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Etawah News: दरकती नींव पर खड़े जर्जर भवन...जिम्मेदार भी बेखबर
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- मानसून में बढ़ा हादसों का खतरा, नगर पालिका ने नहीं कराया व्यापक सर्वे, हादसे का इंतजार
- ग्रामीण क्षेत्र में जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की पढ़ाई भी ठप, कई सरकारी भवन भी जर्जर
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। अवैध और जर्जर भवनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी प्रशासनिक अमले में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई दे रही। हाल यह है कि अभी तक अवैध व जर्जर भवनों के चिह्नीकरण के लिए सर्व तक नहीं शुरू कराया। पूर्व में ऐसे भवन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी कर इतिश्री कर ली गई।
जिले में एक अनुमान के मुताबिक 120 से अधिक जर्जर और अवैध भवन लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं लेकिन नगर पालिका से लेकर अन्य प्रशासनिक अमला पूरे वर्ष इन भवनों का व्यापक सर्वे तक नहीं करा सकी। अब जबकि मानसून शुरू हो चुका है और लगातार बारिश से पुराने भवनों के गिरने की आशंका बढ़ गई है, नगर पालिका सर्वे कराने की बात कह रही है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के साकेत में भवन गिरने तथा दिल्ली के मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज में आग लगने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारियों से असुरक्षित भवनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लोगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसको लेकर जिले में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। बीते दिनों सदर तहसील परिसर में जर्जर भवन को गिराने के दौरान मलबा गिरने से एक श्रमिक की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस हादसे के बाद उम्मीद थी कि शहर के अन्य खतरनाक भवनों का सर्वे कर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
नगर पालिका के अनुसार इस वर्ष केवल शिकायत या प्रार्थना पत्र मिलने पर पांच जर्जर भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी किए गए हैं। जबकि गाड़ीपुरा, पुरबिया टोला, साबितगंज, कटरा बलसिंह, मेवाती टोला, पुराना शहर, पक्का तालाब समेत कई मोहल्लों में दशकों पुराने भवन जर्जर हालत में खड़े हैं। इनमें कई भवनों की ऊपरी मंजिलों पर लोग रह रहे हैं, जबकि नीचे की मंजिलों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। ऐसे भवन किसी भी समय बड़ा हादसा बन सकते हैं।
यह स्थिति केवल निजी भवनों तक सीमित नहीं है। जिले के कई सरकारी कार्यालय और आवास भी पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं। हालांकि संबंधित विभागों के पास यह तक अद्यतन जानकारी नहीं है कि जिले में कितने सरकारी भवन जर्जर अवस्था में हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकारी स्तर पर भी असुरक्षित भवनों की पहचान और मरम्मत को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई है।
केस-एक
शहर में 50 से अधिक जर्जर भवन
इटावा। अकेले सदर में 50 से अधिक जर्जर भवन है जो किसी भी दिन गिरकर हादसे को दावत दे सकते हैं। इसके अलावा शहर में 10 से अधिक जर्जर भवन ऐसे है जो सरकारी हैं। शहर में स्थित आयुर्वेद अस्पताल, जिला अस्पताल के पास बने आवास, सीएमओ कार्यालय के पास बनी कांशीराम कॉलोनी के साथ ही डीएम आवास के सामने की कॉलोनी भी पूरी तरह जर्जर हालात में हैं लेकिन इनके ध्वस्तीकरण के लिए प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए है। (संवाद)
केस-दो
लवेदी में आंगनबाड़ी भवन जर्जर, बच्चे बाहर बैठ रहे
लवेदी। क्षेत्र के दाउदपुर गांव का आंगनबाड़ी केंद्र भी बदहाल स्थिति का उदाहरण बना हुआ है। भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और छत से लगातार प्लास्टर गिर रहा है। केंद्र पर 14 बच्चों का नामांकन है लेकिन सुरक्षा कारणों से एक भी बच्चा केंद्र नहीं पहुंच रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कमलेश कुमारी ने बताया कि भवन की हालत बेहद खराब है इसलिए बच्चों को बाहर बैठाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भवन की मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था नहीं होगी तब तक वे अपने बच्चों को केंद्र नहीं भेजेंगे। (संवाद)
केस-तीन
लखना पीएचसी का भवन जर्जर...ध्वस्तीकरण का इंतजार
बकेवर। लखना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्थित पुराना जर्जर भवन वर्षों से ध्वस्तीकरण का इंतजार कर रहा है। परिसर में नए भवन से स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही हैं, जबकि पुराना भवन अब भी खस्ताहाल स्थिति में खड़ा है। भवन की जर्जर हालत के कारण कभी भी हादसा होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुराने भवन को जल्द गिराकर परिसर को सुरक्षित बनाने की मांग की है। (संवाद)
वर्जन
नगर पालिका क्षेत्र में कितने भवन जर्जर हालात में है इसके लिए सर्वे करवाया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी जर्जर भवनों की जानकारी नगर पालिका के पास नहीं होती है। यह जानकारी संबंधित विभाग के पास ही होती है। सर्वे के माध्यम से जो भी जर्जर भवन की बात सामने आएगी, उन संचालकों को भवन ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया जाएगा।-संतोष कुमार मिश्र, ईओ
