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Bulandshahar News: 10 साल की मासूम के कत्ल में पड़ोसी को उम्रकैद, पिता समेत तीन बरी
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बुलंदशहर। अगौता थाना क्षेत्र के गांव जौलीगढ़ में करीब साढ़े चार साल पहले हुई 10 साल की मासूम बच्ची सबा की हत्या के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-05 मोहम्मद नसीम ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मुख्य आरोपी पड़ोसी आमिर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, दूसरी ओर पुलिस की विवेचना में नामजद किए गए मृतका के पिता और परिवार के दो अन्य सदस्यों को साक्ष्यों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया गया है।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि घटना 19 सितंबर 2021 की है। थाना अगौता क्षेत्र के जौलीगढ़ निवासी शबनम ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उनकी 10 वर्षीय बेटी सबा घर पर अकेली थी, तभी आरोपियों ने घर में घुसकर उसकी गर्दन रेतकर हत्या कर दी थी। इस मामले में शुरुआत में मृतका के अपनों पर ही शक की सुई घूमी थी और पुलिस ने मृतका के पिता मुजम्मिल, चाचा मुदस्सिर और एक अन्य रिश्तेदार शादाब समेत पड़ोसी आमिर के खिलाफ तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में जांच पूरी कर पुलिस ने सभी चार नामजद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में दाखिल कर दी थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उन्हें रंजिशन फंसाया गया है। न्यायालय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पाया कि मुजम्मिल, मुदस्सिर और शादाब के खिलाफ हत्या में शामिल होने के पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं हैं। अदालत ने इन तीनों को दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए। जबकि आमिर को दोनों पक्षों के गवाहों के बयान और साक्ष्यों का अवलोकन कर दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास और 65 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि कुल जुर्माने की राशि (65,000 रुपये) का 80 प्रतिशत हिस्सा मृतका की माता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिया जाए।
साइंटिफिक एविडेंस ने पड़ोसी को दबोचा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की गई। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घटना के समय पड़ोसी आमिर के कपड़ों पर खून के निशान पाए गए थे और उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छुरी भी बरामद की गई थी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि आमिर के कपड़ों पर मिला रक्त और मृतका का ब्लड ग्रुप एक ही था। इसी वैज्ञानिक साक्ष्य ने आमिर के खिलाफ दोष सिद्ध करने में मुख्य भूमिका निभाई।
अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते समय माननीय न्यायाधीश ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत जघन्य है। एक मासूम बच्ची की गला काटकर हत्या करना समाज के लिए कलंक है। हालांकि, बचाव पक्ष ने आमिर की कम उम्र और गरीबी का वास्ता देकर कम सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे मरते दम तक जेल की सलाखों के पीछे रखने का फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद जेल में बंद आमिर को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया गया है।
उच्च न्यायालय में जाएगा पीड़िता पक्ष
इस मामले में अधिवक्ता अनीस ने कहा कि मृतक के पिता समेत तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया है, कहीं ना कहीं पुलिस की कमजोर जांच इसका कारण रही है। हम तीनों आरोपियों के खिलाफ जल्द ही उच्च न्यायालय में जाएंगे।
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अभियोजन पक्ष ने बताया कि घटना 19 सितंबर 2021 की है। थाना अगौता क्षेत्र के जौलीगढ़ निवासी शबनम ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उनकी 10 वर्षीय बेटी सबा घर पर अकेली थी, तभी आरोपियों ने घर में घुसकर उसकी गर्दन रेतकर हत्या कर दी थी। इस मामले में शुरुआत में मृतका के अपनों पर ही शक की सुई घूमी थी और पुलिस ने मृतका के पिता मुजम्मिल, चाचा मुदस्सिर और एक अन्य रिश्तेदार शादाब समेत पड़ोसी आमिर के खिलाफ तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में जांच पूरी कर पुलिस ने सभी चार नामजद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में दाखिल कर दी थी।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उन्हें रंजिशन फंसाया गया है। न्यायालय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पाया कि मुजम्मिल, मुदस्सिर और शादाब के खिलाफ हत्या में शामिल होने के पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं हैं। अदालत ने इन तीनों को दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए। जबकि आमिर को दोनों पक्षों के गवाहों के बयान और साक्ष्यों का अवलोकन कर दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास और 65 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि कुल जुर्माने की राशि (65,000 रुपये) का 80 प्रतिशत हिस्सा मृतका की माता को क्षतिपूर्ति के रूप में दिया जाए।
साइंटिफिक एविडेंस ने पड़ोसी को दबोचा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की गई। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घटना के समय पड़ोसी आमिर के कपड़ों पर खून के निशान पाए गए थे और उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छुरी भी बरामद की गई थी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि आमिर के कपड़ों पर मिला रक्त और मृतका का ब्लड ग्रुप एक ही था। इसी वैज्ञानिक साक्ष्य ने आमिर के खिलाफ दोष सिद्ध करने में मुख्य भूमिका निभाई।
अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते समय माननीय न्यायाधीश ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत जघन्य है। एक मासूम बच्ची की गला काटकर हत्या करना समाज के लिए कलंक है। हालांकि, बचाव पक्ष ने आमिर की कम उम्र और गरीबी का वास्ता देकर कम सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे मरते दम तक जेल की सलाखों के पीछे रखने का फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद जेल में बंद आमिर को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया गया है।
उच्च न्यायालय में जाएगा पीड़िता पक्ष
इस मामले में अधिवक्ता अनीस ने कहा कि मृतक के पिता समेत तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया है, कहीं ना कहीं पुलिस की कमजोर जांच इसका कारण रही है। हम तीनों आरोपियों के खिलाफ जल्द ही उच्च न्यायालय में जाएंगे।

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