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नदियों के किनारे है 'मौत का कुआं': कइयों में तो लाश भी नहीं मिलती- 29 सितंबर को 4 डूबे, 3 अभी तक नहीं मिले
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 28 May 2026 01:26 AM IST
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सार
आसपास के लोगों का कहना है कि कहीं बालू खनन तो कहीं निर्माण कार्य के दौरान बने ये गड्ढे समय के साथ और खतरनाक हो चुके हैं। जहां कहीं नदी पर पुल या पीपा पुल लगा है, उसके आसपास ये गड्ढे और खतरनाक हैं। बताया जाता है कि पिलर बनाने के लिए नदी के पानी में जो घेरा बनता है, वहां गड्ढे बन जाते हैं।
बरहज के जयनगर में सरयू नदी में अमन का शव मिलने की जानकारी होने पर गुमसुम बैठे परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सरयू नदी के नर्वदेश्वर घाट, कटइलवा मुक्तिपथ, गौरा-जयनगर, निर्माणाधीन मोहन सेतु सहित आधा दर्जन घाटों पर किनारे ही मौत का कुआं है। लार के महाल मंझरिया इलाके में पीपा पुल लगाने के लिए नदी में बनाए गए गड्ढे अब जानलेवा हो चुके हैं। छोटी गंडक नदी के किनारे से कुछ ही दूर अंदर अचानक से नदी गहरी हो जाती है।
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इन घाटों पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। छह महीने में अलग-अलग नदियों में आठ लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। सबसे अधिक हादसा बरहज में होता है। इन गड्ढों में डूबने पर कई बार तो शव भी नहीं मिलता।
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सरयू नदी में कटइलवा मुक्तिपथ, नर्वदेश्वर घाट, गौरा-जयनगर और निर्माणाधीन मोहन सेतु के पास नदी में अनगिनत गहरे गड्ढे बन गए हैं।
आसपास के लोगों का कहना है कि कहीं बालू खनन तो कहीं निर्माण कार्य के दौरान बने ये गड्ढे समय के साथ और खतरनाक हो चुके हैं। जहां कहीं नदी पर पुल या पीपा पुल लगा है, उसके आसपास ये गड्ढे और खतरनाक हैं। बताया जाता है कि पिलर बनाने के लिए नदी के पानी में जो घेरा बनता है, वहां गड्ढे बन जाते हैं।
गर्मी में तापमान बढ़ने के बाद नदी में नहाने वालों की संख्या बढ़ जाती है। वहीं दाह-संस्कार में आए लोग भी नदी में स्नान करते हैं। नदी घाट पर अनजान जगहों पर नहाने के दौरान लोग गहरे पानी में डूब जाते हैं।
गर्मी में तापमान बढ़ने के बाद नदी में नहाने वालों की संख्या बढ़ जाती है। वहीं दाह-संस्कार में आए लोग भी नदी में स्नान करते हैं। नदी घाट पर अनजान जगहों पर नहाने के दौरान लोग गहरे पानी में डूब जाते हैं।
छह माह में पांच की जा चुकी है जान
बरहज। सरयू तट पर पिछले छह महीनों में पांच से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इनमें दो का सुराग तक नहीं लग सका है। 29 सितंबर को दुर्गा प्रतिमा स्थापना के लिए कलश में जल भरने आए लहछुआं गांव के विवेक (16), रणजीत (20), चंद्रशेखर (16) और गोरखपुर के चौरीचौरा के गांगुली (22) गहरे पानी में डूब गए थे।
लोगों ने किसी तरह गांगुली को बचा लिया था। अन्य तीन साथी नदी में डूब गए थे। बीते नवंबर में नौकाटोला के स्व.रामप्रीत सैनी की 10 वर्षीय पुत्री डूब गई थी। 10 दिन पहले ही दाह संस्कार में आए सुरौली थाना क्षेत्र के बढ़या बुजुर्ग गांव निवासी अंश चौहान स्नान के दौरान नदी में लापता हो गया था। उसका अब तक सुराग नहीं लग सका है।
बरहज। सरयू तट पर पिछले छह महीनों में पांच से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इनमें दो का सुराग तक नहीं लग सका है। 29 सितंबर को दुर्गा प्रतिमा स्थापना के लिए कलश में जल भरने आए लहछुआं गांव के विवेक (16), रणजीत (20), चंद्रशेखर (16) और गोरखपुर के चौरीचौरा के गांगुली (22) गहरे पानी में डूब गए थे।
लोगों ने किसी तरह गांगुली को बचा लिया था। अन्य तीन साथी नदी में डूब गए थे। बीते नवंबर में नौकाटोला के स्व.रामप्रीत सैनी की 10 वर्षीय पुत्री डूब गई थी। 10 दिन पहले ही दाह संस्कार में आए सुरौली थाना क्षेत्र के बढ़या बुजुर्ग गांव निवासी अंश चौहान स्नान के दौरान नदी में लापता हो गया था। उसका अब तक सुराग नहीं लग सका है।
बालू से ढके गड्ढे बन गए हैं दलदल
