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नाले में बही छात्रा: पिता के दिल से फूटा दर्द का सैलाब, जुबां पर एक ही सवाल... क्या बिटिया वापस आ जाएगी?
Thu, 30 Jul 2026 03:38 PM IST
Sharukh Khan
राहुल सक्सेना, अमर उजाला, बुलंदशहर
राहुल सक्सेना, अमर उजाला, बुलंदशहर
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 30 Jul 2026 03:38 PM IST
सार
बुलंदशहर में खुले नाले में बही कक्षा चार की छात्रा चारु का दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लगा। छात्रा को तलाशने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी फ्लड के लगभग 150 जवान मशक्कत कर रहे हैं।
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बच्ची की तलाश करते हुए टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पिता ने स्कूल में फोन करके कहा था... पानी बहुत है मेरी बेटी को मत भेजना लेकिन स्कूल ने एक न सुनी। बारिश में कमर तक भरे पानी और खुले नालों के बीच 11 साल की चारू को अकेले घर भेज दिया। कुछ देर बाद खबर आई कि वह नाले में बह गई है। सो रहा सिस्टम 30 घंटे बाद जागा और चार अधिकारियों को शासन ने निलंबित कर दिया, पर पिता का एक सवाल अभी जवाब के इंतजार में है कि क्या मेरी चारू अब वापस आ जाएगी?
चारू के पिता रिंकू ने बुधवार को जिलाधिकारी कुमार हर्ष से रोते हुए कहा... साहब मैंने मंगलवार को बारिश होने के दौरान स्कूल में फोन करके कहा था कि जब तक कोई लेने न आए तब तक चारू को स्कूल से भेजना नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन ने चारू को घर के लिए भेज दिया। जिसके चलते हादसा हुआ। वह बार-बार रोते हुए कह रहे थे कि स्कूल प्रबंधन के लोग उनके फोन पर हुई बात सुन लेते तो उनकी बेटी आज घर में उनके साथ घर में होती।
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चारू के पिता रिंकू ने बुधवार को जिलाधिकारी कुमार हर्ष से रोते हुए कहा... साहब मैंने मंगलवार को बारिश होने के दौरान स्कूल में फोन करके कहा था कि जब तक कोई लेने न आए तब तक चारू को स्कूल से भेजना नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन ने चारू को घर के लिए भेज दिया। जिसके चलते हादसा हुआ। वह बार-बार रोते हुए कह रहे थे कि स्कूल प्रबंधन के लोग उनके फोन पर हुई बात सुन लेते तो उनकी बेटी आज घर में उनके साथ घर में होती।
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डीएम कुमार हर्ष ने आश्वासन दिया कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद लोगों के सवाल हैं कि सिस्टम हादसे का ही इंतजार क्यों करता है? इससे पहले भी जिले में खुले नाले में डूबकर कई बच्चों की जान जा चुकी हैं। लोग भी कुछ समय के लिए आवाज उठाते हैं और बाद में दोबारा से वही स्थिति हो जाती है।
लोगों का कहना है कि हादसे का जितना जिम्मेदार स्कूल प्रशासन है, उतना ही जिम्मेदार नगर पालिका है। शहर में खुले नाले अभी तक कई मासूमों की जान ले चुके हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर सब शून्य है।
मां की एक ही जिद- बस मेरी बेटी चारू को एक बार दिखा दो
मेरी चारू को बस एक बार दिखा दो, उसकी आवाज सुने हुए दो दिन हो गए हैं। यह बातें बोल-बोल कर मां ज्ञानवती बार-बार बेहोश हो रही हैं। वह कह रहीं हैं बेटी की आवाज पूरे दिन घर के अंदर गुंजती रहती थी। अब केवल सिसकियां और मातम का माहौल है।
मेरी चारू को बस एक बार दिखा दो, उसकी आवाज सुने हुए दो दिन हो गए हैं। यह बातें बोल-बोल कर मां ज्ञानवती बार-बार बेहोश हो रही हैं। वह कह रहीं हैं बेटी की आवाज पूरे दिन घर के अंदर गुंजती रहती थी। अब केवल सिसकियां और मातम का माहौल है।