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- मानसून में बढ़ा हादसों का खतरा, नगर पालिका ने नहीं कराया व्यापक सर्वे, हादसे का इंतजार
- ग्रामीण क्षेत्र में जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की पढ़ाई भी ठप, कई सरकारी भवन भी जर्जर
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। अवैध और जर्जर भवनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी प्रशासनिक अमले में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई दे रही। हाल यह है कि अभी तक अवैध व जर्जर भवनों के चिह्नीकरण के लिए सर्व तक नहीं शुरू कराया। पूर्व में ऐसे भवन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी कर इतिश्री कर ली गई।
जिले में एक अनुमान के मुताबिक 120 से अधिक जर्जर और अवैध भवन लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं लेकिन नगर पालिका से लेकर अन्य प्रशासनिक अमला पूरे वर्ष इन भवनों का व्यापक सर्वे तक नहीं करा सकी। अब जबकि मानसून शुरू हो चुका है और लगातार बारिश से पुराने भवनों के गिरने की आशंका बढ़ गई है, नगर पालिका सर्वे कराने की बात कह रही है।
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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के साकेत में भवन गिरने तथा दिल्ली के मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज में आग लगने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारियों से असुरक्षित भवनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लोगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसको लेकर जिले में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। बीते दिनों सदर तहसील परिसर में जर्जर भवन को गिराने के दौरान मलबा गिरने से एक श्रमिक की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस हादसे के बाद उम्मीद थी कि शहर के अन्य खतरनाक भवनों का सर्वे कर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
नगर पालिका के अनुसार इस वर्ष केवल शिकायत या प्रार्थना पत्र मिलने पर पांच जर्जर भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी किए गए हैं। जबकि गाड़ीपुरा, पुरबिया टोला, साबितगंज, कटरा बलसिंह, मेवाती टोला, पुराना शहर, पक्का तालाब समेत कई मोहल्लों में दशकों पुराने भवन जर्जर हालत में खड़े हैं। इनमें कई भवनों की ऊपरी मंजिलों पर लोग रह रहे हैं, जबकि नीचे की मंजिलों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। ऐसे भवन किसी भी समय बड़ा हादसा बन सकते हैं।
यह स्थिति केवल निजी भवनों तक सीमित नहीं है। जिले के कई सरकारी कार्यालय और आवास भी पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं। हालांकि संबंधित विभागों के पास यह तक अद्यतन जानकारी नहीं है कि जिले में कितने सरकारी भवन जर्जर अवस्था में हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकारी स्तर पर भी असुरक्षित भवनों की पहचान और मरम्मत को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई है।
केस-एक
शहर में 50 से अधिक जर्जर भवन
इटावा। अकेले सदर में 50 से अधिक जर्जर भवन है जो किसी भी दिन गिरकर हादसे को दावत दे सकते हैं। इसके अलावा शहर में 10 से अधिक जर्जर भवन ऐसे है जो सरकारी हैं। शहर में स्थित आयुर्वेद अस्पताल, जिला अस्पताल के पास बने आवास, सीएमओ कार्यालय के पास बनी कांशीराम कॉलोनी के साथ ही डीएम आवास के सामने की कॉलोनी भी पूरी तरह जर्जर हालात में हैं लेकिन इनके ध्वस्तीकरण के लिए प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए है। (संवाद)
केस-दो
लवेदी में आंगनबाड़ी भवन जर्जर, बच्चे बाहर बैठ रहे
लवेदी। क्षेत्र के दाउदपुर गांव का आंगनबाड़ी केंद्र भी बदहाल स्थिति का उदाहरण बना हुआ है। भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और छत से लगातार प्लास्टर गिर रहा है। केंद्र पर 14 बच्चों का नामांकन है लेकिन सुरक्षा कारणों से एक भी बच्चा केंद्र नहीं पहुंच रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कमलेश कुमारी ने बताया कि भवन की हालत बेहद खराब है इसलिए बच्चों को बाहर बैठाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भवन की मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था नहीं होगी तब तक वे अपने बच्चों को केंद्र नहीं भेजेंगे। (संवाद)
केस-तीन
लखना पीएचसी का भवन जर्जर...ध्वस्तीकरण का इंतजार
बकेवर। लखना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्थित पुराना जर्जर भवन वर्षों से ध्वस्तीकरण का इंतजार कर रहा है। परिसर में नए भवन से स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही हैं, जबकि पुराना भवन अब भी खस्ताहाल स्थिति में खड़ा है। भवन की जर्जर हालत के कारण कभी भी हादसा होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुराने भवन को जल्द गिराकर परिसर को सुरक्षित बनाने की मांग की है। (संवाद)
वर्जन
नगर पालिका क्षेत्र में कितने भवन जर्जर हालात में है इसके लिए सर्वे करवाया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी जर्जर भवनों की जानकारी नगर पालिका के पास नहीं होती है। यह जानकारी संबंधित विभाग के पास ही होती है। सर्वे के माध्यम से जो भी जर्जर भवन की बात सामने आएगी, उन संचालकों को भवन ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया जाएगा।-संतोष कुमार मिश्र, ईओ