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Chandauli News: एक डॉक्टर के भरोसे 122 गांव और चार पशु अस्पताल, इलाज के लिए 18 किमी दूर जाना पड़ता है
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नौगढ़ राजकीय पशु चिकित्सालय। संवाद
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नौगढ़ में 16 हजार पशुपालकों के पास हैं 43 हजार से ज्यादा पशु, इलाज के लिए भटकते हैं पशुपालक
विशाल कुमार गुप्ता
नौगढ़। क्षेत्र में पशुओं के स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति खराब है। नौगढ़ और चकरघट्टा के दो राजकीय पशु चिकित्सालय और जमसोती और मझगावां के दो पशु सेवा केंद्र महज एक पशु चिकित्साधिकारी और एक फार्मासिस्ट के सहारे चल रहे हैं। स्टाफ की भारी कमी से 122 गांवों के पशुपालकों को बीमार मवेशियों के इलाज के लिए 18 किमी की दूर तय करनी पड़ती है।
चकरघट्टा राजकीय पशु चिकित्सालय में तैनात डॉ. कमलेश कुमार पटेल पर ही नौगढ़ राजकीय पशु चिकित्सालय का अतिरिक्त प्रभार भी है। ऐसे में पूरे क्षेत्र की पशुधन स्वास्थ्य जिम्मेदारी एक ही चिकित्सक पर आ गई है। सीमित संसाधन और बढ़ता कार्यभार समय पर इलाज में बड़ी बाधा हैं, इससे पशुपालकों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब पशुधन प्रसार अधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त पड़ा है। पशु सेवा केंद्रों पर प्रसार अधिकारी की अनुपस्थिति से पशुपालकों को न तो पशुओं की बीमारियों की सही जानकारी मिल पा रही है। न ही टीकाकरण, पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से जुड़ी जरूरी सलाह। इसका सीधा असर पशुपालन व्यवसाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। नौगढ़ राजकीय पशु चिकित्सालय में शासन की ओर से 28 जून 2024 को एक नए पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती का आदेश जारी किया गया था, लेकिन कई माह बीत जाने के बावजूद संबंधित चिकित्सक ने अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इससे पशुपालकों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है।
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पशुपालकों की मांग
पशुपालकों का कहना है कि पशुधन उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, लेकिन कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी से यह क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। शासन और जिला प्रशासन से रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, सभी पशु सेवा केंद्रों पर नियमित स्टाफ की तैनाती तथा बंद पड़े केंद्रों को तत्काल शुरू कराने की मांग की है।
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क्या बोले ग्रामीण
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जमसोती पशु सेवा केंद्र पर अवैध अतिक्रमण है और वह अधिकतर बंद रहता है। मजबूरी में 14 किलोमीटर दूर नौगढ़ जाकर पशुओं का इलाज कराना पड़ता है।-गोबिंद, निवासी, नोनवट
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चकरघट्टा में डॉक्टर और फार्मासिस्ट हैं, लेकिन डॉक्टर को नौगढ़ का भी चार्ज है। इलाज और दवा के लिए 18 किलोमीटर तक भटकना पड़ता है।-अमरनाथ यादव, निवासी, टिकुरिया
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गांव में पशु सेवा केंद्र होते हुए भी कई महीनों से बंद है। चार पशु हैं, इलाज कराना बहुत मुश्किल हो गया है।-- श्यामलाल भारती, निवासी, मझगावां
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पशु सेवा केंद्र वर्षों से बंद है। बीमार पशुओं को 20 किलोमीटर दूर नौगढ़ ले जाना मजबूरी बन गई है।-रामजीयावन यादव, निवासी, जमसोती
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एक नजर में हालात
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आबादी-- 2 लाख के करीब
कुल गांव-- 122
पशुपालक-- 16 हजार से ज्यादा
पशुओं की संख्या-- 43 हजार के करीब
