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Etawah News: स्कूल के पहले दिन व्यवस्थाएं फेल, कहीं गंदगी तो कहीं लटका ताला

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2026 11:22 PM IST
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Arrangements fail on the first day of school; filth in some places, locked doors in others.
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इटावा। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद मंगलवार से जिले के 1484 परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो गई। स्कूल के पहले ही दिन कहीं विद्यालय निर्धारित समय तक नहीं खुले, तो कहीं परिसर में गंदगी का अंबार मिला। कई स्कूलों में पानी की किल्लत के कारण शौचालय बंद थे। वहीं, अधिकांश विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम रही। कई जगह शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों और अभिभावकों को विद्यालय आने के लिए प्रेरित करते नजर आए। जिले में करीब 90 हजार छात्र-छात्राएं परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत हैं। 20 मई से शुरू हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद मंगलवार को विद्यालय खुले। हालांकि, बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी शासनादेश में विद्यालय खुलने से पहले शौचालय, पेयजल, साफ-सफाई सहित सभी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई विद्यालयों में इनका पालन नहीं दिखा।

बकेवर। प्राथमिक विद्यालय बकेवर प्रथम में पहले दिन पहुंचे नौनिहालों का रोली-चंदन का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। प्रधानाध्यापक नवनीत कुमार पाण्डेय, सहायक अध्यापक शबाना खानम, रीना कुमारी, आरती तथा शिक्षामित्र रीना तिवारी और धूप श्री ने बच्चों का अभिनंदन कर उन्हें टॉफियां वितरित कीं। इसके विपरीत, कंपोजिट विद्यालय बकेवर में 272 बच्चों के सापेक्ष केवल 10 बच्चे ही पहुंचे। प्रधानाचार्य बलराज चतुर्वेदी और शिक्षक बच्चों का इंतजार करते रहे। विद्यालय परिसर में सफाई नहीं हुई थी। प्रधानाचार्य ने बताया कि सफाई व्यवस्था के लिए नगर पंचायत को पत्र भेजा गया है। कुड़रिया कंपोजिट विद्यालय में भी सुबह शिक्षक बच्चों की राह देखते मिले। परिसर में गंदगी फैली थी और सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचा था। (संवाद)
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उदी। क्षेत्र के बढ़पुरा ब्लॉक स्थित चौटी गांव के प्राथमिक विद्यालय में 29 पंजीकृत बच्चों में से केवल नौ बच्चे उपस्थित हुए। चार शिक्षकों में से एक विद्यालय में मौजूद मिला, जबकि तीन शिक्षक गांव में अभिभावकों को जागरूक करने निकले थे। प्रधानाचार्य सबीना बेगम ने बताया कि बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए अभियान लगातार चलाया जाएगा। विद्यालय की सफाई भी शिक्षकों ने स्वयं की। रमीकावर प्राथमिक विद्यालय में 66 बच्चों के सापेक्ष 17 बच्चे पहुंचे। यहां पेयजल और साफ-सफाई की समस्या सामने आई। प्रधानाचार्य ज्योति कुमारी ने बताया कि शुरुआती दिनों में उपस्थिति कम रहती है और जल्द ही इसमें सुधार होगा। मड़ैया पुल स्थित प्राथमिक विद्यालय में भवन निर्माण कार्य चल रहा है। यहां 32 बच्चों के मुकाबले 20 बच्चे उपस्थित मिले। विद्यालय के बाहर नाली गंदगी से भरी थी, जिससे बच्चों को आने-जाने में परेशानी हुई। ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर नियमित सफाई न होने की शिकायत की।(संवाद)
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पेयजल संकट, बंद रहे शौचालय
लवेदी। क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय लवेदी प्रथम में 24 नामांकित बच्चों में से केवल पांच बच्चे पहुंचे। प्रधानाध्यापिका अनुपम गौतम ने बताया कि ग्राम प्रधान की ओर से सफाई कराई गई, लेकिन बिजली ट्रिप होने के कारण समरसेबल नहीं चल सका, जिससे पानी और शौचालय व्यवस्था प्रभावित रही। प्राथमिक विद्यालय लवेदी द्वतीय में प्रधानाध्यापिका राजकुमारी अवकाश पर थीं। कार्यवाहक प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ने बताया कि 60 नामांकित बच्चों में से पहले दिन उपस्थिति बेहद कम रही। विद्यालय का हैंडपंप पिछले चार माह से खराब है, जिसके कारण पेयजल संकट बना हुआ है। पानी के अभाव में शौचालयों में गंदगी फैल गई और उन्हें बंद रखना पड़ा। सफाई कर्मचारी के नहीं पहुंचने से परिसर की सफाई भी नहीं हो सकी। (संवाद)
शिक्षकों ने सफाई कर संभाली व्यवस्था
भरथना। कस्बा क्षेत्र के गिरधारीपुरा स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय पुराना भरथना में विद्यालय खुलते ही शिक्षकों ने सफाई और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का कार्य शुरू किया। प्रधानाध्यापिका संतोष कुमारी ने बताया कि 152 पंजीकृत छात्राओं में से पहले दिन केवल 17 छात्राएं ही उपस्थित हुईं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी दिनों में उपस्थिति बढ़ेगी। (संवाद)
समय पर नहीं खुले स्कूल
निवाड़ीकला। ब्लॉक महेवा क्षेत्र में कई विद्यालयों की स्थिति और चिंताजनक रही। पड़ताल के दौरान प्राथमिक विद्यालय टड़वा स्माईलपुर में सुबह 8:02 बजे तक ताला लगा मिला, जबकि बच्चे बैग लेकर बाहर इंतजार करते और खेलते नजर आए। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय मुड़ैना कला सुबह 7:54 बजे तक बंद था, जबकि शासन के निर्देशानुसार विद्यालय सुबह 7:30 बजे तक खुल जाने चाहिए थे। नए शैक्षिक सत्र के पहले ही दिन सामने आई इन अव्यवस्थाओं ने परिषदीय विद्यालयों की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन के निर्देशों के बावजूद मूलभूत सुविधाओं की कमी और कम उपस्थिति शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है। (संवाद)
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