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Bulandshahar News: एक करोड़ रुपये मंडी शुल्क के गबन में पूर्व लिपिक पर रिपोर्ट दर्ज
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अनूपशहर। कृषि उत्पादन मंडी समिति में व्यापारियों से वसूले गए मंडी शुल्क, विकास सेस और किराये का करीब एक करोड़ रुपये गबन करने के मामले में अब रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। अधिकारियों ने पूर्व लिपिक पर तो रिपोर्ट दर्ज करा दी लेकिन मंडी सचिव के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। वहीं, अब पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष अरब सिंह ने एडीएम वित्त को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि मंडी सचिव और बाबू देव कुमार शर्मा ने वर्ष 2021-22 से 2025 तक वसूला गया करीब एक करोड़ रुपये विभाग के खाते में जमा ही नहीं किया। आरोप लगाया था कि आरोपियों ने फर्जी रसीदों के माध्यम से धनराशि वसूल की थी, लेकिन इसे मंडी समिति के सरकारी खाते में जमा नहीं कराया। इसके बाद मामले में डीडी मंडी राजीव कुमार राय ने जांच कराई तो सामने आया कि मंडी के पोर्टल पर फर्जी तरीके से व्यापारियों की बकाया डिमांड कम कर दी जाती थी। इससे सरकारी अभिलेखों में वास्तविक बकाया कम दिखाई देता रहा। वहीं, रसीद बुक की ऊपरी प्रति खाली छोड़कर कार्बन कॉपी पर किराया दर्शाकर 13,410 रुपये की अतिरिक्त हेराफेरी किए जाने का भी आरोप है।
चार्ज और नो-ड्यूज दिए बिना सेवानिवृत्ति का आरोप
आरोप है कि सेवानिवृत्ति से पहले और बाद में कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद पूर्व लिपिक ने अपने पटल से संबंधित अभिलेख और पूरा चार्ज संबंधित अधिकारियों को नहीं सौंपा। बाद में जब व्यापारियों के पोर्टल पर बकाया धनराशि दिखाई देने लगी और शिकायतें मिलने लगीं तो मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई।
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ब्याज का 15.12 लाख रुपये बकाया
गबन का खुलासा होने के बाद मामले में आरोपी सेवानिवृत्त बाबू देव कुमार शर्मा ने करीब 75.99 लाख रुपये की धनराशि विभाग के खाते में जमा करा दी है। अधिकारियों के मुताबिक अभी बाबू से 15.12 लाख रुपये का ब्याज और वसूल किया जाना है। विभागीय निर्देशों के बावजूद रकम जमा नहीं होने पर मंडी प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की।
कोट-- -
आरोपी सेवानिवृत्त बाबू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। मंडी सचिव समेत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराई जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।-- - अभिषेक कुमार सिंह, एडीएम वित्त
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भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष अरब सिंह ने एडीएम वित्त को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि मंडी सचिव और बाबू देव कुमार शर्मा ने वर्ष 2021-22 से 2025 तक वसूला गया करीब एक करोड़ रुपये विभाग के खाते में जमा ही नहीं किया। आरोप लगाया था कि आरोपियों ने फर्जी रसीदों के माध्यम से धनराशि वसूल की थी, लेकिन इसे मंडी समिति के सरकारी खाते में जमा नहीं कराया। इसके बाद मामले में डीडी मंडी राजीव कुमार राय ने जांच कराई तो सामने आया कि मंडी के पोर्टल पर फर्जी तरीके से व्यापारियों की बकाया डिमांड कम कर दी जाती थी। इससे सरकारी अभिलेखों में वास्तविक बकाया कम दिखाई देता रहा। वहीं, रसीद बुक की ऊपरी प्रति खाली छोड़कर कार्बन कॉपी पर किराया दर्शाकर 13,410 रुपये की अतिरिक्त हेराफेरी किए जाने का भी आरोप है।
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चार्ज और नो-ड्यूज दिए बिना सेवानिवृत्ति का आरोप
आरोप है कि सेवानिवृत्ति से पहले और बाद में कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद पूर्व लिपिक ने अपने पटल से संबंधित अभिलेख और पूरा चार्ज संबंधित अधिकारियों को नहीं सौंपा। बाद में जब व्यापारियों के पोर्टल पर बकाया धनराशि दिखाई देने लगी और शिकायतें मिलने लगीं तो मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई।
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ब्याज का 15.12 लाख रुपये बकाया
गबन का खुलासा होने के बाद मामले में आरोपी सेवानिवृत्त बाबू देव कुमार शर्मा ने करीब 75.99 लाख रुपये की धनराशि विभाग के खाते में जमा करा दी है। अधिकारियों के मुताबिक अभी बाबू से 15.12 लाख रुपये का ब्याज और वसूल किया जाना है। विभागीय निर्देशों के बावजूद रकम जमा नहीं होने पर मंडी प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की।
कोट
आरोपी सेवानिवृत्त बाबू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। मंडी सचिव समेत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराई जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।