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Bulandshahar News: शुरुआत...पहले दिन पांच किसानों ने दी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए जमीन
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ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के लिए जमीन का बैनामा कराने वाले किसानों को सम्मानित करते अधिकारी। स्
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बुलंदशहर। ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के लिए शासन से जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया था, अब उन जमीनों के बैनामे शुरू हो गए है। बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन ने खुर्जा में पहले दिन पांच किसानों की जमीन के बैनामे कराए हैं। बैनामा करने वाले किसानों का स्वागत भी किया गया। बैनामे के बाद ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होने की उम्मीद जाग गई है। इससे जिले के अंदर विकास की रफ्तार बढ़ेगी।
ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे जिले से गुजर रहे गंगा एक्सप्रेसवे को जेवर एयरपोर्ट से जोड़ेगा। लिंक एक्सप्रेसवे के लिए बृहस्पतिवार का दिन काफी महत्वपूर्ण रहा। पहले दिन खुर्जा तहसील के पांच किसानों ने अपनी जमीनों का बैनामा करके इस महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने के लिए अपनी हिस्से का बुनियादी पत्थर रख दिया है। नगरीय क्षेत्र में किसानों को सर्किल रेट का दो गुना, ग्रामीण क्षेत्र में सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।
जिलाधिकारी श्रुति ने अधिकारियों को बैनामा प्रक्रिया को सुचारू, पारदर्शी एवं त्वरित रूप से संपादित कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को बैनामा प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो तथा शीघ्र उनके खातों में धनराशि भेजी जाए, ताकि परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण की जा सके।
इस अवसर पर बैनामा करने वाले किसानों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके इस योगदान से क्षेत्र एवं प्रदेश का समग्र विकास होगा। आने वाली पीढ़ियों को इसका व्यापक लाभ प्राप्त होगा। अन्य भू-स्वामियों से भी अपील की गई कि वे जल्द से जल्द अपने बैनामे यूपीडा के पक्ष में संपादित कराएं, जिससे उन्हें समयबद्ध भुगतान प्राप्त हो सके।
लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर तहसील के 17 गांव, शिकारपुर तहसील के पांच गांव, स्याना तहसील के आठ गांव, खुर्जा के सात गांव, सिकंदराबाद तहसील के दो गांव, जनपद की पांच तहसीलों के कुल 39 गांवों से होकर गुजरेगा। परियोजना के लिए करीब 8700 किसानों की कुल 677 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।
74 किलोमीटर दूरी के लिंक एक्सप्रेसवे का करीब 35 से 40 किलोमीटर भाग बुलंदशहर जनपद से होकर गुजरेगा। जिसके निर्माण पर चार से साढ़े चार हजार करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
परियोजना के डिजाइन के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। एक्सप्रेसवे का निर्माण फिलहाल छह लेन में किया जाएगा, जिसे भविष्य की आवश्यकतानुसार आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। वाहनों की गति अधिक होने, एक्सप्रेस पर कोई कट नहीं होने के कारण बुलंदशहर के लोगों को जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने में मात्र 20 मिनट का समय लगेगा। जिससे उनका समय बचने के साथ ही ईंधन की खपत भी कम होगी।
आर्थिक क्रांति का बनेगा आधार : यह केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक इकनॉमिक कॉरिडोर साबित होगा। गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच इसका सीधे लिंक होगा। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर भी विकसित किया जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र के विकसित होने से होटल उद्योग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक आदि का भी विकास होगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। एक्सप्रेसवे के किनारे की जमीन की कीमतें बढ़ने का भी किसानों को लाभ मिलेगा।
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ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे जिले से गुजर रहे गंगा एक्सप्रेसवे को जेवर एयरपोर्ट से जोड़ेगा। लिंक एक्सप्रेसवे के लिए बृहस्पतिवार का दिन काफी महत्वपूर्ण रहा। पहले दिन खुर्जा तहसील के पांच किसानों ने अपनी जमीनों का बैनामा करके इस महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने के लिए अपनी हिस्से का बुनियादी पत्थर रख दिया है। नगरीय क्षेत्र में किसानों को सर्किल रेट का दो गुना, ग्रामीण क्षेत्र में सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।
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जिलाधिकारी श्रुति ने अधिकारियों को बैनामा प्रक्रिया को सुचारू, पारदर्शी एवं त्वरित रूप से संपादित कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को बैनामा प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो तथा शीघ्र उनके खातों में धनराशि भेजी जाए, ताकि परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण की जा सके।
इस अवसर पर बैनामा करने वाले किसानों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके इस योगदान से क्षेत्र एवं प्रदेश का समग्र विकास होगा। आने वाली पीढ़ियों को इसका व्यापक लाभ प्राप्त होगा। अन्य भू-स्वामियों से भी अपील की गई कि वे जल्द से जल्द अपने बैनामे यूपीडा के पक्ष में संपादित कराएं, जिससे उन्हें समयबद्ध भुगतान प्राप्त हो सके।
लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर तहसील के 17 गांव, शिकारपुर तहसील के पांच गांव, स्याना तहसील के आठ गांव, खुर्जा के सात गांव, सिकंदराबाद तहसील के दो गांव, जनपद की पांच तहसीलों के कुल 39 गांवों से होकर गुजरेगा। परियोजना के लिए करीब 8700 किसानों की कुल 677 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।
74 किलोमीटर दूरी के लिंक एक्सप्रेसवे का करीब 35 से 40 किलोमीटर भाग बुलंदशहर जनपद से होकर गुजरेगा। जिसके निर्माण पर चार से साढ़े चार हजार करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
परियोजना के डिजाइन के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। एक्सप्रेसवे का निर्माण फिलहाल छह लेन में किया जाएगा, जिसे भविष्य की आवश्यकतानुसार आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। वाहनों की गति अधिक होने, एक्सप्रेस पर कोई कट नहीं होने के कारण बुलंदशहर के लोगों को जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने में मात्र 20 मिनट का समय लगेगा। जिससे उनका समय बचने के साथ ही ईंधन की खपत भी कम होगी।
आर्थिक क्रांति का बनेगा आधार : यह केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक इकनॉमिक कॉरिडोर साबित होगा। गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच इसका सीधे लिंक होगा। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर भी विकसित किया जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र के विकसित होने से होटल उद्योग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक आदि का भी विकास होगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। एक्सप्रेसवे के किनारे की जमीन की कीमतें बढ़ने का भी किसानों को लाभ मिलेगा।