परिजनों की आंखें दरवाजे पर टिकी हैं कि शायद कोई खुशखबरी मिल जाए। चारू के घर पर रिश्तेदारों और आसपास के लोगों का लगातार आना-जाना लगा हुआ है। हर कोई परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहा है लेकिन मां, दादी और अन्य परिजनों का दर्द किसी से देखा नहीं जा रहा है। चारू की मां बार-बार बेहोश हो रही हैं और होश में आते ही कह रही हैं कि बेटी को एक बार दिखा दो।
इकलौती बेटी को पढ़ाकर अफसर बनाना चाहते थे पिता
पिता रिंकू ने बताया कि वह कपड़े की दुकान पर नौकरी करते हैं। उनके दो संतान है बड़ा बेटा गगन जो बीबीए कर रहा है। 11 वर्षीय चारू छोटी थी और परिवार की लाडली थी। वह बेटी को पढ़ा अफसर बनाना चाहते थे। कक्षा पांच के बाद बेटी का किसी बड़े स्कूल में दाखिला कराने की योजना थी। जिससे उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करें। उनका सपना बेटी को पढ़ा लिखाकर अफसर बनाने का था।
पिता रिंकू ने बताया कि वह कपड़े की दुकान पर नौकरी करते हैं। उनके दो संतान है बड़ा बेटा गगन जो बीबीए कर रहा है। 11 वर्षीय चारू छोटी थी और परिवार की लाडली थी। वह बेटी को पढ़ा अफसर बनाना चाहते थे। कक्षा पांच के बाद बेटी का किसी बड़े स्कूल में दाखिला कराने की योजना थी। जिससे उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करें। उनका सपना बेटी को पढ़ा लिखाकर अफसर बनाने का था।
परिजनों का बुरा हाल, जुड़ी पूरे इलाके की संवेदनाएं
पीड़ित पिता रिंकू ने बताया कि चारू के लापता होने के बाद से घर में किसी ने खाना नहीं खाया है। हादसे के बाद से परिवार के लोग अन्न-जल त्यागे बैठे हैं। पूरे परिवार की निगाहें सिर्फ चारू की तलाश पर टिकी हुई हैं। उधर, प्रशासन और पुलिस की टीमों ने रातभर तलाश अभियान जारी रखा।
पीड़ित पिता रिंकू ने बताया कि चारू के लापता होने के बाद से घर में किसी ने खाना नहीं खाया है। हादसे के बाद से परिवार के लोग अन्न-जल त्यागे बैठे हैं। पूरे परिवार की निगाहें सिर्फ चारू की तलाश पर टिकी हुई हैं। उधर, प्रशासन और पुलिस की टीमों ने रातभर तलाश अभियान जारी रखा।
चारू की तलाश अब सिर्फ एक प्रशासनिक अभियान नहीं रह गई है। पूरे इलाके की संवेदना उससे जुड़ गई है। हर गुजरते घंटे के साथ लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। काली नदी के किनारे पर दिनभर पांच सौ से अधिक लोग एकत्रित रहे और हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी, कि कहीं से बस चारू का पता लग जाए।
रिपोर्ट के आधार पर शासन ने दो सफाई इंस्पेक्टर व दो जेई को निलंबित कर दिया है। पूरे मामले की जांच के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व को जांच सौंपी है। अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उन पर भी कार्रवाई की जा रही है। कुमार हर्ष, डीएम
नाले में बही छात्रा का दूसरे दिन भी नहीं लगा सुराग, चार निलंबित
बुलंदशहर में खुले नाले में बही कक्षा चार की छात्रा चारु का दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लगा। छात्रा को तलाशने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी फ्लड के लगभग 150 जवान मशक्कत कर रहे हैं। नगर पालिका और प्रशासन की टीमें भी बच्ची के तलाशी अभियान में जुटीं हुईं थीं। बच्ची को तलाशने की कोशिशें देर रात तक जारी थीं। इस मामले में शासन ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका के दो सफाई इंस्पेक्टर और दो जेई को निलंबित कर दिया है।
बुलंदशहर में खुले नाले में बही कक्षा चार की छात्रा चारु का दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लगा। छात्रा को तलाशने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी फ्लड के लगभग 150 जवान मशक्कत कर रहे हैं। नगर पालिका और प्रशासन की टीमें भी बच्ची के तलाशी अभियान में जुटीं हुईं थीं। बच्ची को तलाशने की कोशिशें देर रात तक जारी थीं। इस मामले में शासन ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका के दो सफाई इंस्पेक्टर और दो जेई को निलंबित कर दिया है।