फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Allegations vague, full details lacking; court dismisses woman's plea.

Etawah News: आरोप अस्पष्ट, पूरा विवरण नहीं, कोर्ट ने खारिज की महिला की याचिका

Fri, 07 Aug 2026 12:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:09 AM IST
विज्ञापन
Allegations vague, full details lacking; court dismisses woman's plea.
इटावा। सत्र न्यायाधीश ने एक महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। उन्होंने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के 29 मई 2026 के आदेश को सही ठहराया। यह मामला बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने के आवेदन से संबंधित था।
विज्ञापन

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विपक्षी पक्ष ने साजिश के तहत उसके नाबालिग पुत्र को फंसाया। पुत्र घर से करीब पांच लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और एक लाख रुपये नकद लेकर चला गया था। इसके बाद विपक्षी पक्ष ने कथित रूप से जबरन वसूली कर 11 लाख रुपये या दो बीघा जमीन की मांग की। उन्होंने परिवार को धमकियां भी दी थीं। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता के पति और विपक्षी सिकंदराबाद की एक फैक्टरी में काम करते हैं। 16 अप्रैल 2026 को थाना सिकंदराबाद, जनपद बुलंदशहर में एक लड़की को ले जाने के संबंध में जीडी दर्ज हुई थी। दोनों के बरामद होने के बाद पक्षों के बीच एक समझौता हुआ। इसमें याचिकाकर्ता के पति ने 11 लाख रुपये देने पर सहमति जताई थी। सत्र न्यायाधीश ने पाया कि पूरा घटनाक्रम थाना सिकंदराबाद, जनपद बुलंदशहर क्षेत्र का है।
विज्ञापन

न्यायाधीश ने कहा कि केवल याचिकाकर्ता के इटावा निवासी होने से इटावा की अदालत को क्षेत्राधिकार नहीं मिलता। यह तथ्य भी सामने आया कि याचिकाकर्ता ने लड़की के गायब होने की जीडी दर्ज होने की जानकारी छिपाई थी। दोनों पक्षों के बीच पहले ही समझौता हो चुका था। इन तथ्यों के आधार पर इटावा की अदालत का क्षेत्राधिकार नहीं बनता।
विज्ञापन
विज्ञापन

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि आवेदन में धमकी दिए जाने की तिथि, समय और स्थान जैसे आवश्यक विवरण नहीं थे। लगाए गए आरोप अस्पष्ट प्रतीत होते हैं। अदालत के अनुसार, यह आवेदन विपक्षी पक्ष की कार्रवाई के जवाब में दबाव बनाने के उद्देश्य से दायर किया गया था। इसलिए मजिस्ट्रेट द्वारा आवेदन निरस्त करने के आदेश में कोई अवैधता नहीं पाई गई। इन्हीं आधारों पर पुनरीक्षण याचिका को निराधार मानकर खारिज कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed