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UP: नौकरी का झांसा देकर युवतियों को बनाते थे बंधक, कराते थे साइबर फ्रॉड- देवरिया लौटी पीड़िता ने बताई कहानी

Thu, 16 Jul 2026 12:05 PM IST
Rohit Singh संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Published by: Rohit Singh Updated Thu, 16 Jul 2026 12:05 PM IST
सार

गिरोह के चंगुल से सुरक्षित लौटने वाली एक लड़की ने ने बताया कि वह पटना में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। एक माह पहले गांव आने पर गांव की दो युवतियों ने वाराणसी स्थित एक कृषि कंपनी में नौकरी का प्रस्ताव दिया। वाराणसी पहुंचने पर उनसे कंपनी में नियुक्ति के लिए फॉर्म भरवाया गया और सिक्योरिटी के नाम पर 26 हजार रुपये नकद जमा करा लिए गए।
 

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They used to hold young women captive under the pretext of jobs and force them to commit cyber fraud.
पीड़िता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कृषि विभाग से जुड़ी एक सरकारी कंपनी में नौकरी का झांसा देकर युवतियों को बंधक बनाकर साइबर क्राइम कराने का मामला वाराणसी में सामने आया है। पिछले दिनों ही इस गिरोह का वाराणसी पुलिस ने पर्दाफाश किया था। इस गिरोह के जाल से छूटकर आईं पड़ोसी जिला बिहार के गोपालगंज के भोरे थाना क्षेत्र की 21 युवतियों से स्थानीय पुलिस ने भी पूछताछ की है।

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इन युवतियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को अच्छी सेलरी का झांसा देकर धंधेबाजों ने वाराणसी बुलाया था। इन लड़कियों को इसी इलाके की कुछ लड़कियों ने अपने संपर्क में लिया था। वे पहले से उस गैंग से जुड़ी थीं। सभी लड़कियां एक दूसरे के परिचय से पहुंची थीं।
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जांच में सामने आया है कि गिरोह में उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा क्षेत्र की कुछ युवतियां सक्रिय थीं। वे स्थानीय स्तर पर गरीब और असहाय परिवारों की लड़कियों को नौकरी का लालच देकर अपने जाल में फंसाती थीं। इसके बाद उन्हें वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली समेत विभिन्न ठिकानों पर ले जाकर बंधक बनाया जाता था और कथित रूप से जबरन साइबर अपराध कराने का दबाव बनाया जाता था।
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गांव की दो लड़कियां बुलाकर ले गई थीं अन्य को
बिहार पुलिस के अनुसार, मुक्त कराई गई युवतियों को आकर्षक वेतन और प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर घर से बाहर बुलाया गया था। वहां पहुंचने के बाद इनका संपर्क परिवार से लगभग समाप्त करा दिया गया था। गिरोह के चंगुल से सुरक्षित लौटने वाली एक लड़की ने ने बताया कि वह पटना में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी।

एक माह पहले गांव आने पर गांव की दो युवतियों ने वाराणसी स्थित एक कृषि कंपनी में नौकरी का प्रस्ताव दिया। वाराणसी पहुंचने पर उनसे कंपनी में नियुक्ति के लिए फॉर्म भरवाया गया और सिक्योरिटी के नाम पर 26 हजार रुपये नकद जमा करा लिए गए।


इसके बाद उन्हें अन्य युवतियों के साथ एक कमरे में रखा गया। उनका आरोप है कि रोजाना सुबह कुछ गोलियां दी जाती थीं। इसके बाद उनको मनोवैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण दिया जाता था। अधिकांश लड़कियां मजबूरी में साइबर क्राइम की दुनिया में फंस गई थीं।

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