{"_id":"6a7b65c0627e667d400e7137","slug":"a-farmer-formed-a-company-and-purchased-a-tractor-in-a-womans-name-chitrakoot-news-c-223-1-sknp1030-143720-2026-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chitrakoot News: किसान कंपनी बनाकर महिला के नाम निकाला ट्रैक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chitrakoot News: किसान कंपनी बनाकर महिला के नाम निकाला ट्रैक्टर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिवांर (हमीरपुर)। थानाक्षेत्र के छानी खुर्द गांव में एक शातिर ठग ने गरीब महिला किसान को अपनी कंपनी में हिस्सेदार बनाया और उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर सरकारी योजना के तहत ट्रैक्टर निकाल लिया और उसे बेचकर भाग गया। अब विभाग और बैंक की तरफ से पीड़िता के पास 12 लाख रुपये का रिकवरी नोटिस आया है जिसे देखकर पीड़ित परिवार के होश उड़ गए हैं।
गांव निवासी पीड़िता गौरा देवी पत्नी रामखिलावन कुशवाहा ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि गांव के नीरज सचान ने कृषि क्षेत्र में भारी मुनाफे और सरकारी लाभ का झांसा देकर एक किसान प्रोडक्शन कंपनी का गठन किया था। आरोपी ने उसका विश्वास जीतने के लिए शुरुआत में उसे कंपनी में जोड़ा और समय-समय पर छोटे-मोटे सरकारी बीज लाकर देता रहा। इस मामूली मदद के बदले उक्त युवक चालाकी से महिला के सभी जरूरी सरकारी दस्तावेज और अंगूठे के निशान अपने पास सुरक्षित रख लिए और उसे बिना भनक लगे उसके दस्तावेजों के आधार पर सरकारी योजना के अंतर्गत सब्सिडी वाला एक ट्रैक्टर फाइनेंस करवा लिया।
यह ट्रैक्टर कागजों पर तो किसान प्रोडक्शन कंपनी के नाम पर स्वीकृत हुआ था, लेकिन आरोपी ने जालसाजी से ट्रैक्टर को फर्म के खाते में दर्ज करने के बजाय सीधे अपने व्यक्तिगत नाम पर ट्रांसफर करवा लिया और तुरंत ही ट्रैक्टर को खुले बाजार में बेचकर पूरी पैसा लेकर गांव से फरार हो गया।
विज्ञापन
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब संबंधित विभाग और बैंक द्वारा पीड़िता के नाम पर 12 लाख का रिकवरी नोटिस जारी किया। ट्रैक्टर की मूल कीमत, ब्याज और पेनल्टी आदि मिलकर यह राशि 12 लाख तक पहुंच चुकी है। नोटिस देखते ही पीड़िता और उसके पति के पैरों तले जमीन खिसक गई, जो अब न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
इस मामले में कौशांबी की टीम सहित जनपद स्तर की टीम भी जांच कर चुकी है। यह एफपीओ के माध्यम से फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी रजिस्टर्ड की गई थी। यह काफी पुराना मामला है। विभाग का इससे कोई लेना-देना नहीं है। - डॉ. प्रमोद कुमार, उप कृषि निदेशक।
विज्ञापन
गांव निवासी पीड़िता गौरा देवी पत्नी रामखिलावन कुशवाहा ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि गांव के नीरज सचान ने कृषि क्षेत्र में भारी मुनाफे और सरकारी लाभ का झांसा देकर एक किसान प्रोडक्शन कंपनी का गठन किया था। आरोपी ने उसका विश्वास जीतने के लिए शुरुआत में उसे कंपनी में जोड़ा और समय-समय पर छोटे-मोटे सरकारी बीज लाकर देता रहा। इस मामूली मदद के बदले उक्त युवक चालाकी से महिला के सभी जरूरी सरकारी दस्तावेज और अंगूठे के निशान अपने पास सुरक्षित रख लिए और उसे बिना भनक लगे उसके दस्तावेजों के आधार पर सरकारी योजना के अंतर्गत सब्सिडी वाला एक ट्रैक्टर फाइनेंस करवा लिया।
विज्ञापन
यह ट्रैक्टर कागजों पर तो किसान प्रोडक्शन कंपनी के नाम पर स्वीकृत हुआ था, लेकिन आरोपी ने जालसाजी से ट्रैक्टर को फर्म के खाते में दर्ज करने के बजाय सीधे अपने व्यक्तिगत नाम पर ट्रांसफर करवा लिया और तुरंत ही ट्रैक्टर को खुले बाजार में बेचकर पूरी पैसा लेकर गांव से फरार हो गया।
विज्ञापन
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब संबंधित विभाग और बैंक द्वारा पीड़िता के नाम पर 12 लाख का रिकवरी नोटिस जारी किया। ट्रैक्टर की मूल कीमत, ब्याज और पेनल्टी आदि मिलकर यह राशि 12 लाख तक पहुंच चुकी है। नोटिस देखते ही पीड़िता और उसके पति के पैरों तले जमीन खिसक गई, जो अब न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
इस मामले में कौशांबी की टीम सहित जनपद स्तर की टीम भी जांच कर चुकी है। यह एफपीओ के माध्यम से फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी रजिस्टर्ड की गई थी। यह काफी पुराना मामला है। विभाग का इससे कोई लेना-देना नहीं है। - डॉ. प्रमोद कुमार, उप कृषि निदेशक।