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Etawah News: राजकीय कॉलेजों में आधे शिक्षक, विज्ञान के गुरु जी दे रहे गणित का ज्ञान
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इटावा। जिले के राजकीय कॉलेजों में शिक्षकों की कमी अब शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा संकट बन चुकी है। हालत यह है कि विषय विशेषज्ञों के अभाव में विज्ञान के शिक्षक गणित और संस्कृत के शिक्षक हिंदी पढ़ाने को मजबूर हैं। कई विद्यालयों में हाईस्कूल के शिक्षक इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई करवा रहे है। वहीं विभागीय अधिकारियों का दावा है कि लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
जिले के 21 राजकीय कॉलेजों में स्वीकृत 317 पदों के सापेक्ष महज 125 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 192 पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इन विद्यालयों में लगभग आठ हजार छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे है। शिक्षकों की कमी का सीधा असर इन छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी भी अधूरी रह जा रही है। शिक्षकों की कमी का असर अब प्रवेश पर भी दिखने लगा है। कई विद्यालयों में छात्र संख्या लगातार घट रही है। अभिभावकों का कहना है कि जब विषय विशेषज्ञ ही उपलब्ध नहीं हैं तो सरकारी विद्यालयों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित कैसे होगा।
केस-एक
जीआईसी इटावा में 11 सौ छात्रों को पढ़ा रहे सिर्फ 16 शिक्षक
इटावा। शहर के राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां करीब 1100 छात्रों का पंजीकरण है, जबकि 47 शिक्षकों की आवश्यकता के मुकाबले केवल 16 शिक्षक तैनात हैं। गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के विशेषज्ञ ही नहीं होने से अन्य विषयों के शिक्षक वैकल्पिक रूप से कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। हालांकि शहर के जीआईसी में पूर्व छात्र संघ के माध्यम से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की जाती है लेकिन यह व्यवस्था भी कारगर साबित नहीं होती है। प्रधानचार्य डॉ. दीपक सक्सेना ने बताया कि यह सच है कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है लेकिन सीमित संसाधनों में पढ़ाई प्रभावित न हो, यही प्रयास रहता है। (संवाद)
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ये पद हैं खाली
जीआईसी में हिंदी के छह, अंग्रेजी के पांच, विज्ञान का एक, कॉमर्स का एक, कला के दो, कंप्यूटर का एक पद खाली है। वहीं संस्कृत का एक, रसायन विज्ञान के दो, भौतिक विज्ञान के दो शिक्षकों सहित कुल 31 पद खाली है।
केस-दो
चकरनगर में हिंदी और गणित पढ़ाने के लिए कोई नहीं
चकरनगर। क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज सहसों में 20 शिक्षकों के सापेक्ष केवल चार शिक्षक तैनात हैं। संस्कृत शिक्षक अजय कुमार हिंदी की कक्षा लेते मिले। उन्होंने बताया कि विद्यालय में अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान और गृह विज्ञान के ही शिक्षक उपलब्ध हैं। हिंदी, गणित, सामाजिक विज्ञान, कृषि, कला और शारीरिक शिक्षा के शिक्षक नहीं हैं। प्रवक्ता के सभी 10 पद रिक्त हैं। पिछले वर्ष विद्यालय में 325 छात्र थे, जो इस वर्ष घटकर करीब 250 रह गए हैं। (संवाद)
ये पद खाली
जीआईसी सहसों में हिंदी के दो, गणित का एक, अग्रेजी का एक, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज विज्ञान के शिक्षकों का एक-एक पद खाली है। इसके साथ ही यहां इसके साथ ही यहां नागरिक शास्त्र, समाज शास्त्र और कला के शिक्षकों के पद भी खाली पड़े है।
केस-तीन
प्रधानाचार्य का विषय हिंदी, पढ़ा रहीं विज्ञान
जसवंतनगर। नगर में स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। वर्ष 1994 में स्थापित इस विद्यालय में कक्षा छह से 12 तक 677 छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें 470 छात्राएं विज्ञान वर्ग की हैं, लेकिन इंटरमीडिएट में जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित और अंग्रेजी के विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। वर्ष 2018 से लगातार शिक्षकों की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। विद्यालय में मात्र नौ शिक्षक कार्यरत हैं। प्रधानाचार्य प्रज्ञा सिंह ने बताया कि वह हिंदी की शिक्षिका हैं। मजबूरी में विज्ञान विषय के कोई भी शिक्षक न होने की वजह से खुद कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। कई बार विभाग को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। (संवाद)
ये पद हैं खाली
जीजीआईसी जसवंतनगर में भी हिंदी, गणित, अंग्रेजी के दो-दो पद खाली हैं। यहां भी भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान सहित पांच विषयों के एक-एक शिक्षकों के पद खाली हैं।
केस-चार
उदी में 285 छात्राओं के लिए पांच शिक्षक
उदी। उदी के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की तस्वीर भी अलग नहीं है। यहां करीब 285 छात्राओं की पढ़ाई केवल पांच शिक्षकों के भरोसे चल रही है। अंग्रेजी को छोड़कर किसी भी विषय का प्रवक्ता तैनात नहीं है। हाईस्कूल के शिक्षक इंटरमीडिएट की कक्षाएं लेने को विवश हैं। विज्ञान, गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, हिंदी, संस्कृत और गृह विज्ञान सहित अधिकांश विषयों के पद रिक्त हैं। प्रधानाचार्य सुनीता कुशवाहा का कहना है कि सीमित स्टाफ के बावजूद सभी कक्षाओं का संचालन कराया जा रहा है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौती बन गया है। (संवाद)
