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Etawah News: बैंक की नौकरी छोड़ ठगी के नेटवर्क में उतरा था आमिर
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इटावा। इंडिया मार्ट की आड़ में देशभर के व्यापारियों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना प्रतीक सक्सेना और फरार आरोपी आमिर सोहेल की दोस्ती बैंक में हुई थी। आमिर शहर के एक निजी बैंक में नौकरी करता था। करीब डेढ़ साल पहले उसने नौकरी छोड़ दी और इसके बाद प्रतीक के साथ मिलकर ठगी के कारोबार में शामिल हो गया। इससे पहले आमिर एक पैथोलॉजी में भी काम कर चुका था।
पुलिस जांच में सामने आया कि प्रतीक ने ठगी के लिए फर्म और बैंक खातों का पूरा नेटवर्क तैयार किया था। उसने अपनी पत्नी प्रीति सक्सेना के नाम से जीएसटी पंजीकरण कराया। इसी जीएसटी नंबर के आधार पर फर्म तैयार की गई। फर्म को वास्तविक कारोबार करने वाली कंपनी का रूप देने के लिए कार्यालय में अनाज और बीज के नमूने रखे जाते थे। यहां आने वाले व्यापारियों को फर्म के वास्तविक कारोबार करने का भरोसा दिलाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि प्रतीक व्यापारियों के सामने अपनी पहचान छिपाकर कई बार राजीव कुमार के नाम का इस्तेमाल करता था। फर्जी पहचान दस्तावेजों के जरिए व्यापारियों को भरोसे में लिया जाता था।
नेटवर्क का संचालन करने वाले आरोपी बैंकिंग प्रक्रियाओं और वित्तीय लेनदेन की गहरी जानकारी रखते थे। आमिर शहर के एक निजी बैंक में नौकरी करता था और बैंक खातों, केवाईसी प्रक्रिया, डिजिटल भुगतान और लेनदेन प्रणाली की अच्छी जानकारी रखता था। पुलिस का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम की समझ और खातों के संचालन का अनुभव ही गिरोह की सबसे बड़ी ताकत था, जिसकी मदद से आरोपियों ने ठगी के पैसे को अलग-अलग खातों और माध्यमों से संचालित किया।
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पुलिस आरोपियों से जुड़े 22 बैंक खातों में हुए चार से पांच करोड़ रुपये के लेनदेन की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों को बैंकिंग प्रक्रिया, खातों के संचालन और लेनदेन से जुड़ी जानकारी किस तरह हासिल हुई। इस कड़ी में बैंक से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। आमिर शहर के एक निजी बैंक में काम करता था। फर्मों के जीएसटी पंजीकरण, बैंक खाते खुलवाने और अन्य दस्तावेज तैयार कराने में आरोपियों की मदद किसने की। यदि जांच में किसी बैंक कर्मचारी या बैंक से जुड़े अन्य व्यक्ति की मिलीभगत अथवा लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रेजुएट है प्रतीक, साथी 12 वीं तक पढ़े
गिरोह का सरगना प्रतीक सक्सेना ग्रेजुएट है। फर्म और बैंक खातों से जुड़े अधिकांश काम वही संभालता था। उसके साथ गिरफ्तार आकाश बाथम, विकास दीक्षित और प्रवेश कुमार ने 12 वीं तक पढ़ाई की है। पुलिस इनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
वर्जन
एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया बैंकिंग प्रक्रिया और लेनदेन से जुड़ी उसकी जानकारी की भी जांच की जा रही है। बैंक खातों के संचालन, केवाईसी और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल होगी। जांच में यदि बैंक से जुड़े किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस जांच में सामने आया कि प्रतीक ने ठगी के लिए फर्म और बैंक खातों का पूरा नेटवर्क तैयार किया था। उसने अपनी पत्नी प्रीति सक्सेना के नाम से जीएसटी पंजीकरण कराया। इसी जीएसटी नंबर के आधार पर फर्म तैयार की गई। फर्म को वास्तविक कारोबार करने वाली कंपनी का रूप देने के लिए कार्यालय में अनाज और बीज के नमूने रखे जाते थे। यहां आने वाले व्यापारियों को फर्म के वास्तविक कारोबार करने का भरोसा दिलाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि प्रतीक व्यापारियों के सामने अपनी पहचान छिपाकर कई बार राजीव कुमार के नाम का इस्तेमाल करता था। फर्जी पहचान दस्तावेजों के जरिए व्यापारियों को भरोसे में लिया जाता था।
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नेटवर्क का संचालन करने वाले आरोपी बैंकिंग प्रक्रियाओं और वित्तीय लेनदेन की गहरी जानकारी रखते थे। आमिर शहर के एक निजी बैंक में नौकरी करता था और बैंक खातों, केवाईसी प्रक्रिया, डिजिटल भुगतान और लेनदेन प्रणाली की अच्छी जानकारी रखता था। पुलिस का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम की समझ और खातों के संचालन का अनुभव ही गिरोह की सबसे बड़ी ताकत था, जिसकी मदद से आरोपियों ने ठगी के पैसे को अलग-अलग खातों और माध्यमों से संचालित किया।
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पुलिस आरोपियों से जुड़े 22 बैंक खातों में हुए चार से पांच करोड़ रुपये के लेनदेन की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों को बैंकिंग प्रक्रिया, खातों के संचालन और लेनदेन से जुड़ी जानकारी किस तरह हासिल हुई। इस कड़ी में बैंक से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। आमिर शहर के एक निजी बैंक में काम करता था। फर्मों के जीएसटी पंजीकरण, बैंक खाते खुलवाने और अन्य दस्तावेज तैयार कराने में आरोपियों की मदद किसने की। यदि जांच में किसी बैंक कर्मचारी या बैंक से जुड़े अन्य व्यक्ति की मिलीभगत अथवा लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रेजुएट है प्रतीक, साथी 12 वीं तक पढ़े
गिरोह का सरगना प्रतीक सक्सेना ग्रेजुएट है। फर्म और बैंक खातों से जुड़े अधिकांश काम वही संभालता था। उसके साथ गिरफ्तार आकाश बाथम, विकास दीक्षित और प्रवेश कुमार ने 12 वीं तक पढ़ाई की है। पुलिस इनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
वर्जन
एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया बैंकिंग प्रक्रिया और लेनदेन से जुड़ी उसकी जानकारी की भी जांच की जा रही है। बैंक खातों के संचालन, केवाईसी और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल होगी। जांच में यदि बैंक से जुड़े किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।