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भोले की अनूठी भक्त: 14 साल की अंजलि ने उठाई कांवड़, जुड़वां बहनों ने भी दिया साथ; पांच वर्ष से जारी सिलसिला
Sat, 08 Aug 2026 07:47 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Published by: Arun Parashar
Updated Sat, 08 Aug 2026 07:47 PM IST
सार
अंजलि की भक्ति को देख उसकी दोनों छोटी बहनें भी भगवान शिव की भक्त हो गई। पांच वर्ष पहले अंजलि ने सोरों से कांवड़ लाने की जिद की थी। उसकी जिद में दोनों जुड़वां बहनों ने भी साथ दिया। उस समय अंजलि छोटी थी, इसलिए वह तीनों बहनों के साथ सोरों आकर कांवड़ में गंगाजल लेकर चल दिए।
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कांवड़ लेकर जातीं तीन सगी बहनें।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सावन माह में कांवड़ चढ़ाने वालों में महिलाएं और बालिकाएं भी पीछे नहीं हैं। बटेश्वर की तीन सगी बहनें पांच वर्ष से सोरों से कांवड़ भरकर बटेश्वर के शिव मंदिर पर गंगाजल अर्पित कर रही हैं। इन बालिकाओं की बचपन से भगवान शिव में विशेष आस्था है। बालिकाओं को पैदल कांवड़ ले जाते देख क्षेत्र के लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं।
बटेश्वर के हरप्रसाद ने बताया कि बड़ी बेटी अंजलि (14) हाईस्कूल की छात्रा है। दो अन्य बेटियां अनीता और आरती जुड़वां हैं। अंजलि की बचपन से ही भगवान भोलेनाथ में विशेष आस्था है। अंजलि की भक्ति को देख उसकी दोनों छोटी बहनें भी भगवान शिव की भक्त हो गई। पांच वर्ष पहले अंजलि ने सोरों से कांवड़ लाने की जिद की थी। उसकी जिद में दोनों जुड़वां बहनों ने भी साथ दिया। उस समय अंजलि छोटी थी, इसलिए वह तीनों बहनों के साथ सोरों आकर कांवड़ में गंगाजल लेकर चल दिए।
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बटेश्वर के हरप्रसाद ने बताया कि बड़ी बेटी अंजलि (14) हाईस्कूल की छात्रा है। दो अन्य बेटियां अनीता और आरती जुड़वां हैं। अंजलि की बचपन से ही भगवान भोलेनाथ में विशेष आस्था है। अंजलि की भक्ति को देख उसकी दोनों छोटी बहनें भी भगवान शिव की भक्त हो गई। पांच वर्ष पहले अंजलि ने सोरों से कांवड़ लाने की जिद की थी। उसकी जिद में दोनों जुड़वां बहनों ने भी साथ दिया। उस समय अंजलि छोटी थी, इसलिए वह तीनों बहनों के साथ सोरों आकर कांवड़ में गंगाजल लेकर चल दिए।
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तीनों बहनों ने पूरे रास्ते कांवड़ नहीं दी और बटेश्वर तक खुद कांवड़ लेकर पहुंची। तब से सावन मास में कांवड़ चढ़ाने का यह सिलसिला निरंतर जारी है और तीनों बेटियां इस दफा पांचवी बार कांवड़ लेकर बटेश्वर के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंगी।
भोलेनाथ का जयकारा लगाते ही दूर हो जाती है थकान
तीनों बहनों ने कहा भाेलेनाथ का जयकारा लगाते ही सारी थकान दूर हो जाती है। रास्ते में कांवड़ लेकर जा रहे भक्तों के साथ जयकारा लगाते हुए चलते समय दूरी का पता ही नहीं चलता। कांवड़ उठाने के बाद सिर्फ लक्ष्य दिमाग में रहता है। भगवान शिव के आशीर्वाद से कदम अपने आप आगे बढ़ते रहते हैं।
भोलेनाथ का जयकारा लगाते ही दूर हो जाती है थकान
तीनों बहनों ने कहा भाेलेनाथ का जयकारा लगाते ही सारी थकान दूर हो जाती है। रास्ते में कांवड़ लेकर जा रहे भक्तों के साथ जयकारा लगाते हुए चलते समय दूरी का पता ही नहीं चलता। कांवड़ उठाने के बाद सिर्फ लक्ष्य दिमाग में रहता है। भगवान शिव के आशीर्वाद से कदम अपने आप आगे बढ़ते रहते हैं।
झूला कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, देखने को उमड़ी भीड़
सावन माह में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त अनेक प्रकार के प्रयास कर रहे हैं। कस्बे से शुक्रवार मध्यरात्रि आकर्षक झूला कांवड़ यात्रा निकली। इसे देखने केलिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। झूला कांवड़ लेकर निकल रहे भोले के भक्त मुकेश शर्मा ने बताया कि वह आगरा की टेढ़ी बगिया के निवासी हैं, जो साथियों के साथ कांवड़ लेकर जा रहे हैं। 51 किलो की कांवड़ में छह लीटर गंगाजल है। दो बांस पर कांवड़ को झूले की तरह सफेद कपड़े से सजाया गया था, जिस पर चित्रकारी कर खोपड़ी बनाई गई। श्रद्धालुओं ने सभी कांवड़ यात्रियों को विश्राम कराकर जलपान कराकर विदा किया।
सावन माह में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त अनेक प्रकार के प्रयास कर रहे हैं। कस्बे से शुक्रवार मध्यरात्रि आकर्षक झूला कांवड़ यात्रा निकली। इसे देखने केलिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। झूला कांवड़ लेकर निकल रहे भोले के भक्त मुकेश शर्मा ने बताया कि वह आगरा की टेढ़ी बगिया के निवासी हैं, जो साथियों के साथ कांवड़ लेकर जा रहे हैं। 51 किलो की कांवड़ में छह लीटर गंगाजल है। दो बांस पर कांवड़ को झूले की तरह सफेद कपड़े से सजाया गया था, जिस पर चित्रकारी कर खोपड़ी बनाई गई। श्रद्धालुओं ने सभी कांवड़ यात्रियों को विश्राम कराकर जलपान कराकर विदा किया।