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Etah News: पशुओं के चारे से भी सस्ता सब्जियाें का राजा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:51 PM IST
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शहर के रेलवे रोड पर फुटकर में आलू बेचता दुकानदार। संवाद
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एटा। जिले में आलू की बंपर पैदावार किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। स्थिति यह है कि पशुओं के चारे से भी सस्ता बिक रहा है। मंडी में व्यापारी इसे करीब 500 क्विंटल की दर पर खरीद रहे हैं जबकि भूसा 900 रुपये क्विंटल बिक रहा है।
जिले के लगभग 11 हजार किसान आलू की खेती से जुड़े हैं। इस सीजन में 74.50 हजार हेक्टेयर रकबे में करीब 2.08 लाख मीट्रिक टन पैदावार हुई है। आलू की अधिकता से अब किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं। फसल की खुदाई शुरू होते ही किसान सीधे मंडी का रुख कर रहे हैं जहां व्यापारी आलू की खरीद 500 से 550 रुपये प्रति क्विंटल के बीच कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि रिकॉर्ड पैदावार के चलते कीमतें औंधे मुंह गिरी हैं।
मंडी में आलू बेचने आए किसान प्रेमपाल ने बताया कि इस बार ज्यादा पैदावार ने बाजार को बिगाड़ दिया है। हमारा आलू 500 रुपये क्विंटल में बिका है। फुटकर में यही आलू 700 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचा जा रहा है। किसानों का यह भी कहना है कि आलू की कीमतें इस कदर नीचे चली गई हैं कि यह पशुओं के चारे से भी कम भाव में बिक रहा है। किसान सवाल उठा रहे हैं कि जब लागत ही नहीं निकल पा रही तो खेती कैसे बच पाएगी।
किसान सुरेश कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा समर्थन मूल्य तय न होने से वे व्यापारियों के भरोसे लाचार हैं। खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी जैसी महंगी होती इन सभी लागत के बीच इतना कम दाम उन्हें तोड़ रहा है। आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाए या फिर सरकार बाजार हस्तक्षेप कर दाम स्थिर कराए। फिलहाल बंपर पैदावार के बावजूद किसान अपनी फसल को कम दाम में बेचने को मजबूर हैं। उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद आने वाले दिनों में बाजार में सुधार हो सके।
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जिले के लगभग 11 हजार किसान आलू की खेती से जुड़े हैं। इस सीजन में 74.50 हजार हेक्टेयर रकबे में करीब 2.08 लाख मीट्रिक टन पैदावार हुई है। आलू की अधिकता से अब किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं। फसल की खुदाई शुरू होते ही किसान सीधे मंडी का रुख कर रहे हैं जहां व्यापारी आलू की खरीद 500 से 550 रुपये प्रति क्विंटल के बीच कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि रिकॉर्ड पैदावार के चलते कीमतें औंधे मुंह गिरी हैं।
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मंडी में आलू बेचने आए किसान प्रेमपाल ने बताया कि इस बार ज्यादा पैदावार ने बाजार को बिगाड़ दिया है। हमारा आलू 500 रुपये क्विंटल में बिका है। फुटकर में यही आलू 700 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचा जा रहा है। किसानों का यह भी कहना है कि आलू की कीमतें इस कदर नीचे चली गई हैं कि यह पशुओं के चारे से भी कम भाव में बिक रहा है। किसान सवाल उठा रहे हैं कि जब लागत ही नहीं निकल पा रही तो खेती कैसे बच पाएगी।
किसान सुरेश कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा समर्थन मूल्य तय न होने से वे व्यापारियों के भरोसे लाचार हैं। खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी जैसी महंगी होती इन सभी लागत के बीच इतना कम दाम उन्हें तोड़ रहा है। आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाए या फिर सरकार बाजार हस्तक्षेप कर दाम स्थिर कराए। फिलहाल बंपर पैदावार के बावजूद किसान अपनी फसल को कम दाम में बेचने को मजबूर हैं। उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद आने वाले दिनों में बाजार में सुधार हो सके।