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समाज को तोड़ने वाले तत्वों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए : माैलाना जाफर
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जिला मुख्यालय पर बुधवार को अज़ाख़ाने रज़ा में अपने खूसूसी अंदाज में शायरों ने हिंदुस्तानी एकता की शान में कसीदे पेश किए। दुलदुल को दूध पिलाकर मुरादें मांगीं और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद किया।
मौलाना जाफर रिज्वी ने अपनी तकरीर में कहा कि इमाम हुसैन यजीद से लड़ाई नहीं करना चाहते थे उन्होंने उसे पैगाम दिया था कि वो उन्हें जाने दे वो शांतिप्रिय देश हिंदुस्तान जाना चाहते हैं।
मौलाना ने इस मौके पर दुलदुल की कहानी पढ़ते हुए कहा कि कर्बला की जंग सिर्फ इंसानों की भूमिका नहीं थी, बेजुबान जानवरों ने भी इमाम हुसैन के साथ मिलकर इस लड़ाई में अपना बेशकीमती योगदान दिया। दुलदुल इमाम हुसैन के घोड़े का नाम था जिसने जंग में आखिर तक इमाम के साथ लड़ाई लड़ी और इमाम के शहीद होने के बाद सबसे पहले उनके खेमे में जाकर उनके न होने की सूचना दी। मौलाना ने कहा मुहर्रम इमाम हुसैन के आदर्शों पर चलने का नाम है।
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समाज को तोड़ने वाले तत्वों के खिलाफ़ अगर खड़ा होना पड़े तो खड़ा होना चाहिए। आठवीं मुहर्रम को मौलाना इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास के मसायब पढ़े। इस दौरान बनासर से आई मशहूर अंजुमन अंसारे हुसैनी रसूलपुरा ने अपने नौहों से अजादारों को रुला दिया। जूलूस में जिले के अलावा बनारस, मिर्जापुर, गाजीपुर, दुलहीपुर, ऐंलहीं के अजादार बड़ी संख्या में जुटे। इस दौरान मायल चंदौलवी, सादिक, रियाज, अनवर, मोहम्मद इंसाफ, सरफराज पहलवान, शहंशाह मिर्जापुरी, हसन मिर्जापुरी, अली इमाम, डाॅक्टर गजंफर इमाम, सरवर भाई, परवेज लाडले, आसिफ इकबाल, पपलू भाई, मोहम्मद रजा सिकंदरपुरी मौजूद रहे। संवाद
मौलाना जाफर रिज्वी ने अपनी तकरीर में कहा कि इमाम हुसैन यजीद से लड़ाई नहीं करना चाहते थे उन्होंने उसे पैगाम दिया था कि वो उन्हें जाने दे वो शांतिप्रिय देश हिंदुस्तान जाना चाहते हैं।
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मौलाना ने इस मौके पर दुलदुल की कहानी पढ़ते हुए कहा कि कर्बला की जंग सिर्फ इंसानों की भूमिका नहीं थी, बेजुबान जानवरों ने भी इमाम हुसैन के साथ मिलकर इस लड़ाई में अपना बेशकीमती योगदान दिया। दुलदुल इमाम हुसैन के घोड़े का नाम था जिसने जंग में आखिर तक इमाम के साथ लड़ाई लड़ी और इमाम के शहीद होने के बाद सबसे पहले उनके खेमे में जाकर उनके न होने की सूचना दी। मौलाना ने कहा मुहर्रम इमाम हुसैन के आदर्शों पर चलने का नाम है।
समाज को तोड़ने वाले तत्वों के खिलाफ़ अगर खड़ा होना पड़े तो खड़ा होना चाहिए। आठवीं मुहर्रम को मौलाना इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास के मसायब पढ़े। इस दौरान बनासर से आई मशहूर अंजुमन अंसारे हुसैनी रसूलपुरा ने अपने नौहों से अजादारों को रुला दिया। जूलूस में जिले के अलावा बनारस, मिर्जापुर, गाजीपुर, दुलहीपुर, ऐंलहीं के अजादार बड़ी संख्या में जुटे। इस दौरान मायल चंदौलवी, सादिक, रियाज, अनवर, मोहम्मद इंसाफ, सरफराज पहलवान, शहंशाह मिर्जापुरी, हसन मिर्जापुरी, अली इमाम, डाॅक्टर गजंफर इमाम, सरवर भाई, परवेज लाडले, आसिफ इकबाल, पपलू भाई, मोहम्मद रजा सिकंदरपुरी मौजूद रहे। संवाद