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Etah News: बारिश-ओलावृष्टि से 50 प्रतिशत फसल बर्बाद
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 06 Apr 2026 11:33 PM IST
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कस्बा निधौली कलां में गेहूं की कटी फसलों में भरा पानी। संवाद
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एटा। लगातार बदलते मौसम ने जिले के किसानों की कमर तोड़ दी है। बीते दिनों हुई तेज आंधी और बारिश से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। उससे किसान संभल भी नहीं पाए थे कि रविवार को हुई ओलावृष्टि ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी गेहूं, मक्का की फसलों को ओले ने बुरी तरह प्रभावित किया है। किसानों की मानें 50 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हो गई है। यही हाल अलीगंज क्षेत्र में होने वाली तंबाकू की फसली का हुआ है। वहां भी 60 प्रतिशत फसल बर्बाद हुई है। कृषि विभाग सर्वे के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है।
किसानों का कहना है कि कुछ दिन पहले आई आंधी व बारिश से गेहूं की फसल झुक गई थी। नमी बढ़ने से कई जगह दाने काले पड़ने लगे। उन्हीं फसलों पर ओले गिरने से अब हालात और खराब हो गए हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने समय रहते नुकसान का आकलन नहीं कराया। यदि पहले की आंधी बारिश के बाद सर्वे करा लिया जाता तो मुआवजे की प्रक्रिया समय से शुरू हो सकती थी।
मिरहची, मारहरा, जलेसर, पिलुआ क्षेत्र सहित कई गांवों के किसानों ने बताया कि रविवार को अचानक मौसम बदल गया। शाम होते-होते बादल घिर आए और तेज ओलावृष्टि शुरू हो गई। किसानों कहना है कि यदि समय पर आर्थिक मदद नहीं मिली तो खेती-किसानी करना मुश्किल हो जाएगा। वहीं नुकसान का आंकलने करने में प्रशासन सुस्त रवैया अपनाए हुए है। इसको लेकर किसानों में नाराजगी पनप रही है।
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मारहरा क्षेत्र की फसलें तबाह, गेहूं काला पड़ा
मारहरा। लगातार तीन-चार दिन से हो रही बारिश और तेज आंधी-तूफान ने मारहरा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। क्षेत्र में अधिकतर छोटे किसान खेत मालिकों से लगभग 12 से 14 हजार रुपये प्रति बीघा के पट्टे पर खेती करते हैं। ऐसे में फसल चौपट होने से उनका नुकसान और बढ़ गया है। अप्रैल में मक्का व टमाटर की फसल भी तैयार अवस्था में थी लेकिन लगातार बारिश और रविवार शाम हुई ओलावृष्टि से टमाटर सड़ने का खतरा बढ़ गया है। नई तुड़ाई सीजन की शुरुआत पर ही टमाटर की फसल को नुकसान हो सकता है। गांव महमूदपुर नगरिया की महिला किसान पार्वती देवी दोपहर की धूप में गिरी हुई काली पड़ी गेहूं काटती दिखीं। उन्होंने बताया कि अब न अनाज निकलेगा न भूसा काम आएगा। मारहरा क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों सुल्तानपुर, सिरसावदन, मोहनसती, महमूदपुर नगरिया, कासिमपुर, पिवारी, धरपसी, सराय अहमद खां, समसपुर, त्रिलोकपुर, खकरई, पचपेड़ा, हयातपुर माफी, सलोनी, नगला भीम, ओरनी, मेहनी शोरा समेत तमाम गांवों में गेहूं, मक्का और टमाटर की फसलें बुरी तरह नष्ट हो गई हैं। व्यापक नुकसान के चलते किसान वर्ग में गहरी निराशा व्याप्त है।
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कटी पड़ी गेहूं की फसल भीगी
सकीट। कस्बा में दो दिनों से तेज आंधी और रात में हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल भीगकर बिखर गई जिसे समेटने में किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आसपुर, मलावन व सेनाकलां क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि ने हालात और खराब कर दिए। किसान बॉबी मौर्य ने बताया कि उनके करीब दस बीघा खेत में गेहूं की फसल खड़ी और कटी हुई दोनों हालत में थी, लेकिन लगातार भीगने से खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं प्रमोद तिवारी ने कहा कि किसानों के परिवार का साल भर का गुजारा इसी फसल पर निर्भर करता है, लेकिन लगातार बारिश और हवाओं से यह बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है।
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ओलावृष्टि से गेहूं-मक्का-खरबूज की फसलों को नुकसाान
निधौली कलां। कस्बा में रविवार शाम हुई ओलावृष्टि और तेज बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में कटी पड़ी हुई गेहूं की फसल खेतों में भरे पानी से डूब गई। जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
