मोबाइल से खुलेगा राज: बेतवा एक्सप्रेस से पकड़े गए 63 लाख रुपये की आयकर जांच शुरू, हवाला का शक
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बेतवा एक्सप्रेस में पकड़े गए 63 लाख रुपये के मामले में मंगलवार को कानपुर से आयकर विभाग की टीम चित्रकूट पहुंची और जांच शुरू की। टीम ने आरोपी से करीब चार घंटे तक पूछताछ की लेकिन अभी तक कोई अहम सुराग हाथ नहीं लगा। कोई दस्तावेज भी अब तक नहीं दिखाए जा सके हैं। शमन जारी किया गया है। वहीं रुपया हवाला का होने का शक गहरा गया है। सोमवार को आरपीएफ और क्राइम विंग झांसी की टीम ने बेतवा एक्सप्रेस में बहिलपुरवा से कर्वी के बीच चेकिंग की थी। इस दौरान एसी कोच बी-3 की सीट 19 पर बैठे सतना के रसाला मोहल्ला निवासी प्रीतमदास के बैग से 63 लाख रुपये की नकदी मिली थी।
पूछताछ में सही जवाब न देने पर आरपीएफ ने उसे कर्वी रेलवे स्टेशन पर उतार लिया था। पूछताछ में प्रीतम ने बताया कि सतना निवासी संजय उर्फ संजू ने यह रुपये कानपुर पहुंचाने के लिए दिए थे। रुपये किसे और कहां देने हैं इसकी जानकारी उसे नहीं है। संजय ने कहा था कि कानपुर पहुंचकर बताएगा। आरपीएफ ने कई घंटे पूछताछ की थी। इसके बाद आयकर विभाग को जानकारी दी गई। एसबीआई से मशीन और पीएनबी से कैशियर बुलाकर रुपयों की गिनती कराई। बैग में 500 के 12000, 200 के 1300, 100 के 100 और 50 के 600 नोट मिले। कुल रकम 63 लाख रुपये निकली।
वहीं, मंगलवार दोपहर तीन बजे कानपुर आयकर विभाग की तीन सदस्यीय आयकर टीम चित्रकूट पहुंची। टीम ने आरोपी से पूछताछ की। आरपीएफ थाना प्रभारी, राजेंद्र कुमार का कहना है कि बड़ी रकम और कोई दस्तावेज न होने से हवाला का शक है। आयकर विभाग की टीम मामले की जांच कर रही है। मामले में कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल का कहना है कि अभी चित्रकूट से कोई जानकारी नहीं मिली है। यदि वाकई रकम हवाला की है और कोई जानकारी दी गई तो उसकी जांच कराकर आगे की कार्रवाई जाएगी।
ट्रेन से 63 लाख रुपये की नकदी बरामदगी के मामले में पकड़े गए प्रीतम दास आयकर विभाग की जांच में सहयोग नहीं कर रहा। पूछताछ के दौरान वह बार-बार बयान बदल रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रीतम दास कभी संजय उर्फ संजू को सब्जी कारोबारी बताता है तो कभी किराना कारोबारी। उसके बदलते बयानों की वजह से जांच टीम अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। आयकर की टीम कड़ाई से प्रीतम दास से पूछताछ कर रही है। उससे यह जानने की कोशिश की जा रही है कि 63 लाख की नकदी किसकी थी, कहां से कहां ले जाई जा रही थी और किसके इशारे पर यह काम हो रहा था लेकिन आरोपी हर बार नया काम बता रहा है। इससे जांच की दिशा भटक रही है।
ट्रेन में नोटों की खेप पकड़े जाने का यह कोई नया मामला नहीं। इससे पहले भी कर्वी से मानिकपुर रेलवे ट्रैक पर कई बार बड़ी रकम पकड़ी जा चुकी है। जानकारों का मानना है कि इस रूट से कानपुर व सतना के बीच कपड़े सहित कई चीजों का बड़े पैमाने पर व्यापार होता है। अक्सर बड़े व्यापारी टैक्स बचाने के फेर में ऐसे ही रकम इधर-उधर ले जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस और त्योहारों से पहले आरपीएफ ने इस रूट पर चेकिंग बढ़ा दी है। इससे नकदी पकड़ने के मामले भी बढ़े हैं। उधर, नवंबर 2025 में मानिकपुर जंक्शन में महाराष्ट्र से एक करोड़ लेकर भागे कर्मचारी को पुलिस ने 80 लाख रुपये के साथ पकड़ा था। पुलिस ने महाराष्ट्र के व्यापारी को बुलाकर जांच की थी।
इसी तरह फरवरी 2026 में कर्वी आरपीएफ ने बेटी की शादी के लिए जा रहे व्यक्ति की बाल्टी से 2.75 लाख रुपये बरामद कर लौटाए थे। अब यह तीसरी घटना है। जहां वृद्ध प्रीतम दास के पास बेतवा एक्सप्रेस में 63 लाख रुपये बरामद हुए हैं। वहीं सतना में खनन, लकड़ी और कृषि का बड़ा कारोबार है। कानपुर चमड़ा, कपड़ा और सर्राफा का हब है। दोनों के बीच रकम का लेनदेन अक्सर हवाला से होता है ताकि कर और बैंक ट्रेसिंग से बचा जा सके। सूत्रों के मुताबिक बुजुर्गों और मजदूरों को पांच से 10 हजार का लालच देकर इस्तेमाल किया जाता है। पकड़े जाने पर वही फंसता है, असली सरगना पीछे रह जाता है।
सतना से कानपुर 63 लाख की नकदी लेकर जा रहे वृद्ध प्रीतम दास को आरपीएफ टीम ने पकड़ा है। उसके पास से मोबाइल बरामद हुआ है। जिसमें रुपये कहां पहुंचाने हैं और किसको देने हैं। यह बात बताई जानी थी। इसमें सतना निवासी संजय का भी नंबर था। अब उसी नंबर के आधार पर पूरी जांच होगी। संजय के पकड़े जाने के बाद ही रुपये के बारे में स्थिति साफ हो पाएगी। अभी तो बरामद रुपये को लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।
आयकर नियमों के अनुसार 20 हजार से ऊपर नकदी मिलने पर संदिग्ध माना जाता है। इसके बाद 50 हजार से ऊपर बिना पैन और सोर्स के पकड़े जाने पर पूरी रकम जब्त की जाती है। इस पर आयकर विभाग तुरंत सीज कर देगा। साथ ही 200 फीसदी तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। नकदी के बारे में सही जानकारी न देने पर कर लगाया जाएगा। इसके अलावा हवाला या आपराधिक लिंक मिलने पर प्राथमिकी भी दर्ज हो सकती है। वहीं चुनाव या त्योहार के समय 10 लाख से ऊपर नकदी मिलने पर आईटी की निगरानी हो जाती है।