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Chandauli News: पीएमश्री स्कूलों में साल में दो बार होगा बच्चों की प्रगति का आकलन
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पीडीडीयू नगर। पीएमश्री योजना के तहत चयनित परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की प्रगति का आकलन अब केवल परीक्षा के अंकों तक सीमित नहीं रहेगा। बच्चों को साल में दो बार समग्र प्रगति पत्र (होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड) दिया जाएगा। इसमें पढ़ाई के प्रदर्शन के साथ व्यवहार, जीवन कौशल, रुचियों, कला, उपस्थिति और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी जानकारी भी दर्ज होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने समग्र प्रगति पत्र का संशोधित प्रारूप तैयार किया है। इसमें विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, शैक्षिक उपलब्धियों और शिक्षकों की टिप्पणी के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए गए हैं। अभिभावक भी बच्चों की प्रगति को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकेंगे। इससे बच्चों की खूबियों और सीखने में आने वाली कठिनाइयों को समझने में मदद मिलेगी।
जिले में कुल 1185 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 20 पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। समग्र प्रगति पत्र तैयार करने पर प्रति विद्यार्थी करीब 20 रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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बीएसए सचिन कुमार ने बताया कि समग्र प्रगति पत्र से शिक्षक और अभिभावक बच्चों की क्षमताओं, रुचियों और सीखने के दौरान आने वाली कठिनाइयों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इसके आधार पर विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने समग्र प्रगति पत्र का संशोधित प्रारूप तैयार किया है। इसमें विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, शैक्षिक उपलब्धियों और शिक्षकों की टिप्पणी के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए गए हैं। अभिभावक भी बच्चों की प्रगति को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकेंगे। इससे बच्चों की खूबियों और सीखने में आने वाली कठिनाइयों को समझने में मदद मिलेगी।
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जिले में कुल 1185 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 20 पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। समग्र प्रगति पत्र तैयार करने पर प्रति विद्यार्थी करीब 20 रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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बीएसए सचिन कुमार ने बताया कि समग्र प्रगति पत्र से शिक्षक और अभिभावक बच्चों की क्षमताओं, रुचियों और सीखने के दौरान आने वाली कठिनाइयों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इसके आधार पर विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।