दीक्षांत समारोह बना यादगार: 36 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग के बाद बिहार पुलिस को मिले 569 नए जवान, खिले चेहरे
सीआरपीएफ सोनहुल परेड ग्राउंड में कदमताल गूंजा। इस दौरान नव आरक्षियों ने सेवा की शपथ ली। 36 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग के बाद शपथ लेने की बारी आई तो जवानों का चेहरा खुशी से चमक उठा।
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चंदौली जिले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के सोनहुल स्थित ग्रुप केंद्र के परेड ग्राउंड में सोमवार को बिहार पुलिस के 569 प्रशिक्षु नव आरक्षियों का दीक्षांत परेड, पासिंग आउट परेड एवं शपथ ग्रहण समारोह पूरे उत्साह, अनुशासन और गरिमा के साथ आयोजित किया गया। 36 सप्ताह की कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन नव आरक्षियों ने बिहार पुलिस सेवा में औपचारिक रूप से कदम रखा।
समारोह के मुख्य अतिथि पुलिस महानिरीक्षक, मध्य क्षेत्र लखनऊ अनिल कुमार रहे। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और प्रशिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत शानदार मार्चपास्ट की सलामी ली। कदमताल, अनुशासन और समन्वय से सुसज्जित परेड ने उपस्थित अधिकारियों और परिजनों का मन मोह लिया।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस सेवा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने नव आरक्षियों से कानून व्यवस्था बनाए रखने, आमजन के प्रति संवेदनशील रहने और ईमानदारी के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया। 569 प्रशिक्षु आरक्षियों ने समारोह के दौरान राष्ट्र और राज्य की सेवा में पूर्ण निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी से कार्य करने की शपथ ली। इस भावुक क्षण के साक्षी बने परिजनों की आंखों में गर्व और खुशी साफ दिखाई दी।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को किया गया सम्मानित
प्रशिक्षण के दौरान ड्रिल, शूटिंग, इनडोर और आउटडोर गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को मुख्य अतिथि द्वारा ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि इन जवानों का अनुशासन और समर्पण भविष्य में बिहार पुलिस की ताकत बनेगा।
लाल किले की थीम ने बढ़ाई समारोह की भव्यता
परेड ग्राउंड की पृष्ठभूमि को दिल्ली के लाल किले का स्वरूप दिया गया था, जिसने पूरे आयोजन को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। मार्चपास्ट के दौरान देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत वातावरण ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
परिजनों ने गर्व के साथ देखा दीक्षांत समारोह
समारोह में बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में प्रशिक्षुओं के माता-पिता, भाई-बहन और अन्य परिजन पहुंचे थे। उनके लिए पेयजल और बैठने की व्यवस्था की गई थी, हालांकि भीड़ अधिक होने के कारण कई लोगों को कुर्सियां नहीं मिल सकीं और उन्हें जमीन पर बिछी मैट पर बैठकर समारोह देखना पड़ा। राजगीर से पहुंचे प्रशिक्षु अखिलेश कुमार के भाई कमलेश कुमार और माता नुनवती देवी ने कहा कि जमीन पर बैठना पड़ा, लेकिन बेटे को वर्दी में मार्च करते देख सारी असुविधा भूल गए। अन्य परिजनों ने भी अपने बच्चों की उपलब्धि पर गर्व जताया।
अधिकारियों की मौजूदगी
समारोह का संचालन और प्रशिक्षण व्यवस्था पुलिस उपमहानिरीक्षक ग्रुप केंद्र चंदौली राकेश कुमार सिंह के निर्देशन में संपन्न हुई। ग्रुप केंद्र के कमांडेंट प्रद्युम्न कुमार सिंह ने सभी अतिथियों और परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल रेंज चंदौली के पुलिस उपमहानिरीक्षक संजय कुमार, बिहार पुलिस के पुलिस उपमहानिरीक्षक रमन चौधरी, चिकित्सा विभाग के अधिकारी तथा सीआरपीएफ और बिहार पुलिस के अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे।
पुलिस सेवा एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अटूट जिम्मेदारी है। जनता के विश्वास को बनाए रखना ही पुलिसकर्मी की सबसे बड़ी सफलता है।” -अनिल कुमार, पुलिस महानिरीक्षक, मध्य क्षेत्र लखनऊ