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Etawah News: तीन बेटों के बाप को नसीब न हुए चार कंधे
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इटावा। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले एटा के महरारा निवासी राजकुमार सक्सेना (70) के शव का 72 घंटे बाद भी कोई वारिस नहीं पहुंचा। परिवार के लोगों के शव लेने से इन्कार करने के बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को मोर्चरी में रखवाया था। निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी जब कोई परिजन नहीं आया तो पुलिस ने रक्तदाता समूह की टीम की मदद से यमुना घाट पर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया।
राजकुमार को 16 अगस्त को एटा के वृद्धाश्रम से गंभीर हालत में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी 11 जुलाई को मौत हो गई थी। अस्पताल में भर्ती कराते समय राजकुमार की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर उनके बेटे का नाम और मोबाइल नंबर दस्तावेजों में दर्ज किया गया था। अस्पताल प्रशासन ने मौत की जानकारी देने के लिए उसी नंबर पर संपर्क किया तो सामने वाले व्यक्ति ने राजकुमार को पहचानने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद उसने फोन भी उठाना बंद कर दिया।
मौत के बाद पुलिस ने परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी शव लेने के लिए नहीं पहुंचा। इसके बाद पंचनामा भरकर शव को 72 घंटे के लिए मोर्चरी में रखवाया गया। निर्धारित अवधि पूरी होने तक परिवार के किसी सदस्य के नहीं पहुंचने पर पुलिस ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई। प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र राठी ने बताया कि राजकुमार को उनके बेटे ने ही एटा के वृद्धाश्रम में भर्ती कराया था। वृद्धाश्रम कर्मचारियों ने भी बुजुर्ग की हालत और मौत की जानकारी देने के लिए बेटे से संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। राजकुमार के तीन बेटे गाजियाबाद में रहते हैं। एक बेटी भी है, जिसकी शादी हो चुकी है। पत्नी भी जीवित हैं और बच्चों के साथ गाजियाबाद में रहती हैं। करीब 15 साल पहले कर्ज को लेकर हुए पारिवारिक विवाद के बाद राजकुमार परिवार से अलग हो गए थे। वह इलेक्ट्रॉनिक सामान के बड़े कारोबारी बताए गए हैं।
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राजकुमार को 16 अगस्त को एटा के वृद्धाश्रम से गंभीर हालत में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी 11 जुलाई को मौत हो गई थी। अस्पताल में भर्ती कराते समय राजकुमार की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर उनके बेटे का नाम और मोबाइल नंबर दस्तावेजों में दर्ज किया गया था। अस्पताल प्रशासन ने मौत की जानकारी देने के लिए उसी नंबर पर संपर्क किया तो सामने वाले व्यक्ति ने राजकुमार को पहचानने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद उसने फोन भी उठाना बंद कर दिया।
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मौत के बाद पुलिस ने परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी शव लेने के लिए नहीं पहुंचा। इसके बाद पंचनामा भरकर शव को 72 घंटे के लिए मोर्चरी में रखवाया गया। निर्धारित अवधि पूरी होने तक परिवार के किसी सदस्य के नहीं पहुंचने पर पुलिस ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई। प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र राठी ने बताया कि राजकुमार को उनके बेटे ने ही एटा के वृद्धाश्रम में भर्ती कराया था। वृद्धाश्रम कर्मचारियों ने भी बुजुर्ग की हालत और मौत की जानकारी देने के लिए बेटे से संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। राजकुमार के तीन बेटे गाजियाबाद में रहते हैं। एक बेटी भी है, जिसकी शादी हो चुकी है। पत्नी भी जीवित हैं और बच्चों के साथ गाजियाबाद में रहती हैं। करीब 15 साल पहले कर्ज को लेकर हुए पारिवारिक विवाद के बाद राजकुमार परिवार से अलग हो गए थे। वह इलेक्ट्रॉनिक सामान के बड़े कारोबारी बताए गए हैं।
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