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Chandauli News: रामनगर औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों में भी नाराजगी, 12 घंटे काम लेने का आरोप

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:51 AM IST
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Resentment Among Workers in Ramnagar Industrial Area; Allegations of Being Made to Work 12 Hours
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नियामताबाद। नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरी बढ़ाने के विवाद में भड़की हिंसा की आंच चंदौली जिले तक पहुंच गई है। जिले के रामनगर औद्योगिक क्षेत्र के लगभग 7 हजार मजदूरों में असंतोष की बात कही जा रही है। रामनगर औद्योगिक क्षेत्र दो भागों में विभाजित है। औद्योगिक क्षेत्र फेज वन और फेज दो में लगभग 400 फैक्टरियां संचालित हो रही हैं। इसमें लगभग 07 हजार श्रमिक काम करते हैं। मजदूरों का आरोप है कि यहां अधिकतर कंपनियों में श्रमिकों से 12 घंटे तक काम लिया जाता है।
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कुछ जगहों पर 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू है। वहीं मानक के अनुरूप मजदूरी भी नहीं मिलती है। यहां ज्यादातर मजदूरों को ठेकेदार के माध्यम से रखा जाता है। ऐसे में उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी नहीं मिल पाती है। कई बार इसको लेकर मजदूर नेताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया है। ठेकेदार के मातहत होने के कारण मजदूर अपनी जुबान नहीं खोलते हैं। वहीं समाजवादी मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष चंद्रभानु यादव ने कहा कि क्षेत्र में श्रमिकों का शोषण हो रहा है और श्रम कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि कई कंपनियां कागजों पर कम श्रमिक दिखाकर वास्तव में अधिक काम लेती हैं। 12 घंटे की ड्यूटी के बदले मात्र 9 से 11 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। ऐसे में यहां मजदूरों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। नोएडा की तरह यहां कभी भी विरोध प्रदर्शन हो सकता है।
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उधर, नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में हुई हिंसा और विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। रामनगर औद्योगिक क्षेत्र में विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र में बृहस्पतिवार को फ्लैग मार्च किया, वहीं मजदूर नेताओं को नजरबंद भी किया गया है।
औद्योगिक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सादे वेश में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जो श्रमिकों व उनके संगठनों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों के माध्यम से भी पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है, ताकि हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नियंत्रण रखा जा सके। विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए समाजवादी मजदूर सभा और सीटू से जुड़े कई प्रमुख नेताओं को एहतियातन नजरबंद कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अशांति फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में एसडीएम पीडीडीयू नगर अनुपम मिश्र का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि फैक्टरियों और भीड़ वाले स्थानों पर पुलिस के माध्यम से कड़ी निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने का आह्वान किया। फ्लैग मार्च के दौरान सीओ पीडीडीयू नगर अरुण कुमार सिंह, मुगलसराय कोतवाल विजय प्रताप सिंह, घनश्याम शुक्ला आदि माैजूद रहे।

उधर, चकिया क्षेत्र में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के कार्यकर्ताओं ने ग्रेटर नोएडा के श्रमिकों की मांग के समर्थन में बृहस्पतिवार को जुलूस निकाला। बाद में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसील प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से 300 से ज्यादा बंद श्रमिकों को तुरंत रिहा करने, श्रमिकों पर लगाए गए रासुका सहित अन्य मुकदमों को वापस लेने की मांग की। नेताओं ने चार लेबर कोड को रद्द करने, दैनिक मजदूरी कम से कम एक हजार रुपये निर्धारित करने की भी मांग दोहराई। वक्ताओं ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी और मजदूरोंं के जायज सवाल को नजरअंदाज किया गया। सीआईटीयू के नेता रामप्यारे महानंद ने बृहस्पतिवार की हाउस अरेस्ट की कार्रवाई की निंदा की। जुलूस व सभा में सीपीआई एम के नेता परमानंद मौर्य, लालचंद सिंह, राजेंद्र यादव, नंदलाल, राम विलास विश्वकर्मा, शत्रुघ्न चौहान, बड़े लाल, काशी बिंद, जुम्मन, धर्मराज साहनी, कन्हैया लाल आदि शामिल रहे।
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