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Chandauli News: आजादी के 78 वर्षों बाद भी छह गांवों के मुख्य रास्ते कच्चे, दाैड़ नहीं पा रहा विकास
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नौगढ़ के होरिला गांव जाने वाला कच्चा मार्ग। संवाद
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आजादी के 78 वर्षों बाद भी जिले के छह गांवों की ओर से जाने वाली सड़क पक्की नहीं बन पाई है। नौगढ़ और बरहनी विकासखंड के गांवों के रास्ते कच्चे होने के कारण विकास दाैड़ नहीं पा रहा है। इन गांवों के 5000 से ज्यादा लोग आज भी कच्चे रास्ते से आवागमन करते हैं। कच्चे रास्ते पर बारिश में पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों बार गुहार लगाने के बाद भी गांवों की दशा नहीं सुधर रही है।
नौगढ़ विकासखंड के होरिला, धोबही, सेमर और साधोपुर और बरहनी विकासखंड के कुशहा-सलेमपुर और खराठी गांव में आज भी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। नौगढ़ के चार गांवों में केवल लाल मिट्टी की सड़क ही नजर आती है। इस मिट्टी पर वाहन लेकर चलना खतरनाक है। इन सड़कों से होकर बच्चे स्कूल भी आते-जाते हैं। गांवों में अधिकांश लोग मजदूरी कर भरण-पोषण करते हैं। नौगढ़ के चार गांवाें के लोग न केवल सड़क बल्कि पानी व बिजली की समस्या से भी जूझते रहते हैं। गांवों में कुछ ही हैंडपंप लगे हैं जो गर्मी आते ही पानी देना छोड़ देते हैं। इससे गांव के लोगों को चुआड़ (पानी के प्राकृतिक स्रोतों) पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं गांवों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी सुदृढ़ नहीं है। हवा तेज चलने पर वनक्षेत्र से गुजरे बिजली के तार टूट जाते हैं। कई दिनों तक गांवों में बिजली गुल रहती है।
नौगढ़ के चार गांवों में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। इससे गांव के लोगों को इलाज के लिए 15 से 20 किलोमीटर दूर नौगढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी प्रसूताओं को होती है। सड़क न होने से उन्हें एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं मिल पाती। वहीं आकस्मिक रूप से किसी के बीमार पड़ने पर चिकित्सकीय सुविधा भी नहीं मिल पाती है। नौगढ़ के चार गांवों में सड़क बनाने के लिए वर्ष 2008-09 में पीडब्ल्यूडी की ओर से कार्ययोजना बनाकर शासन को प्रेषित की गई थी। शासन से कार्ययोजना को मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2013-14 में धन भी अवमुक्त कर दिया गया था लेकिन वनविभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) न मिल पाने के कारण योजना परवान नहीं चढ़ पाई थी। बरहनी विकासखंड के बहोरा ग्राम पंचायत के कुशहा-सलेमपुर गांव को जोड़ने वाली सड़क आज भी कच्ची है। इससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुशहा प्राथमिक विद्यालय के पास से सलेमपुर गांव तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह कच्चा है। बारिश के दिनों में सड़क की हालत बेहद खराब हो जाती है।लोग ट्रैक्टर से जोताई कर रास्ते को समतल कर आने-जाने के लायक बनाते हैं। वहीं मरीजों और बुजुर्गों का अस्पताल तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। ग्राम प्रधान रीता देवी ने बताया कि सड़क का निर्माण कार्य का बजट ज्यादा होने से ग्राम पंचायत स्तर से कराना संभव नहीं है। इसके लिए जिला पंचायत या विधायक निधि से बजट की आवश्यकता है। वहीं क्षेत्र में तंबागढ़ मुख्य सड़क से खराठी गांव को जोड़ने वाला करीब 600 से 700 मीटर लंबा मार्ग भी कच्चा
कृष्ण कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खंड, चंदौली ने बताया कि वनांचल के होरिला, धोबही, सेमर और साधोपुर गांव में पक्की सड़क बनाने के लिए इसी वित्तीय वर्ष में कार्ययोजना बनाई जाएगी। शासन से मंजूरी व वनविभाग से एनओसी मिलने के बाद सड़कें बनवा दी जाएंगी।
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नौगढ़ विकासखंड के होरिला, धोबही, सेमर और साधोपुर और बरहनी विकासखंड के कुशहा-सलेमपुर और खराठी गांव में आज भी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। नौगढ़ के चार गांवों में केवल लाल मिट्टी की सड़क ही नजर आती है। इस मिट्टी पर वाहन लेकर चलना खतरनाक है। इन सड़कों से होकर बच्चे स्कूल भी आते-जाते हैं। गांवों में अधिकांश लोग मजदूरी कर भरण-पोषण करते हैं। नौगढ़ के चार गांवाें के लोग न केवल सड़क बल्कि पानी व बिजली की समस्या से भी जूझते रहते हैं। गांवों में कुछ ही हैंडपंप लगे हैं जो गर्मी आते ही पानी देना छोड़ देते हैं। इससे गांव के लोगों को चुआड़ (पानी के प्राकृतिक स्रोतों) पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं गांवों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी सुदृढ़ नहीं है। हवा तेज चलने पर वनक्षेत्र से गुजरे बिजली के तार टूट जाते हैं। कई दिनों तक गांवों में बिजली गुल रहती है।
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नौगढ़ के चार गांवों में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। इससे गांव के लोगों को इलाज के लिए 15 से 20 किलोमीटर दूर नौगढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी प्रसूताओं को होती है। सड़क न होने से उन्हें एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं मिल पाती। वहीं आकस्मिक रूप से किसी के बीमार पड़ने पर चिकित्सकीय सुविधा भी नहीं मिल पाती है। नौगढ़ के चार गांवों में सड़क बनाने के लिए वर्ष 2008-09 में पीडब्ल्यूडी की ओर से कार्ययोजना बनाकर शासन को प्रेषित की गई थी। शासन से कार्ययोजना को मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2013-14 में धन भी अवमुक्त कर दिया गया था लेकिन वनविभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) न मिल पाने के कारण योजना परवान नहीं चढ़ पाई थी। बरहनी विकासखंड के बहोरा ग्राम पंचायत के कुशहा-सलेमपुर गांव को जोड़ने वाली सड़क आज भी कच्ची है। इससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुशहा प्राथमिक विद्यालय के पास से सलेमपुर गांव तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह कच्चा है। बारिश के दिनों में सड़क की हालत बेहद खराब हो जाती है।लोग ट्रैक्टर से जोताई कर रास्ते को समतल कर आने-जाने के लायक बनाते हैं। वहीं मरीजों और बुजुर्गों का अस्पताल तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। ग्राम प्रधान रीता देवी ने बताया कि सड़क का निर्माण कार्य का बजट ज्यादा होने से ग्राम पंचायत स्तर से कराना संभव नहीं है। इसके लिए जिला पंचायत या विधायक निधि से बजट की आवश्यकता है। वहीं क्षेत्र में तंबागढ़ मुख्य सड़क से खराठी गांव को जोड़ने वाला करीब 600 से 700 मीटर लंबा मार्ग भी कच्चा
कृष्ण कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खंड, चंदौली ने बताया कि वनांचल के होरिला, धोबही, सेमर और साधोपुर गांव में पक्की सड़क बनाने के लिए इसी वित्तीय वर्ष में कार्ययोजना बनाई जाएगी। शासन से मंजूरी व वनविभाग से एनओसी मिलने के बाद सड़कें बनवा दी जाएंगी।