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Etawah News: भाव गिरने से उठ नहीं पा रहा 4.60 लाख एमटी आलू
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इटावा। आलू के भाव में भारी गिरावट से किसानों का गणित बिगड़ गया है। मंडी में कीमतें इतनी कम हैं कि किसान कोल्ड स्टोर से उपज नहीं निकाल रहे हैं। जिले में पिछले वर्ष करीब 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती हुई थी।
जिले के 58 कोल्ड स्टोरों में करीब 4,60,272 मीट्रिक टन आलू अब भी पड़ा है। इस सीजन में कुल 6,13,696 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया था। इसमें से अब तक केवल 1,53,424 मीट्रिक टन यानी 25 फीसदी की ही निकासी हुई है। जिले के 58 कोल्ड स्टोरों की कुल क्षमता 6,80,370 मीट्रिक टन है। इस बार कुल क्षमता के मुकाबले करीब 90.2 फीसदी आलू का भंडारण हुआ। पिछले वर्ष अगस्त तक 32 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरों से निकल चुका था। इस बार निकासी की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले काफी धीमी है। आलू के गिरे भाव ने निकासी पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
फिलहाल जिले में आलू का भाव 250 से 300 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो) तक चल रहा है। बीज वाले आलू की कीमत महज 100 से 150 रुपये प्रति पैकेट रह गई है। किसानों का कहना है कि इतनी कम कीमत पर लागत और भंडारण खर्च निकालना मुश्किल है। इसलिए वे आलू निकालने के बजाय भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
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पिछले वर्ष कोल्ड स्टोर का किराया 270 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस साल बढ़कर 280 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। आलू की ढुलाई, मजदूरी और अन्य खर्च भी बढ़े हैं। ऐसे में उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार में उपज का भाव लागत के अनुरूप नहीं मिल रहा। किसानों के सामने आलू बेचने पर घाटा और स्टोर में रखने पर बढ़ता खर्च, दोनों ही परेशानी का कारण बने हुए हैं।
आलू की धीमी निकासी से कोल्ड स्टोर संचालक भी चिंतित हैं। समय पर आलू न निकलने पर बड़ी मात्रा में उपज खराब होने का खतरा बना हुआ है। खराब आलू को बाहर निकालकर फेंकने में भी अतिरिक्त खर्च आएगा। ऐसे में कम कीमत का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि कोल्ड स्टोर संचालकों पर भी पड़ रहा है। यदि जल्द बाजार में आलू के भाव नहीं सुधरे तो किसानों के साथ-साथ भंडारण कारोबार के सामने भी संकट गहरा सकता है।
फोटो 13::किसान मोहित गुप्ता।
रुद्रपुर निवासी मोहित गुप्ता ने बताया कि 50 किलो आलू का भाव 250 से 300 रुपये मिल रहा है, जबकि कोल्ड स्टोर का किराया, मजदूरी और ढुलाई जोड़ने के बाद इतनी कीमत पर आलू बेचने से लागत भी पूरी नहीं हो रही है। ऐसे में मजबूरी में आलू स्टोर में रोककर रखा है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बाजार भाव में कुछ सुधार होगा।
फोटो 14::किसान राजेश कुमार।
बढ़ गई आलू की लागत
ऊसराहार निवासी किसान राजेश कुमार ने बताया कि इस बार आलू की लागत काफी बढ़ गई है। बीज वाले आलू का भाव तो 100 से 150 रुपये प्रति पैकेट तक रह गया है। इतने कम दाम में आलू निकालने पर नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए फिलहाल आलू बेचने के बजाय भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि बाजार में मांग बढ़ने पर उन्हें कुछ राहत मिल सकेगी।
इस योजना से किसानों को राहत की उम्मीद
आलू के लगातार गिरते भाव से परेशान किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने किसानों को बाजार में कम दाम मिलने की स्थिति में राहत देने के लिए भामाशाह भाव स्थिरता कोष बनाया है। इसके तहत किसानों को अधिकतम 1.50 रुपये प्रति किलो तक भावांतर भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा। इसके अलावा निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले किसानों को भंडारण शुल्क में एक रुपये प्रति किलो की राहत देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि इस संबंध में जिले में अभी तक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए है।
सरकार को बड़े बाजार खोलने की जरूरत
कोल्ड स्टोर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजेश अरोड़ा ने बताया कि इन दिनों आलू की कीमतों से किसान सहित कोल्ड स्टोर संचालक परेशान है। हालांकि सरकार की ओर से एक रुपये प्रति किलो की किराया सब्सिडी से राहत मिलेगी। इससे उलट अगर सरकार आलू की बड़ी मात्रा में खपत के लिए बड़े बाजारों या अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से निर्यात करती है तो जिले के किसानों को लाभ हो सकता है।
