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Deoria News: मां के चरणों में समर्पण से पूरी होती मनोकामना
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सलेमपुर। ब्लॉक के अहिरौली लाल गांव में चल रही त्रिदिवसीय शतचंडी महायज्ञ में वृंदावन धाम से आए महर्षि श्रीदास ने श्रीमद् देवी भागवत कथा सुनाया। यज्ञ आचार्य संजय मिश्रा के संचालन में यज्ञ मंडप में यजमान सुनील सिंह ने यज्ञ वेदियों का पूजन किया।
वृंदावन से आई रासलीला मंडली द्वारा रासलीला का मंचन और सुषमा द्विवेदी के सहयोग से कथा-प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है। कथा के क्रम में महर्षि श्रीदास ने कहा कि जो भी मां के चरणों में समर्पित होता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। जब-जब देवताओं पर विपत्ति आती है, वे मां को ही पुकारते हैं। मां उनके सभी कष्टों का निवारण करती हैं।
महर्षि ने बताया कि जब ब्रह्मा, विष्णु, महेश को यह जिज्ञासा हुई कि वे किसके द्वारा संचालित होते हैं, तभी रत्नजड़ित विमान आया। त्रिदेव उस पर आरूढ़ होकर ब्रह्मलोक, विष्णुलोक, शिवलोक से होते हुए मणिक द्वीप पहुंचे। वहां कोटि-कोटि ब्रह्मा, विष्णु और शंकर देवी की स्तुति कर रहे थे। मां का अद्भुत रूप देखकर त्रिदेव भी स्तुति करने लगे। मां के पाद अंगुली के नाखून में असंख्य ब्रह्मांड की छवि देखकर सभी देवता आनंदित हो उठे और जयकार करने लगे। मां की शक्ति से प्रभावित होकर ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उपासना की। प्रसन्न होकर जगत जननी जगदंबा ने ब्रह्मा को सरस्वती, विष्णु को लक्ष्मी और शंकर को शिवा प्रदान की।
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वृंदावन से आई रासलीला मंडली द्वारा रासलीला का मंचन और सुषमा द्विवेदी के सहयोग से कथा-प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है। कथा के क्रम में महर्षि श्रीदास ने कहा कि जो भी मां के चरणों में समर्पित होता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। जब-जब देवताओं पर विपत्ति आती है, वे मां को ही पुकारते हैं। मां उनके सभी कष्टों का निवारण करती हैं।
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महर्षि ने बताया कि जब ब्रह्मा, विष्णु, महेश को यह जिज्ञासा हुई कि वे किसके द्वारा संचालित होते हैं, तभी रत्नजड़ित विमान आया। त्रिदेव उस पर आरूढ़ होकर ब्रह्मलोक, विष्णुलोक, शिवलोक से होते हुए मणिक द्वीप पहुंचे। वहां कोटि-कोटि ब्रह्मा, विष्णु और शंकर देवी की स्तुति कर रहे थे। मां का अद्भुत रूप देखकर त्रिदेव भी स्तुति करने लगे। मां के पाद अंगुली के नाखून में असंख्य ब्रह्मांड की छवि देखकर सभी देवता आनंदित हो उठे और जयकार करने लगे। मां की शक्ति से प्रभावित होकर ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उपासना की। प्रसन्न होकर जगत जननी जगदंबा ने ब्रह्मा को सरस्वती, विष्णु को लक्ष्मी और शंकर को शिवा प्रदान की।

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