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Chitrakoot News: मैली मंदाकिनी, घाट गंदे आचमन योग्य जल भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Mon, 12 Jan 2026 11:56 PM IST
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फोटो-01-मंदाकिनी नदी में फैली गंदगी। संवाद
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चित्रकूट। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की तपोभूमि में आस्था की प्रतीक मानी जाने वाली मंदाकिनी नदी प्रदूषण की चपेट में है। मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या जैसे प्रमुख पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है लेकिन नदी की बदहाली ने आस्थावानों को निराश कर दिया है। घाटों पर गंदगी का अंबार लगा है और नदी का जल आचमन योग्य भी नहीं रह गया है।
माघ मेले के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मंदाकिनी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। हालांकि, घाटों की सीढ़ियों पर जमा काई, नदी में तैरता कूड़ा-करकट और चारों ओर फैली गंदगी श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी पैदा कर रही है। रामघाट से लेकर जिला मुख्यालय तक, भरतघाट, पन्ना घाट, राजाघाट, पुल घाट और सुंदर घाट पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। कई स्थानों पर काई के कारण सीढ़ियां फिसलन भरी हो गई हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासनिक दावों की पोल खोलती हकीकत
प्रशासन द्वारा हर वर्ष नदी और घाटों की सफाई पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। सती अनुसुइया स्थल से उद्गम के बाद चित्रकूट क्षेत्र में प्रवेश करते ही मंदाकिनी का स्वरूप बिगड़ जाता है। यह नदी न केवल क्षेत्र की सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र भी है। इसके बावजूद, नदी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए कोई प्रभावी और दीर्घकालिक योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
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अधिकारियों के आश्वासन और जमीनी हकीकत
पिछले वर्ष जलशक्ति मंत्री ने स्वयं नदी की सफाई कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे, जिसके बाद कुछ समय के लिए व्यवस्था में सुधार हुआ था। हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुसार, बाद में स्थिति जस की तस हो गई और किसी ने ध्यान नहीं दिया। चित्रकूट के एडीएम चंद्र शेखर ने दावा किया है कि घाटों में निरंतर सफाई करवाई जाती है और यदि समस्या है तो नगर पालिका ईओ व सिंचाई विभाग से जानकारी लेकर सफाई सुनिश्चित की जाएगी।
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प्रशासनिक दावों की पोल खोलती हकीकत
प्रशासन द्वारा हर वर्ष नदी और घाटों की सफाई पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। सती अनुसुइया स्थल से उद्गम के बाद चित्रकूट क्षेत्र में प्रवेश करते ही मंदाकिनी का स्वरूप बिगड़ जाता है। यह नदी न केवल क्षेत्र की सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र भी है। इसके बावजूद, नदी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए कोई प्रभावी और दीर्घकालिक योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
अधिकारियों के आश्वासन और जमीनी हकीकत
पिछले वर्ष जलशक्ति मंत्री ने स्वयं नदी की सफाई कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे, जिसके बाद कुछ समय के लिए व्यवस्था में सुधार हुआ था। हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुसार, बाद में स्थिति जस की तस हो गई और किसी ने ध्यान नहीं दिया। चित्रकूट के एडीएम चंद्र शेखर ने दावा किया है कि घाटों में निरंतर सफाई करवाई जाती है और यदि समस्या है तो नगर पालिका ईओ व सिंचाई विभाग से जानकारी लेकर सफाई सुनिश्चित की जाएगी।

फोटो-01-मंदाकिनी नदी में फैली गंदगी। संवाद