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जिले के 58 कोल्ड स्टोरों में करीब 4,60,272 मीट्रिक टन आलू अब भी पड़ा है। इस सीजन में कुल 6,13,696 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया था। इसमें से अब तक केवल 1,53,424 मीट्रिक टन यानी 25 फीसदी की ही निकासी हुई है। जिले के 58 कोल्ड स्टोरों की कुल क्षमता 6,80,370 मीट्रिक टन है। इस बार कुल क्षमता के मुकाबले करीब 90.2 फीसदी आलू का भंडारण हुआ। पिछले वर्ष अगस्त तक 32 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरों से निकल चुका था। इस बार निकासी की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले काफी धीमी है। आलू के गिरे भाव ने निकासी पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
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फिलहाल जिले में आलू का भाव 250 से 300 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो) तक चल रहा है। बीज वाले आलू की कीमत महज 100 से 150 रुपये प्रति पैकेट रह गई है। किसानों का कहना है कि इतनी कम कीमत पर लागत और भंडारण खर्च निकालना मुश्किल है। इसलिए वे आलू निकालने के बजाय भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
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पिछले वर्ष कोल्ड स्टोर का किराया 270 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस साल बढ़कर 280 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। आलू की ढुलाई, मजदूरी और अन्य खर्च भी बढ़े हैं। ऐसे में उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार में उपज का भाव लागत के अनुरूप नहीं मिल रहा। किसानों के सामने आलू बेचने पर घाटा और स्टोर में रखने पर बढ़ता खर्च, दोनों ही परेशानी का कारण बने हुए हैं।
आलू की धीमी निकासी से कोल्ड स्टोर संचालक भी चिंतित हैं। समय पर आलू न निकलने पर बड़ी मात्रा में उपज खराब होने का खतरा बना हुआ है। खराब आलू को बाहर निकालकर फेंकने में भी अतिरिक्त खर्च आएगा। ऐसे में कम कीमत का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि कोल्ड स्टोर संचालकों पर भी पड़ रहा है। यदि जल्द बाजार में आलू के भाव नहीं सुधरे तो किसानों के साथ-साथ भंडारण कारोबार के सामने भी संकट गहरा सकता है।
फोटो 13::किसान मोहित गुप्ता।
रुद्रपुर निवासी मोहित गुप्ता ने बताया कि 50 किलो आलू का भाव 250 से 300 रुपये मिल रहा है, जबकि कोल्ड स्टोर का किराया, मजदूरी और ढुलाई जोड़ने के बाद इतनी कीमत पर आलू बेचने से लागत भी पूरी नहीं हो रही है। ऐसे में मजबूरी में आलू स्टोर में रोककर रखा है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बाजार भाव में कुछ सुधार होगा।
फोटो 14::किसान राजेश कुमार।
बढ़ गई आलू की लागत
ऊसराहार निवासी किसान राजेश कुमार ने बताया कि इस बार आलू की लागत काफी बढ़ गई है। बीज वाले आलू का भाव तो 100 से 150 रुपये प्रति पैकेट तक रह गया है। इतने कम दाम में आलू निकालने पर नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए फिलहाल आलू बेचने के बजाय भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि बाजार में मांग बढ़ने पर उन्हें कुछ राहत मिल सकेगी।
इस योजना से किसानों को राहत की उम्मीद
आलू के लगातार गिरते भाव से परेशान किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने किसानों को बाजार में कम दाम मिलने की स्थिति में राहत देने के लिए भामाशाह भाव स्थिरता कोष बनाया है। इसके तहत किसानों को अधिकतम 1.50 रुपये प्रति किलो तक भावांतर भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा। इसके अलावा निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले किसानों को भंडारण शुल्क में एक रुपये प्रति किलो की राहत देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि इस संबंध में जिले में अभी तक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए है।
सरकार को बड़े बाजार खोलने की जरूरत
कोल्ड स्टोर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजेश अरोड़ा ने बताया कि इन दिनों आलू की कीमतों से किसान सहित कोल्ड स्टोर संचालक परेशान है। हालांकि सरकार की ओर से एक रुपये प्रति किलो की किराया सब्सिडी से राहत मिलेगी। इससे उलट अगर सरकार आलू की बड़ी मात्रा में खपत के लिए बड़े बाजारों या अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से निर्यात करती है तो जिले के किसानों को लाभ हो सकता है।