{"_id":"69b8458c97efbe1e5a00b18e","slug":"417-lakh-animals-vaccinated-against-foot-and-mouth-disease-chitrakoot-news-c-215-1-aur1007-128369-2026-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chitrakoot News: खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव को 4.17 लाख पशुओं को लगे टीके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chitrakoot News: खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव को 4.17 लाख पशुओं को लगे टीके
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:31 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
चित्रकूट। पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए चलाए गए टीकाकरण अभियान में 4.17 लाख पशुओं को टीके लगाए गए। यह रोग अत्यंत संक्रामक और जानलेवा हो सकता है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि खुरपका-मुंहपका एक विषाणुजनित रोग है, जिसके होने पर पशुओं को 104 से 106 डिग्री तेज बुखार, लार टपकने, मुंह और खुरों में छाले तथा लंगड़ापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस रोग से बचाव के लिए पशु विभाग हर साल गाय और भैंसों का टीकाकरण करता है।
इस बार भी टीकाकरण अभियान चलाया गया। इस अभियान में ग्रामीणों ने भी सक्रिय सहयोग दिया। गर्भधारित पशुओं को यह टीका नहीं लगाया जाता है। सपहा गांव के किसान श्याम नारायण ने बताया कि तीन साल पहले उनकी एक गाय की मौत इसी रोग से हो गई थी, जिसके बाद से वह हर साल अपने पशुओं का टीकाकरण कराते हैं।
सीवीओ ने बताया कि संक्रमित पशुओं को तुरंत पशु चिकित्सकों को दिखाने की सलाह दी। उन्होंने पशुओं के बांधने वाले स्थान की नियमित सफाई रखने पर जोर दिया। बताया कि पैरों में फिटकरी या लाल दवा का उपयोग किया जा सकता है। पांच महीने से अधिक उम्र के पशुओं को हर छह महीने में टीका लगवाना चाहिए और घावों की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
Trending Videos
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि खुरपका-मुंहपका एक विषाणुजनित रोग है, जिसके होने पर पशुओं को 104 से 106 डिग्री तेज बुखार, लार टपकने, मुंह और खुरों में छाले तथा लंगड़ापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस रोग से बचाव के लिए पशु विभाग हर साल गाय और भैंसों का टीकाकरण करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस बार भी टीकाकरण अभियान चलाया गया। इस अभियान में ग्रामीणों ने भी सक्रिय सहयोग दिया। गर्भधारित पशुओं को यह टीका नहीं लगाया जाता है। सपहा गांव के किसान श्याम नारायण ने बताया कि तीन साल पहले उनकी एक गाय की मौत इसी रोग से हो गई थी, जिसके बाद से वह हर साल अपने पशुओं का टीकाकरण कराते हैं।
सीवीओ ने बताया कि संक्रमित पशुओं को तुरंत पशु चिकित्सकों को दिखाने की सलाह दी। उन्होंने पशुओं के बांधने वाले स्थान की नियमित सफाई रखने पर जोर दिया। बताया कि पैरों में फिटकरी या लाल दवा का उपयोग किया जा सकता है। पांच महीने से अधिक उम्र के पशुओं को हर छह महीने में टीका लगवाना चाहिए और घावों की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।