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Etah News: अस्पतालों में लेवल-2 अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं, गर्भवती महिलाओं को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:11 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में बना अल्ट्रासाउंड सेंटर। संवाद
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एटा। जिले में मेडिकल कॉलेज सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर लेवल-2 अल्ट्रासाउंड की सुविधा का अभाव है। इसके चलते गर्भवती महिलाओं को अन्य जिलों की दौड़ लगानी पड़ रही है। आगरा, अलीगढ़ जैसे शहरों में जाकर यह स्कैन कराने पर उन्हें भारी राशि चुकानी पड़ रही है।
जिले के मेडिकल कॉलेज, सकीट, जैथरा, अलीगंज, जलेसर आदि सीएचसी पर लेवल-2 अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। मेडिकल कॉलेज में सामान्य अल्ट्रासाउंड की सुविधा तो है लेकिन लेवल-2 की नहीं। ऐसे में दूर-दराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर यह स्कैन कराने के लिए 1200 से 1500 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, कई महिलाओं को आगरा, अलीगढ़ सहित अन्य जिलों का चक्कर भी लगाना पड़ता है। इससे यात्रा के दौरान उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक यात्रा से गर्भ को भी खतरा हो सकता है।
इसलिए जरूरी लेवल-2 अल्ट्रासाउंड
मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. साधना सिंह ने बताया कि लेवल-2 अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के 18वें से 22वें सप्ताह के बीच भ्रूण के अंगों का विस्तृत मूल्यांकन, शारीरिक संरचना की जांच और किसी भी प्रकार की जन्मजात खराबी का पता लगाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य स्कैन माना जाता है। यह सामान्य अल्ट्रासाउंड की तुलना में अधिक विस्तृत और सटीक होता है। आवश्यकता पड़ने पर परिजन अपनी सहूलियत के लिए इसे कराते हैं।
मेडिकल कॉलेज में लेवल-2 अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां केवल सामान्य अल्ट्रासाउंड ही होते हैं। गर्भवती महिलाओं के परिजन अपनी सुविधानुसार लेवल-2 या लेवल-3 अल्ट्रासाउंड निजी केंद्रों पर कराते हैं। - डॉ. सुरेश चंद्रा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
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जिले के मेडिकल कॉलेज, सकीट, जैथरा, अलीगंज, जलेसर आदि सीएचसी पर लेवल-2 अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। मेडिकल कॉलेज में सामान्य अल्ट्रासाउंड की सुविधा तो है लेकिन लेवल-2 की नहीं। ऐसे में दूर-दराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर यह स्कैन कराने के लिए 1200 से 1500 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, कई महिलाओं को आगरा, अलीगढ़ सहित अन्य जिलों का चक्कर भी लगाना पड़ता है। इससे यात्रा के दौरान उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक यात्रा से गर्भ को भी खतरा हो सकता है।
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इसलिए जरूरी लेवल-2 अल्ट्रासाउंड
मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. साधना सिंह ने बताया कि लेवल-2 अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के 18वें से 22वें सप्ताह के बीच भ्रूण के अंगों का विस्तृत मूल्यांकन, शारीरिक संरचना की जांच और किसी भी प्रकार की जन्मजात खराबी का पता लगाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और अनिवार्य स्कैन माना जाता है। यह सामान्य अल्ट्रासाउंड की तुलना में अधिक विस्तृत और सटीक होता है। आवश्यकता पड़ने पर परिजन अपनी सहूलियत के लिए इसे कराते हैं।
मेडिकल कॉलेज में लेवल-2 अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां केवल सामान्य अल्ट्रासाउंड ही होते हैं। गर्भवती महिलाओं के परिजन अपनी सुविधानुसार लेवल-2 या लेवल-3 अल्ट्रासाउंड निजी केंद्रों पर कराते हैं। - डॉ. सुरेश चंद्रा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज