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Etah News: जिम्मेदारों को नहीं परवाह, खुद ही जांचकर पीएं पानी
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:03 AM IST
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जीटी रोड स्थित जलनिगम की जल परीक्षण प्रयोगशाला। संवाद
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एटा। इंदौर में दूषित पाने से लोगों की मौत का सिलसिला रुक नहीं रहा। इसके बावजूद यहां सबक नहीं लिया जा रहा। चार साल से नगर पालिका ने पानी की जांच नहीं कराई है। सीधे लोगों को पेयजल की आपूर्ति दी जा रही है। जिम्मेदारों को परवाह नजर नहीं आती जिसे चिंता है वह खुद जांच कर पानी पीएं।
निजी स्रोतों से की गई जांचों के अनुसार शहर में बोरिंग के साथ ही नगर पालिका की आपूर्ति से मिलने वाले पानी में भी शुद्धता के मानक पूरे नहीं हो रहे। कई इलाकों में भूजल का टीडीएस मानक मात्रा 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर से ऊपर पहुंच चुका है। पानी की समय-समय पर जांच के लिए जल निगम की प्रयोगशाला बनी है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर पानी को उपचारित कर जलापूर्ति दी जानी चाहिए। चिंता की बात यह है कि नगर पालिका ने अपने नलकूपों से आ रहे पानी की 4 साल से जांच नहीं कराई है। कचहरी रोड, सिविल लाइंस, डूडा ऑफिस, पुलिस लाइन, लालपुर आदि क्षेत्रों में टीडीएस की मात्रा 1200 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक पहुंच चुकी है। इन इलाकों की करीब 14 हजार की आबादी को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।
वर्ष 2021 में फेल हो गए थे सभी नमूने
जल परीक्षण प्रयोगशाला सहायक हरेंद्र कुमार ने बताया कि साल 2021 में नगर पालिका परिषद ने शहर के कुल 10 ओवरहेड टैंक के पानी के सैंपल लेकर परीक्षण कराया था। रिपोर्ट में सभी नमूने फेल हो गए थे। सिविल लाइंस स्थित एसएसपी कंपाउंड में लगे ओवरहेड टैंक का टीडीएस 1000 से 1200 मिलीग्राम प्रतिलीटर पाया गया था। इसके बाद पिछले साल नगर पालिका परिषद ने 18 नलकूपों से पानी के नमूने जल परीक्षण प्रयोगशाला में भेजे। यहां एक नमेने की जांच के लिए 708 रुपये शुल्क बताया गया। पालिका ने शुल्क अदा नहीं किया और नमूने को प्रयोगशाला में ही छोड़ दिया। इनकी जांच ही नहीं हो सकी।
पेट दर्द, त्वचा रोग समेत हो सकती है पथरी की बीमारी
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि पानी में टीडीएस की मात्रा बढ़ने से गंभीर बीमारी जैसे पेट दर्द, बच्चों की त्वचा पर लाल चकत्ते, पथरी आदि की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि पीने वाले पानी के टीडीएस स्तर की जांच करा लें। अगर इसका स्तर बढ़ा हुआ है तो घर में आरओ का इस्तेमाल करें।
कराई जाती हैं ये जांचें
प्रयोगशाला में पानी के गंदलापन, पीएच, आयरन, टीडीएस, नाइट्रेट, फ्लोराइड, क्लोराइड, आर्सेनिक, अवशेष क्लोरीन की जांच की जाती है। जांच में इनका स्तर कम-ज्यादा आने पर नगर पालिका द्वारा पानी का उपचार करने के बाद शहर को आपूर्ति देनी चाहिए।
मोहल्ले में लगी पालिका की टंकी से पानी शुद्ध नहीं आ रहा है। पानी को रात में भरकर रख दो और सुबह उठकर देखो तो उसमें एक अलग सी परत जमी नजर आती है। - आरती यादव, नगला भजा
क्षेत्र के मोहल्लों में पानी में टीडीएस की मात्रा 800 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक पहुंच चुकी है। पानी पीने से पेट की समस्याएं होने लगी हैं। - आदित्य चौहान, शृंगार नगर
पिछले साल फरवरी माह में नगर पालिका परिषद ने 18 नलकूप के सैंपल जांच के लिए दिए थे, लेकिन फीस जमा नहीं करने की वजह से इनकी जांच नहीं हो सकी। इससे पहले 2021 में जांच कराई गई थी। वहीं देहात क्षेत्र के नलकूपों के पानी की जांच होती रहती है। अभी तक कोई नमूने फेल नहीं हुआ है। - विश्वजीत प्रजापति, अधिशासी अभियंता, जल निगम
पालिका के जल-कल विभाग के अवर अभियंता को पत्र जारी किया गया है। निर्देश दिए गए हैं कि अलग-अलग प्वाइंट से नमेने लेकर पानी की जांच कराई जाए। ओवरहेड टैंकों की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। - निहाल सिंह, ईओ नगर पालिका एटा
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निजी स्रोतों से की गई जांचों के अनुसार शहर में बोरिंग के साथ ही नगर पालिका की आपूर्ति से मिलने वाले पानी में भी शुद्धता के मानक पूरे नहीं हो रहे। कई इलाकों में भूजल का टीडीएस मानक मात्रा 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर से ऊपर पहुंच चुका है। पानी की समय-समय पर जांच के लिए जल निगम की प्रयोगशाला बनी है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर पानी को उपचारित कर जलापूर्ति दी जानी चाहिए। चिंता की बात यह है कि नगर पालिका ने अपने नलकूपों से आ रहे पानी की 4 साल से जांच नहीं कराई है। कचहरी रोड, सिविल लाइंस, डूडा ऑफिस, पुलिस लाइन, लालपुर आदि क्षेत्रों में टीडीएस की मात्रा 1200 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक पहुंच चुकी है। इन इलाकों की करीब 14 हजार की आबादी को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।
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वर्ष 2021 में फेल हो गए थे सभी नमूने
जल परीक्षण प्रयोगशाला सहायक हरेंद्र कुमार ने बताया कि साल 2021 में नगर पालिका परिषद ने शहर के कुल 10 ओवरहेड टैंक के पानी के सैंपल लेकर परीक्षण कराया था। रिपोर्ट में सभी नमूने फेल हो गए थे। सिविल लाइंस स्थित एसएसपी कंपाउंड में लगे ओवरहेड टैंक का टीडीएस 1000 से 1200 मिलीग्राम प्रतिलीटर पाया गया था। इसके बाद पिछले साल नगर पालिका परिषद ने 18 नलकूपों से पानी के नमूने जल परीक्षण प्रयोगशाला में भेजे। यहां एक नमेने की जांच के लिए 708 रुपये शुल्क बताया गया। पालिका ने शुल्क अदा नहीं किया और नमूने को प्रयोगशाला में ही छोड़ दिया। इनकी जांच ही नहीं हो सकी।
पेट दर्द, त्वचा रोग समेत हो सकती है पथरी की बीमारी
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि पानी में टीडीएस की मात्रा बढ़ने से गंभीर बीमारी जैसे पेट दर्द, बच्चों की त्वचा पर लाल चकत्ते, पथरी आदि की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि पीने वाले पानी के टीडीएस स्तर की जांच करा लें। अगर इसका स्तर बढ़ा हुआ है तो घर में आरओ का इस्तेमाल करें।
कराई जाती हैं ये जांचें
प्रयोगशाला में पानी के गंदलापन, पीएच, आयरन, टीडीएस, नाइट्रेट, फ्लोराइड, क्लोराइड, आर्सेनिक, अवशेष क्लोरीन की जांच की जाती है। जांच में इनका स्तर कम-ज्यादा आने पर नगर पालिका द्वारा पानी का उपचार करने के बाद शहर को आपूर्ति देनी चाहिए।
मोहल्ले में लगी पालिका की टंकी से पानी शुद्ध नहीं आ रहा है। पानी को रात में भरकर रख दो और सुबह उठकर देखो तो उसमें एक अलग सी परत जमी नजर आती है। - आरती यादव, नगला भजा
क्षेत्र के मोहल्लों में पानी में टीडीएस की मात्रा 800 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक पहुंच चुकी है। पानी पीने से पेट की समस्याएं होने लगी हैं। - आदित्य चौहान, शृंगार नगर
पिछले साल फरवरी माह में नगर पालिका परिषद ने 18 नलकूप के सैंपल जांच के लिए दिए थे, लेकिन फीस जमा नहीं करने की वजह से इनकी जांच नहीं हो सकी। इससे पहले 2021 में जांच कराई गई थी। वहीं देहात क्षेत्र के नलकूपों के पानी की जांच होती रहती है। अभी तक कोई नमूने फेल नहीं हुआ है। - विश्वजीत प्रजापति, अधिशासी अभियंता, जल निगम
पालिका के जल-कल विभाग के अवर अभियंता को पत्र जारी किया गया है। निर्देश दिए गए हैं कि अलग-अलग प्वाइंट से नमेने लेकर पानी की जांच कराई जाए। ओवरहेड टैंकों की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। - निहाल सिंह, ईओ नगर पालिका एटा

जीटी रोड स्थित जलनिगम की जल परीक्षण प्रयोगशाला। संवाद

जीटी रोड स्थित जलनिगम की जल परीक्षण प्रयोगशाला। संवाद