Lakhimpur Kheri: बाघ के हमले में महिला की मौत, परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से किया इनकार, हंगामा
मझगई थाना क्षेत्र के खालेपुरवा गांव में बाघ के हमले में कोकिला देवी की मौत के बाद मंगलवार शाम भारी हंगामा हुआ। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया।
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लखीमपुर खीरी के मझगई थाना क्षेत्र के खालेपुरवा गांव में मंगलवार शाम उस समय भारी हंगामा और कोहराम मच गया, जब बाघ के हमले में जान गंवाने वाली कोकिला देवी का शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचा। शव देखते ही मृतका के सात बच्चों समेत पूरे परिवार में चीख-पुकार मच गई। वन विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज और आक्रोशित परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने मौके पर वनकर्मियों को घेर लिया और क्षेत्र को बाघ के आतंक से मुक्त कराने व उचित मुआवजे की मांग को लेकर अड़ गए।
घटना सोमवार दोपहर की है, जब खालेपुरवा निवासी 45 वर्षीय कोकिला देवी गांव की महिलाओं के साथ मवेशियों के लिए चारा लेने गांव से कुछ दूर खैरा के पास गई थी। भीषण गर्मी होने के कारण कोकिला देवी एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगी थीं, तभी झाड़ियों में छिपे बैठे बाघ ने उन पर अचानक हमला बोल दिया था। गंभीर रूप से घायल महिला को इलाज के लिए पलिया सीएचसी ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
दो दिन में दो ग्रामीणों की मौत
गांव में दो दिन पहले ही घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर बाघ ने मातादीन नाम के ग्रामीण को भी मौत के घाट उतार दिया था। तब भी आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को उठने नहीं दिया था। इस दूसरी वारदात ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया। लगातार हुई दो मौतों से वन विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है।
वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह अपनी टीम के साथ मृतका के घर पहुंचे और उन्होंने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए आर्थिक सहायता के तौर पर 25 हजार रुपये की नकद धनराशि सौंपी। उन्होंने परिजनों को शांत कराने का प्रयास करते हुए बताया कि बाघ की लोकेशन का पता लगाने के लिए क्षेत्र में सात कैमरे और उसे कैद करने के लिए दो पिंजड़े लगाए गए हैं।
परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक वन विभाग के उच्चाधिकारी मौके पर आकर ठोस आश्वासन नहीं देते, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। समाचार लिखे जाने तक ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए थे और मौके पर तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि घटना स्थल पर बाघिन के पगचिन्ह मिले हैं। इसको पकड़ने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुमति मांगी गई है। सात कैमरों के साथ ही दो पिंजड़े लगवाए गए हैं। पांच लाख रुपये मुआवजा देने की कार्रवाई शुरू कर दी है।