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Budaun News: हरिद्वार-वाराणसी की तर्ज पर होगा कछला गंगाघाट का कायाकल्प
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कछला गंगाघाट, यहां होगा कायाकल्प। संवाद
- फोटो : संवाद
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उझानी। कछला गंगाघाट को वाराणसी और हरिद्वार के घाटों की तरह विकसित किया जाना है। इसके लिए पिछले महीने 18.40 करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो चुके हैं। जल्द ही पर्यटन और बाढ़ खंड विभाग के अफसर मौके पर जाकर घाटों की पैमाइश करेंगे। इसके बाद कायाकल्प का काम शुरू होगा।
गंगाघाट के कायाकल्प की बात करीब एक दशक से चली आ रही है। पिछले माह भाजपा विधायक हरीश शाक्य ने शासन स्तर से 18.40 करोड़ रुपये स्वीकृत कराने का दावा किया था। इसमें केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का भी विशेष योगदान बताया गया है।
कछला नगर पंचायत के अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि गंगा किनारे पक्के घाट, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था और सुलभ शौचालयों का भी निर्माण किया जाना है।
इस दिशा में पर्यटन और बाढ़ खंड विभाग के अफसरों की टीम के कछला आकर मौका मुआयना करने और स्थान चिह्नित किए जाने के आसार हैं। स्थानीय स्तर पर भी पैरोकारी तेज कर दी गई है। इसके बाद श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। यहां आसपास जिलों के अलावा राजस्थान और मध्यप्रदेश से भी पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्वों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पक्के घाटों के अभाव में हादसे होते रहे हैं।
कांवड़ मेला को मिल सकती है सरकारी दर्जे की स्वीकृति
कछला गंगघाट पर सावन माह में कांवड़ मेला लगता है। पूरे महीना शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए कांवड़िये कछला घाट से कांवड़ यात्रा शुरू करते हैं। यहां लाखों की संख्या में कांवड़िये आते हैं, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन अपने संसाधनों से उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाता। नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से पिछले साल प्रस्ताव भेजकर कांवड़ मेला को सरकारी मेला घोषित कराने की मांग की गई थी। प्रस्ताव पर कार्रवाई शुरू होने से जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। इसके बाद मेला पर खर्च होने वाली धनराशि शासन से मिलने लगेगी।
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गंगाघाट के कायाकल्प की बात करीब एक दशक से चली आ रही है। पिछले माह भाजपा विधायक हरीश शाक्य ने शासन स्तर से 18.40 करोड़ रुपये स्वीकृत कराने का दावा किया था। इसमें केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का भी विशेष योगदान बताया गया है।
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कछला नगर पंचायत के अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि गंगा किनारे पक्के घाट, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था और सुलभ शौचालयों का भी निर्माण किया जाना है।
इस दिशा में पर्यटन और बाढ़ खंड विभाग के अफसरों की टीम के कछला आकर मौका मुआयना करने और स्थान चिह्नित किए जाने के आसार हैं। स्थानीय स्तर पर भी पैरोकारी तेज कर दी गई है। इसके बाद श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। यहां आसपास जिलों के अलावा राजस्थान और मध्यप्रदेश से भी पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्वों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पक्के घाटों के अभाव में हादसे होते रहे हैं।
कांवड़ मेला को मिल सकती है सरकारी दर्जे की स्वीकृति
कछला गंगघाट पर सावन माह में कांवड़ मेला लगता है। पूरे महीना शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए कांवड़िये कछला घाट से कांवड़ यात्रा शुरू करते हैं। यहां लाखों की संख्या में कांवड़िये आते हैं, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन अपने संसाधनों से उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाता। नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से पिछले साल प्रस्ताव भेजकर कांवड़ मेला को सरकारी मेला घोषित कराने की मांग की गई थी। प्रस्ताव पर कार्रवाई शुरू होने से जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। इसके बाद मेला पर खर्च होने वाली धनराशि शासन से मिलने लगेगी।