मौसम की मार सिर्फ गेहूं तक सीमित नहीं रही बल्कि मक्का व खरबूजा की फसलें भी तेज बारिश व ओलों से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। खेतों में पानी भरने से फसलों के सड़ने का डर किसानों के चेहरे पर साफ झलक रहा है। किसान रूपकिशोर का कहना है कि गेहूं की खड़ी फसल को नुकसान अपेक्षाकृत कम हुआ है लेकिन कटी हुई फसल जो सूखने के लिए खेतों में डाली गई थी वह पूरी तरह पानी में डूब चुकी है।
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किसानों का कहना है कि कुछ दिन पहले आई आंधी व बारिश से गेहूं की फसल झुक गई थी। नमी बढ़ने से कई जगह दाने काले पड़ने लगे। उन्हीं फसलों पर ओले गिरने से अब हालात और खराब हो गए हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने समय रहते नुकसान का आकलन नहीं कराया। यदि पहले की आंधी बारिश के बाद सर्वे करा लिया जाता तो मुआवजे की प्रक्रिया समय से शुरू हो सकती थी।
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मिरहची, मारहरा, जलेसर, पिलुआ क्षेत्र सहित कई गांवों के किसानों ने बताया कि रविवार को अचानक मौसम बदल गया। शाम होते-होते बादल घिर आए और तेज ओलावृष्टि शुरू हो गई। किसानों कहना है कि यदि समय पर आर्थिक मदद नहीं मिली तो खेती-किसानी करना मुश्किल हो जाएगा। वहीं नुकसान का आंकलने करने में प्रशासन सुस्त रवैया अपनाए हुए है। इसको लेकर किसानों में नाराजगी पनप रही है।
मारहरा क्षेत्र की फसलें तबाह, गेहूं काला पड़ा
मारहरा। लगातार तीन-चार दिन से हो रही बारिश और तेज आंधी-तूफान ने मारहरा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। क्षेत्र में अधिकतर छोटे किसान खेत मालिकों से लगभग 12 से 14 हजार रुपये प्रति बीघा के पट्टे पर खेती करते हैं। ऐसे में फसल चौपट होने से उनका नुकसान और बढ़ गया है। अप्रैल में मक्का व टमाटर की फसल भी तैयार अवस्था में थी लेकिन लगातार बारिश और रविवार शाम हुई ओलावृष्टि से टमाटर सड़ने का खतरा बढ़ गया है। नई तुड़ाई सीजन की शुरुआत पर ही टमाटर की फसल को नुकसान हो सकता है। गांव महमूदपुर नगरिया की महिला किसान पार्वती देवी दोपहर की धूप में गिरी हुई काली पड़ी गेहूं काटती दिखीं। उन्होंने बताया कि अब न अनाज निकलेगा न भूसा काम आएगा। मारहरा क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों सुल्तानपुर, सिरसावदन, मोहनसती, महमूदपुर नगरिया, कासिमपुर, पिवारी, धरपसी, सराय अहमद खां, समसपुर, त्रिलोकपुर, खकरई, पचपेड़ा, हयातपुर माफी, सलोनी, नगला भीम, ओरनी, मेहनी शोरा समेत तमाम गांवों में गेहूं, मक्का और टमाटर की फसलें बुरी तरह नष्ट हो गई हैं। व्यापक नुकसान के चलते किसान वर्ग में गहरी निराशा व्याप्त है।
कटी पड़ी गेहूं की फसल भीगी
सकीट। कस्बा में दो दिनों से तेज आंधी और रात में हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल भीगकर बिखर गई जिसे समेटने में किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आसपुर, मलावन व सेनाकलां क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि ने हालात और खराब कर दिए। किसान बॉबी मौर्य ने बताया कि उनके करीब दस बीघा खेत में गेहूं की फसल खड़ी और कटी हुई दोनों हालत में थी, लेकिन लगातार भीगने से खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं प्रमोद तिवारी ने कहा कि किसानों के परिवार का साल भर का गुजारा इसी फसल पर निर्भर करता है, लेकिन लगातार बारिश और हवाओं से यह बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है।
ओलावृष्टि से गेहूं-मक्का-खरबूज की फसलों को नुकसाान
निधौली कलां। कस्बा में रविवार शाम हुई ओलावृष्टि और तेज बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में कटी पड़ी हुई गेहूं की फसल खेतों में भरे पानी से डूब गई। जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
मौसम की मार सिर्फ गेहूं तक सीमित नहीं रही बल्कि मक्का व खरबूजा की फसलें भी तेज बारिश व ओलों से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। खेतों में पानी भरने से फसलों के सड़ने का डर किसानों के चेहरे पर साफ झलक रहा है। किसान रूपकिशोर का कहना है कि गेहूं की खड़ी फसल को नुकसान अपेक्षाकृत कम हुआ है लेकिन कटी हुई फसल जो सूखने के लिए खेतों में डाली गई थी वह पूरी तरह पानी में डूब चुकी है।

कस्बा निधौली कलां में गेहूं की कटी फसलों में भरा पानी। संवाद

कस्बा निधौली कलां में गेहूं की कटी फसलों में भरा पानी। संवाद