा का भी प्रावधान किया जा रहा है। हत्या की श्रेणी में आने के बाद सजा आजीवन कैद तक पहुंच सकती है।
एक पैकेट में होती हैं चीनी मांझे की 28 चकरी
थोक विक्रेता के मुताबिक, चीनी मांझे के डिब्बे में 28 चकरी होती है। इसकी कीमत 700 रुपये है। यानी एक चकरी की कीमत 25 रुपये है। विक्रेता के अनुसार, इसकी फुटकर कीमत 35 रुपये की करीब होती है।
देसी और चीनी मांझे में अंतर
देसी मांझा विशेषकर सूती धागे पर चावल और गोंद का लेप लगाकर बनाया जाता है। इसमें कांच भी हल्की मात्रा में मिलाया जाता है ताकि वह पतंग के अन्य धागे को काट सके। वहीं चीनी मांझे में नायलॉन और प्लास्टिक का धागा इस्तेमाल होता है। इस पर विशेष रसायन के साथ महीन कांच मिलाकर तैयार किया जाता है। यह देसी मांझे की अपेक्षाकृत अधिक मजबूत और धारदार होता है। यही कारण है कि इसके पेड़, तारों आदि में उलझने पर पक्षियों की जान को खतरा होता है। इसके साथ ही इंसानों की गर्दन व अन्य अंग कटने की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं।
जिले में चीनी मांझे की बिक्री की जानकारी नहीं है। शासन के आदेश का पालन कराते हुए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्र मेंं पतंग और मांझे की दुकानें चेक करा लें। अगर कहीं प्रतिबंधित चीनी मांझा मिले तो कार्रवाई करें। -डॉ. बृजेश कुमार सिंह, एसएसपी

दुकान में लगीं मांझे की चकरी।संवाद
