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Etawah News: फर्जी तरीके से खतौनी में नाम दर्ज करने का आरोप
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आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत, राजस्व अभिलेखों की जांच की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। तहसील क्षेत्र के ग्राम रीतौर की मडैया में पैतृक कृषि भूमि पर फर्जी तरीके से नाम दर्ज कराने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर राजस्व अभिलेखों की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम रीतौर की मडैया निवासी लल्लूराम ने आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। इसमें आरोप लगाया कि गांव के ही कुछ लोगों ने उनकी पैतृक कृषि भूमि पर गलत तरीके से सांठगांठ कर खतौनी और विरासत में अपने नाम दर्ज करा लिए हैं। पीड़ित के अनुसार, विपक्षी व्यक्तियों का साल 1971 से लेकर आज तक किसी भी राजस्व अभिलेख, खतौनी या खसरा में कोई नाम दर्ज नहीं था और न ही उनके पास भूमि के मालिकाना हक का कोई वैध दस्तावेज है।
पीड़ित का कहना है कि पूर्व में इस विवादित मामले की सुनवाई के दौरान तहसीलदार ने विपक्षियों के दावों को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर राजस्व अभिलेखों में दोबारा उनके नाम दर्ज कर दिए गए, जो सीधे तौर पर विभागीय अनियमितता और मिलीभगत को दर्शाता है। इससे पीड़ित के भूमि अधिकारों पर संकट खड़ा हो गया है।
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पीड़ित लल्लूराम ने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, तहसीलदार के पुराने आदेश का परीक्षण कराने और फर्जी नाम तत्काल हटाकर इस खेल में शामिल दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी व विभागीय कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। तहसील क्षेत्र के ग्राम रीतौर की मडैया में पैतृक कृषि भूमि पर फर्जी तरीके से नाम दर्ज कराने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर राजस्व अभिलेखों की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम रीतौर की मडैया निवासी लल्लूराम ने आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। इसमें आरोप लगाया कि गांव के ही कुछ लोगों ने उनकी पैतृक कृषि भूमि पर गलत तरीके से सांठगांठ कर खतौनी और विरासत में अपने नाम दर्ज करा लिए हैं। पीड़ित के अनुसार, विपक्षी व्यक्तियों का साल 1971 से लेकर आज तक किसी भी राजस्व अभिलेख, खतौनी या खसरा में कोई नाम दर्ज नहीं था और न ही उनके पास भूमि के मालिकाना हक का कोई वैध दस्तावेज है।
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पीड़ित का कहना है कि पूर्व में इस विवादित मामले की सुनवाई के दौरान तहसीलदार ने विपक्षियों के दावों को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर राजस्व अभिलेखों में दोबारा उनके नाम दर्ज कर दिए गए, जो सीधे तौर पर विभागीय अनियमितता और मिलीभगत को दर्शाता है। इससे पीड़ित के भूमि अधिकारों पर संकट खड़ा हो गया है।
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पीड़ित लल्लूराम ने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, तहसीलदार के पुराने आदेश का परीक्षण कराने और फर्जी नाम तत्काल हटाकर इस खेल में शामिल दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी व विभागीय कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।