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Etawah News: हाईवे से बहकर खेतों में भरा पानी, 500 बीघा फसल डूबी
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बकेवर। लगातार बारिश से बकेवर क्षेत्र के चार गांवों में खेतों में जलभराव हो गया है। इससे लगभग 500 बीघा धान की फसल पानी में डूब गई है। फसल खराब होने की आशंका है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
कानपुर-आगरा नेशनल हाईवे के किनारे स्थित शाला, चंदपुरा, लवारपुरा और सराय मिट्ठे गांवों के खेत प्रभावित हुए हैं। करीब 40 किसानों की धान की फसल कई दिनों से पानी में डूबी है। खेतों में पानी भरा होने से धान की फसल खराब होने लगी है। जलभराव के कारण गांवों में लोगों के मकानों में भी दरारें आ गई हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश का पानी नेशनल हाईवे से बहकर खेतों में पहुंच जाता है। रजवाहा के अवैध कुलाबा से भी पानी लगातार खेतों में आता रहता है। किसानों का आरोप है कि हाईवे व आसपास के पानी की निकासी के लिए कोई नाला नहीं है।
किसानों ने इस समस्या के स्थायी निदान की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। किसानों ने पानी की तत्काल निकासी और नाले के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकला तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा।
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किसानों ने प्रशासन से जलभराव प्रभावित खेतों का राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम से सर्वे कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन हो सके। किसानों का कहना है कि जिन खेतों में फसल खराब हो चुकी है उन्हें फसल क्षति का मुआवजा दिलाया जाए। इसके साथ ही जलनिकासी की जल्द से जल्द व्यवस्था की जाए।
फोटो: 16 प्रमोद चतुर्वेदी
शाला निवासी किसान प्रमोद चतुर्वेदी का कहना है कि उनकी 25 बीघा फसल पानी में डूबी हुई है। यदि हाईवे के किनारे पाइप डालकर खेतों का पानी बाहर निकाला जाए तो जलभराव की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इसके बाद नाले का निर्माण कराया जाए।
फोटो: 17 अनूप
गांव निवासी किसान अनूप ने बताया कि उनकी नौ बीघा धान की फसल खेतों में पानी भरने से डूबी है। जलभराव से फसल नष्ट होन की कगार पर है। ऐसे में फसल पर लगी पूरी लागत बर्बाद हो गई है।
वर्जन
किसानों की इस समस्या को लेकर जल्द लेखपालों की टीम मौके पर भेजी जाएगी। इसके बाद जलभराव की समस्या के निदान को लेकर योजना बनाई जाएगी।
दिलीप कुमार, तहसीलदार
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कानपुर-आगरा नेशनल हाईवे के किनारे स्थित शाला, चंदपुरा, लवारपुरा और सराय मिट्ठे गांवों के खेत प्रभावित हुए हैं। करीब 40 किसानों की धान की फसल कई दिनों से पानी में डूबी है। खेतों में पानी भरा होने से धान की फसल खराब होने लगी है। जलभराव के कारण गांवों में लोगों के मकानों में भी दरारें आ गई हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश का पानी नेशनल हाईवे से बहकर खेतों में पहुंच जाता है। रजवाहा के अवैध कुलाबा से भी पानी लगातार खेतों में आता रहता है। किसानों का आरोप है कि हाईवे व आसपास के पानी की निकासी के लिए कोई नाला नहीं है।
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किसानों ने इस समस्या के स्थायी निदान की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। किसानों ने पानी की तत्काल निकासी और नाले के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकला तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा।
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किसानों ने प्रशासन से जलभराव प्रभावित खेतों का राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम से सर्वे कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन हो सके। किसानों का कहना है कि जिन खेतों में फसल खराब हो चुकी है उन्हें फसल क्षति का मुआवजा दिलाया जाए। इसके साथ ही जलनिकासी की जल्द से जल्द व्यवस्था की जाए।
फोटो: 16 प्रमोद चतुर्वेदी
शाला निवासी किसान प्रमोद चतुर्वेदी का कहना है कि उनकी 25 बीघा फसल पानी में डूबी हुई है। यदि हाईवे के किनारे पाइप डालकर खेतों का पानी बाहर निकाला जाए तो जलभराव की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इसके बाद नाले का निर्माण कराया जाए।
फोटो: 17 अनूप
गांव निवासी किसान अनूप ने बताया कि उनकी नौ बीघा धान की फसल खेतों में पानी भरने से डूबी है। जलभराव से फसल नष्ट होन की कगार पर है। ऐसे में फसल पर लगी पूरी लागत बर्बाद हो गई है।
वर्जन
किसानों की इस समस्या को लेकर जल्द लेखपालों की टीम मौके पर भेजी जाएगी। इसके बाद जलभराव की समस्या के निदान को लेकर योजना बनाई जाएगी।
दिलीप कुमार, तहसीलदार