बदायूं दोहरा हत्याकांड: सुरक्षा में चूक करने वाले अफसर भी SIT जांच के दायरे में, इन सवालों के जवाब की तलाश
बदायूं के एचपीसीएल प्लांट में दो अफसरों की हत्या के मामले में एसआईटी की जांच जारी है। जांच के दायरे में बदायूं के डीएम और तत्कालीन एसएसपी समेत कई अधिकारी भी आ गए हैं।
विस्तार
बदायूं के एचपीसीएल प्लांट में दो अफसरों की हत्या के मामले में डीएम अवनीश राय और तत्कालीन एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह समेत कई अधिकारियों को एसआईटी ने अपनी जांच के दायरे में रखा है। डीएम और एसएसपी से 14 जनवरी को मिलकर दोनों अफसरों ने सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद सुरक्षा क्यों नहीं दी गई, किस स्तर पर ढिलाई हुई, इसकी जांच की जा रही है। क्या किसी वजह से जानबूझकर लापरवाही की गई, यह भी जांच का बिंदु है।
एचपीसीएल के कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट में जान गंवाने वाले उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता व सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा ने 14 जनवरी को बदायूं जिलाधिकारी को पत्र सौंपते हुए अजय प्रताप से जान का खतरा बताया था और सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इसके बाद पांच फरवरी को उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता ने पुलिस को बताया था कि आरोपी अजय प्रताप सिंह ने प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसकर अधिकारियों से अभद्रता की। परिसर में दहशत फैलने का भी प्रयास किया। प्लांट में हंगामा करने के बाद आरोपी ने अधिकारियों को गाड़ियों को जबरन रोका और कई किलोमीटर तक पीछा भी किया। इस दौरान ओवरटेक कर जान से मारने की धमकी भी दी।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की, लेकिन सुरक्षा नहीं दी
दोनों अफसरों ने सरकारी परियोजना में बाधा आने के प्रति भी आगाह किया था और सुरक्षा मुहैया न होने पर प्लांट बंद करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन अफसरों को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई। कहा यह जा रहा है कि डीएम ने एसडीएम दातागंज और सीओ उझानी को त्वरित कार्रवाई के लिए कहा था, फिर भी उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। बाद में 12 मार्च को गोली मारकर सुधीर गुप्ता और हर्षित मिश्रा की हत्या कर दी गई। मुख्यमंत्री के आदेश पर गठित एसआईटी अब इन दोनों अफसरों की सुरक्षा में चूक करने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एसआईटी में मंडलायुक्त, डीआईजी रेंज व अपर आयुक्त (खाद्य) शामिल हैं।
समय पर जांच पूरी होने पर संशय
एसआईटी जांच शुरू हुए 10 दिन का समय बीत चुका है, जबकि दो सप्ताह में रिपोर्ट देना है। चार दिन ही शेष बचे हैं। अभी चश्मदीदों के बयान जिलास्तर पर दर्ज हो रहे हैं। बयान संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला स्तर पर तैयार रिपोर्ट की एसआईटी समीक्षा करेगी। जो बिंदु रह जाएंगे उन्हें भी जांच में शामिल किया जाएगा। इसके बाद एसआईटी में शामिल अधिकारी अपने स्तर पर रिपोर्ट तैयार करेंगे। ऐसे में समय सीमा में जांच पूरी होने पर संशय बना हुआ है।
इन सवालों के जवाब तलाश रही एसआईटी
- 14 जनवरी को शिकायत के बाद भी दोनों अफसरों को सुरक्षा मुहैया क्यों नहीं कराई गई।
- पांच फरवरी के विवाद को भी गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
- एचपीसीएल के अफसरों की चेतावनी के बाद रिपोर्ट दर्ज की गई, लेकिन आरोपी पर गंभीर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
- आरोपी पर कार्रवाई न करने के पीछे क्या वजह रही। कोई राजनीतिक संरक्षण तो नहीं था, जिसकी वजह से अफसर कार्रवाई नहीं कर रहे थे।
- डीएम के आदेश के बाद भी एसडीएम और सीओ की ओर से क्या कार्रवाई की गई।
- एसडीएम दातागंज और सीओ उझानी ने सुरक्षा मुहैया क्यों नहीं कराई या डीएम को सुरक्षा के लिए रिपोर्ट दी या नहीं।
- डीएम स्तर से भी इस पूरे प्रकरण में क्या कार्रवाई की गई।
- शिकायत और घटना के बीच करीब दो माह का समय रहा, इस बीच पूरे प्रकरण में पुलिस प्रशासन के अफसरों ने क्या कार्रवाई की।
मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने बताया कि सभी बिंदुओं पर जांच कर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इसी आधार पर आरोप तय किए जाएंगे और रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। पूरी कोशिश है कि जांच को समय पर पूरा कर लिया जाए।