पशु चिकित्सालय- 2
पशु सेवा केंद्र- 2
तैनात डॉक्टर : 1
फार्मासिस्ट : 1
पशुधन प्रसार अधिकारी : रिक्त
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कोट--
अप्रैल–मई में स्थानांतरण नीति लागू होने के बाद जिले में पशु चिकित्साधिकारी और पशु सेवा केंद्रों पर जितने भी रिक्त पद हैं, उनकी पूर्ति की जाएगी।-योगेश कुशवाह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, चंदौली
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विशाल कुमार गुप्ता
नौगढ़। क्षेत्र में पशुओं के स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति खराब है। नौगढ़ और चकरघट्टा के दो राजकीय पशु चिकित्सालय और जमसोती और मझगावां के दो पशु सेवा केंद्र महज एक पशु चिकित्साधिकारी और एक फार्मासिस्ट के सहारे चल रहे हैं। स्टाफ की भारी कमी से 122 गांवों के पशुपालकों को बीमार मवेशियों के इलाज के लिए 18 किमी की दूर तय करनी पड़ती है।
चकरघट्टा राजकीय पशु चिकित्सालय में तैनात डॉ. कमलेश कुमार पटेल पर ही नौगढ़ राजकीय पशु चिकित्सालय का अतिरिक्त प्रभार भी है। ऐसे में पूरे क्षेत्र की पशुधन स्वास्थ्य जिम्मेदारी एक ही चिकित्सक पर आ गई है। सीमित संसाधन और बढ़ता कार्यभार समय पर इलाज में बड़ी बाधा हैं, इससे पशुपालकों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब पशुधन प्रसार अधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त पड़ा है। पशु सेवा केंद्रों पर प्रसार अधिकारी की अनुपस्थिति से पशुपालकों को न तो पशुओं की बीमारियों की सही जानकारी मिल पा रही है। न ही टीकाकरण, पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से जुड़ी जरूरी सलाह। इसका सीधा असर पशुपालन व्यवसाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। नौगढ़ राजकीय पशु चिकित्सालय में शासन की ओर से 28 जून 2024 को एक नए पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती का आदेश जारी किया गया था, लेकिन कई माह बीत जाने के बावजूद संबंधित चिकित्सक ने अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इससे पशुपालकों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है।
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पशुपालकों की मांग
पशुपालकों का कहना है कि पशुधन उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, लेकिन कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी से यह क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। शासन और जिला प्रशासन से रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, सभी पशु सेवा केंद्रों पर नियमित स्टाफ की तैनाती तथा बंद पड़े केंद्रों को तत्काल शुरू कराने की मांग की है।
क्या बोले ग्रामीण
जमसोती पशु सेवा केंद्र पर अवैध अतिक्रमण है और वह अधिकतर बंद रहता है। मजबूरी में 14 किलोमीटर दूर नौगढ़ जाकर पशुओं का इलाज कराना पड़ता है।-गोबिंद, निवासी, नोनवट
चकरघट्टा में डॉक्टर और फार्मासिस्ट हैं, लेकिन डॉक्टर को नौगढ़ का भी चार्ज है। इलाज और दवा के लिए 18 किलोमीटर तक भटकना पड़ता है।-अमरनाथ यादव, निवासी, टिकुरिया
गांव में पशु सेवा केंद्र होते हुए भी कई महीनों से बंद है। चार पशु हैं, इलाज कराना बहुत मुश्किल हो गया है।
पशु सेवा केंद्र वर्षों से बंद है। बीमार पशुओं को 20 किलोमीटर दूर नौगढ़ ले जाना मजबूरी बन गई है।-रामजीयावन यादव, निवासी, जमसोती
एक नजर में हालात
आबादी
कुल गांव
पशुपालक
पशुओं की संख्या
पशु चिकित्सालय- 2
पशु सेवा केंद्र- 2
तैनात डॉक्टर : 1
फार्मासिस्ट : 1
पशुधन प्रसार अधिकारी : रिक्त
कोट
अप्रैल–मई में स्थानांतरण नीति लागू होने के बाद जिले में पशु चिकित्साधिकारी और पशु सेवा केंद्रों पर जितने भी रिक्त पद हैं, उनकी पूर्ति की जाएगी।-योगेश कुशवाह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, चंदौली

नौगढ़ राजकीय पशु चिकित्सालय। संवाद

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