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Budaun News: कागजों में कुपोषण से जंग, जमीनी हकीकत में खाली पड़े एनआरसी बेड

संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Tue, 31 Mar 2026 02:15 AM IST
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Fighting malnutrition on paper, NRC beds lying empty on the ground
जिला अस्पताल में ​स्थित एनआरसी। संवाद
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बदायूं जिले में कुपोषण की गंभीर स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य तंत्र की सुस्ती साफ नजर आ रही है। एक ओर जहां हजारों बच्चे कुपोषण और अति कुपोषण की श्रेणी में दर्ज हैं। वहीं, दूसरी ओर जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में बेड खाली पड़े रहते हैं। यह केंद्र खासतौर पर गंभीर कुपोषित बच्चों के इलाज, पोषणयुक्त आहार और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के लिए बनाया गया है, जहां 14 दिन तक विशेष देखभाल दी जाती है।
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जिले में 2940 आंगनबाड़ी केंद्र है। यहां पर 2.90 लाख से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों को 1477 अति कुपोषित (सेम) और 6686 कुपोषित (मेम) बच्चे विभाग की ओर से चिन्हित किए गए हैं, लेकिन उपचार के लिए जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) तक उनकी पहुंच न के बराबर है।
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10 बेड वाले इस केंद्र में अक्सर गिनती के बच्चे ही भर्ती मिलते हैं। इससे साफ है कि जमीनी स्तर पर रेफरल और जागरूकता की प्रक्रिया कमजोर है। नतीजा यह है कि हजारों बच्चे घरों में ही उपचार से वंचित रह जा रहे हैं। हालांकि, हकीकत यह है कि अति कुपोषित बच्चों की बड़ी संख्या गांवों और घरों तक सीमित है और उन्हें अस्पताल तक लाने में लापरवाही बरती जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम स्तर पर बच्चों की पहचान तो हो रही है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें एनआरसी भेजने की प्रक्रिया बेहद धीमी है। इसके पीछे जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह है।

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यह है प्रक्रिया

इस प्रकार करता है काम सामुदायिक प्रबंधन

कुपोषित बच्चा पहचान में आते ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उसे टीकाकरण दिवस पर एएनएम को दिखाती हैं। यदि एएनएम को लगता है कि खानपान सुधार, स्वच्छता और कुछ दवाओं से बच्चा ठीक हो सकता है तो वह आंगनबाड़ी को इसकी जानकारी देकर सामुदायिक स्तर पर सुधार की प्रक्रिया करती हैं। वहीं अगर बच्चा अति कुपोषण की स्थिति में है और सामान्य उपायों से सुधार संभव नहीं दिखता तो एएनएम उसे डॉक्टर के पास रेफर करती हैं। यहां से बच्चे को एनआरसी में भर्ती किया जाता है।

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बच्चे के साथ-साथ मां को भी मिलता है बेहतर भोजन और 100 रुपये रोजाना भत्ता

-जिला अस्पताल में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र कुल 10 बेड का है। यहां पांच वर्ष तक के कुपोषित बच्चे के साथ उनकी माताएं भी रहती हैं। 14 दिन के प्रवास के दौरान बच्चे के रहने, खाने और इलाज की पूरी व्यवस्था की जाती है। बच्चे के साथ रहने वाली मां को निशुल्क भोजन के साथ 100 रुपये प्रतिदिन भत्ता भी दिया जाता है। वहीं आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चे को लेकर आती हैं तो उन्हें भी भत्ता मिलता है। एंबुलेंस से लाने-ले जाने की सुविधा भी उपलब्ध है।

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वर्जन-

जिले में कुल बच्चों की संख्या में सेम की संख्या .64 प्रतिशत है। वहीं, मेम की संख्या 2.92 प्रतिशत है। आने वाले दिनों में इसको कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

-धर्मेंद्र कुमार कुलश्रेष्ठ, प्रभारी डीपीओ
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