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उज्मा खान की कांवड़ यात्रा: तन पर बुर्का, कंधे पर कांवड़, बोलीं- सनातन धर्म में आस्था; सीएम योगी पर पूरा भरोसा
Mon, 10 Aug 2026 02:54 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
संवाद न्यूज एजेंसी, बुलंदशहर
संवाद न्यूज एजेंसी, बुलंदशहर
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Mon, 10 Aug 2026 02:54 PM IST
सार
बुलंदशह के अनूपशहर गंगा घाट पर उज्मा खान की कांवड़ यात्रा ने लोगों का ध्यान खींचा। बुर्के में कांवड़ उठाकर निकलीं उज्मा ने सनातन धर्म में आस्था जताई और विरोध की परवाह न करने की बात कही।
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कांवड़ यात्रा पर निकलीं 26 वर्षीय उज्मा
- फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
सावन के पवित्र महीने में अनूपशहर के गंगा घाट पर भक्ति और आस्था की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। यहां 26 वर्षीय मुस्लिम महिला उज्मा खान अपने लिव-इन पार्टनर लोकेंद्र मीणा के साथ कंधे पर कांवड़ उठाकर शिव भक्ति के रंग में रंगी नजर आईं। उज्मा लगातार दूसरे साल अनूपशहर गंगा घाट से कांवड़ उठाकर रवाना हुई हैं।
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उज्मा खान ने बेबाकी से कहा कि मैं बुर्का पहनकर कांवड़ उठा रही हूं और किसी भी तरह के सामाजिक विरोध से नहीं डरती। जिसको मेरे बारे में जो कहना है कहे, मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरी सनातन धर्म में बहुत गहरी आस्था है। लोकेंद्र मीणा ने बताया कि उज्मा और वे पिछले पांच वर्षों से एक साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। दोनों की दो बेटियां भी हैं। इनमें दो साल की बड़ी बेटी का नाम परी और एक साल की छोटी बेटी का नाम सोनपरी है।
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लोकेंद्र के मुताबिक वे जल्द ही उज्मा के साथ औपचारिक रूप से शादी करेंगे और उज्मा कानूनी प्रक्रिया के तहत धर्म परिवर्तन कर सनातन धर्म अपनाएंगी। अपनी प्रेम कहानी के बारे में बताते हुए लोकेंद्र ने बताया कि उज्मा का गांव तिलखड़ी, उनके अपने गांव रबुपुरा ग्रेटर नोएडा क्षेत्र से महज चार किलोमीटर की दूरी पर है। लोकेंद्र की उज्मा के गांव में ही हलवाई की दुकान थी।
इसी दौरान फोन और फेसबुक के माध्यम से दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई और वे एक साथ रहने लगे। पिछले सावन में भी वे लोकेंद्र के साथ अनूपशहर घाट से गंगाजल लेकर शिवालय गई थीं। इस बार भी उज्मा बेझिझक अपने साथी का हाथ थामे पूरी श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा पर निकली हैं, जिसे देखकर घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालु भी हैरान और अचंभित हैं।
इसी दौरान फोन और फेसबुक के माध्यम से दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई और वे एक साथ रहने लगे। पिछले सावन में भी वे लोकेंद्र के साथ अनूपशहर घाट से गंगाजल लेकर शिवालय गई थीं। इस बार भी उज्मा बेझिझक अपने साथी का हाथ थामे पूरी श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा पर निकली हैं, जिसे देखकर घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालु भी हैरान और अचंभित हैं।
कंधों पर 41 लीटर गंगाजल उठाए पैदल चले मुकुल
अनूपशहर। इरादे बुलंद हों और दिल में शिव की भक्ति, तो शारीरिक सीमाएं छोटी पड़ जाती हैं। बुलंदशहर के खानपुर निवासी 20 वर्षीय मुकुल इसका उदाहरण हैं। महज तीन फीट से थोड़ी अधिक लंबाई वाले मुकुल अनूपशहर गंगा घाट से 41 लीटर गंगाजल भरकर अपने गांव खानपुर के लिए पैदल कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। मुकुल जिस प्लास्टिक कैन (कलश) में गंगाजल ले जा रहे हैं, उसकी लंबाई उनकी अपनी कद-काठी से थोड़ी ही कम है। इसके बावजूद, वे बिना किसी झिझक या थकावट के भारी-भरकम कलश कांवड़ को अपने कंधों पर संतुलित करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
अनूपशहर। इरादे बुलंद हों और दिल में शिव की भक्ति, तो शारीरिक सीमाएं छोटी पड़ जाती हैं। बुलंदशहर के खानपुर निवासी 20 वर्षीय मुकुल इसका उदाहरण हैं। महज तीन फीट से थोड़ी अधिक लंबाई वाले मुकुल अनूपशहर गंगा घाट से 41 लीटर गंगाजल भरकर अपने गांव खानपुर के लिए पैदल कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। मुकुल जिस प्लास्टिक कैन (कलश) में गंगाजल ले जा रहे हैं, उसकी लंबाई उनकी अपनी कद-काठी से थोड़ी ही कम है। इसके बावजूद, वे बिना किसी झिझक या थकावट के भारी-भरकम कलश कांवड़ को अपने कंधों पर संतुलित करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
मुकुल की यह भक्ति कोई एक बार की बात नहीं है। वे लगातार दूसरी बार अनूपशहर से गंगाजल भरकर अपने गांव के लिए पैदल रवाना हुए हैं। राह से गुजरने वाले श्रद्धालु और स्थानीय लोग जब तीन फीट के मुकुल को अपने कंधों पर इतनी बड़ी कांवड़ ले जाते देखकर हैरान हो रहे हैं। मुकुल का कहना है कि यह सब भोलेनाथ की कृपा और आशीर्वाद का नतीजा है।
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