नदी के किनारे रहने वाले सर्वजीत निषाद ने बताया कि नदी में कई जगह गड्ढों के ऊपर बालू की परत है, जिस पर पैर पड़ते ही बालू हट जाता है। वहां जमीन दलदली हो जाती है।
नाव चलाने वाले अपने बांस से ऐसे स्थान चिन्हित कर उससे बचते हुए निकल जाते हैं, लेकिन आम आदमी को पता नहीं चल पाता। वहां नहाने के दौरान पैर पड़ते ही आदमी का संतुलन बिगड़ जाता है और गहराई में फंसकर डूब जाता है। नदियों में अवैध बालू खनन से ऐसी स्थिति बनी है।
नदी के किनारे रहने वाले सर्वजीत निषाद ने बताया कि नदी में कई जगह गड्ढों के ऊपर बालू की परत है, जिस पर पैर पड़ते ही बालू हट जाता है। वहां जमीन दलदली हो जाती है।
नाव चलाने वाले अपने बांस से ऐसे स्थान चिन्हित कर उससे बचते हुए निकल जाते हैं, लेकिन आम आदमी को पता नहीं चल पाता। वहां नहाने के दौरान पैर पड़ते ही आदमी का संतुलन बिगड़ जाता है और गहराई में फंसकर डूब जाता है। नदियों में अवैध बालू खनन से ऐसी स्थिति बनी है।
बेटे के खोने का दर्द आजीवन रहेगा
जयनगर निवासिनी अर्पित की मां इंद्रासनी देवी, अमन की मां संगीता देवी, लहछुआं निवासी रणजीत की मां दुर्गावती देवी, विवेक की मां होसिला देवी और चंद्रशेखर की मां शुद्धि देवी के लिए बेटों का नदी में नहाना आजीवन दर्द दे गया है।
आर्पित की मां इंद्रासनी देवी का कहना है कि नदी में नहाने का जो दर्द मिला है, वह मेरा परिवार आजीवन नहीं भूल पाएगा। बुधवार को इस घर में सांत्वना देने पहुंचीं आसपास की महिलाओं का कहना था कि कुछ भी हो जाए, बच्चों को नदी के किनारे नहीं जाने देना है।
जयनगर निवासिनी अर्पित की मां इंद्रासनी देवी, अमन की मां संगीता देवी, लहछुआं निवासी रणजीत की मां दुर्गावती देवी, विवेक की मां होसिला देवी और चंद्रशेखर की मां शुद्धि देवी के लिए बेटों का नदी में नहाना आजीवन दर्द दे गया है।
आर्पित की मां इंद्रासनी देवी का कहना है कि नदी में नहाने का जो दर्द मिला है, वह मेरा परिवार आजीवन नहीं भूल पाएगा। बुधवार को इस घर में सांत्वना देने पहुंचीं आसपास की महिलाओं का कहना था कि कुछ भी हो जाए, बच्चों को नदी के किनारे नहीं जाने देना है।
संवेदनशील घाटों पर प्रशासन कराएगा निगरानी
गर्मी से राहत के लिए नदी में कूदने वालों की निगरानी अब तहसील प्रशासन करेगा। डीएम मधुसूदन हुल्गी ने बीते सोमवार को सोशल मीडिया में लाइव आकर घाटों की निगरानी कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही, लोगों से अपील की थी कि नदी व तालाबों में नहाने से परहेज करें।
इसके बाद आपदा विभाग की तरफ से भी तहसील प्रशासन को पत्र भेजकर कहा गया है कि नदी के ऐसे घाट जहां से लोगों का आवागमन हो रहा है, या जहां लोग धार्मिक क्रिया कलाप के लिए भी नहाते हैं, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बरती जाए। सावधान करते बोर्ड लगाए जाएं। इसके अलावा जहां नाव से लोग आते-जाते हैं वहां सवारियों के लिए भी लाइफ जैकेट का इंतजाम किया जाए।
नदी, तालाब व पोखरों में नहाने के दौरान डूबने की घटनाएं चिंताजनक है। लोगों से अपील है कि गहरे पानी में न जाएं। ग्राम प्रधान व संबंधित अफसर ऐसे स्थान जो संवेदनशील हैं, वहां चेतावनी बोर्ड लगवाएं, जिससे कि लोग संभावित खतरे से बच सकें: मधुसूदन हुल्गी, डीएम
गर्मी से राहत के लिए नदी में कूदने वालों की निगरानी अब तहसील प्रशासन करेगा। डीएम मधुसूदन हुल्गी ने बीते सोमवार को सोशल मीडिया में लाइव आकर घाटों की निगरानी कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही, लोगों से अपील की थी कि नदी व तालाबों में नहाने से परहेज करें।
इसके बाद आपदा विभाग की तरफ से भी तहसील प्रशासन को पत्र भेजकर कहा गया है कि नदी के ऐसे घाट जहां से लोगों का आवागमन हो रहा है, या जहां लोग धार्मिक क्रिया कलाप के लिए भी नहाते हैं, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बरती जाए। सावधान करते बोर्ड लगाए जाएं। इसके अलावा जहां नाव से लोग आते-जाते हैं वहां सवारियों के लिए भी लाइफ जैकेट का इंतजाम किया जाए।
नदी, तालाब व पोखरों में नहाने के दौरान डूबने की घटनाएं चिंताजनक है। लोगों से अपील है कि गहरे पानी में न जाएं। ग्राम प्रधान व संबंधित अफसर ऐसे स्थान जो संवेदनशील हैं, वहां चेतावनी बोर्ड लगवाएं, जिससे कि लोग संभावित खतरे से बच सकें: मधुसूदन हुल्गी, डीएम