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Budaun News: औने-पौने दाम से टूटा किसान, 25 बीघा आलू मुफ्त में खोद ले गए ग्रामीण
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खेत में खुदाई पर छोड़े गए आलू निकालते ग्रामीण। संवाद
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कुंवरगांव। आलू के बाजार भाव ने इस बार किसानों की उम्मीदों पर ऐसा पानी फेरा कि खेत की फसल ही बोझ बन गई। क्षेत्र के गांव कसेर में एक किसान ने 25 बीघा में तैयार आलू की फसल खुद खुदवाने के बजाय ग्रामीणों के लिए छोड़ दी। सुबह से ही आसपास के लोग खेत पर पहुंच गए। जो जितना खोद सका, अपने साथ घर ले गया।
दरअसल, इस समय आलू का भाव महज 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। ऐसे में खोदाई, मजदूरी और ढुलाई का खर्च जोड़ें तो किसान के हाथ में कुछ भी नहीं बच रहा। किसान रामगोपाल का कहना है कि जब लागत ही नहीं निकल रही तो मजदूरी देकर खोदाई कराने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसी मजबूरी में उन्होंने खेत लोगों के लिए खोल दिया।
ग्रामीणों के अनुसार, सुबह होते ही खेत में लोगों की भीड़ लग गई। महिलाओं और बच्चों तक ने आलू खोदकर घर पहुंचाया। देखते ही देखते 25 बीघा का खेत खाली होने लगा।
किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और कीटनाशक पर पहले ही भारी खर्च हो चुका है। ऊपर से बाजार में दाम गिर जाने से पूरी मेहनत पर पानी फिर गया। उनका कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले सीजन में आलू की बोआई घट सकती है।
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दरअसल, इस समय आलू का भाव महज 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। ऐसे में खोदाई, मजदूरी और ढुलाई का खर्च जोड़ें तो किसान के हाथ में कुछ भी नहीं बच रहा। किसान रामगोपाल का कहना है कि जब लागत ही नहीं निकल रही तो मजदूरी देकर खोदाई कराने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसी मजबूरी में उन्होंने खेत लोगों के लिए खोल दिया।
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ग्रामीणों के अनुसार, सुबह होते ही खेत में लोगों की भीड़ लग गई। महिलाओं और बच्चों तक ने आलू खोदकर घर पहुंचाया। देखते ही देखते 25 बीघा का खेत खाली होने लगा।
किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और कीटनाशक पर पहले ही भारी खर्च हो चुका है। ऊपर से बाजार में दाम गिर जाने से पूरी मेहनत पर पानी फिर गया। उनका कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले सीजन में आलू की बोआई घट सकती है।