ये पद हैं खाली
जीजीआईसी उदी में हिंदी, अंग्रेजी, कला, गणित और विज्ञान के शिक्षकों का एक-एक पद रिक्त है। इसके साथ ही यहां 12वीं की भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान पढ़ाने के लिए भी शिक्षक के पद खाली पड़े है।
टॉप-10 से बाहर रहे सभी राजकीय कॉलेज
इटावा। शिक्षकों की कमी का असर बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वर्ष 2025-26 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में जिले के किसी भी राजकीय इंटर कॉलेज का छात्र-छात्रा जिला मेरिट की टॉप-10 सूची में जगह नहीं बना सका। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि विषय विशेषज्ञों की कमी के कारण विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित होती है। कई विद्यालयों में गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों की पढ़ाई नियमित नहीं हो पा रही है। ऐसे में मेधावी छात्र भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षाविद अरविंद दुबे का कहना है कि यदि समय रहते रिक्त पद नहीं भरे गए तो आने वाले वर्षों में भी राजकीय विद्यालयों के परिणाम प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। (संवाद)
वर्जन
शासन को सहायक शिक्षक और प्रवक्ताओं की कमी को दूर करने के लिए पत्राचार किया है। इसके साथ ही डीएम के माध्यम से भी पत्राचार करवाया गया है। उम्मीद है कि इस बार शिक्षकाें की कमी की समस्या दूर हो जाएगी और इसी माह के अंत तक जिले के राजकीय कॉलेजों में कुछ शिक्षकों की तैनाती भी हो जाएगी।
-अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस
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जिले के 21 राजकीय कॉलेजों में स्वीकृत 317 पदों के सापेक्ष महज 125 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 192 पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इन विद्यालयों में लगभग आठ हजार छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे है। शिक्षकों की कमी का सीधा असर इन छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी भी अधूरी रह जा रही है। शिक्षकों की कमी का असर अब प्रवेश पर भी दिखने लगा है। कई विद्यालयों में छात्र संख्या लगातार घट रही है। अभिभावकों का कहना है कि जब विषय विशेषज्ञ ही उपलब्ध नहीं हैं तो सरकारी विद्यालयों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित कैसे होगा।
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जीआईसी इटावा में 11 सौ छात्रों को पढ़ा रहे सिर्फ 16 शिक्षक
इटावा। शहर के राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां करीब 1100 छात्रों का पंजीकरण है, जबकि 47 शिक्षकों की आवश्यकता के मुकाबले केवल 16 शिक्षक तैनात हैं। गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के विशेषज्ञ ही नहीं होने से अन्य विषयों के शिक्षक वैकल्पिक रूप से कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। हालांकि शहर के जीआईसी में पूर्व छात्र संघ के माध्यम से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की जाती है लेकिन यह व्यवस्था भी कारगर साबित नहीं होती है। प्रधानचार्य डॉ. दीपक सक्सेना ने बताया कि यह सच है कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है लेकिन सीमित संसाधनों में पढ़ाई प्रभावित न हो, यही प्रयास रहता है। (संवाद)
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जीआईसी में हिंदी के छह, अंग्रेजी के पांच, विज्ञान का एक, कॉमर्स का एक, कला के दो, कंप्यूटर का एक पद खाली है। वहीं संस्कृत का एक, रसायन विज्ञान के दो, भौतिक विज्ञान के दो शिक्षकों सहित कुल 31 पद खाली है।
केस-दो
चकरनगर में हिंदी और गणित पढ़ाने के लिए कोई नहीं
चकरनगर। क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज सहसों में 20 शिक्षकों के सापेक्ष केवल चार शिक्षक तैनात हैं। संस्कृत शिक्षक अजय कुमार हिंदी की कक्षा लेते मिले। उन्होंने बताया कि विद्यालय में अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान और गृह विज्ञान के ही शिक्षक उपलब्ध हैं। हिंदी, गणित, सामाजिक विज्ञान, कृषि, कला और शारीरिक शिक्षा के शिक्षक नहीं हैं। प्रवक्ता के सभी 10 पद रिक्त हैं। पिछले वर्ष विद्यालय में 325 छात्र थे, जो इस वर्ष घटकर करीब 250 रह गए हैं। (संवाद)
ये पद खाली
जीआईसी सहसों में हिंदी के दो, गणित का एक, अग्रेजी का एक, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज विज्ञान के शिक्षकों का एक-एक पद खाली है। इसके साथ ही यहां इसके साथ ही यहां नागरिक शास्त्र, समाज शास्त्र और कला के शिक्षकों के पद भी खाली पड़े है।
केस-तीन
प्रधानाचार्य का विषय हिंदी, पढ़ा रहीं विज्ञान
जसवंतनगर। नगर में स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। वर्ष 1994 में स्थापित इस विद्यालय में कक्षा छह से 12 तक 677 छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें 470 छात्राएं विज्ञान वर्ग की हैं, लेकिन इंटरमीडिएट में जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित और अंग्रेजी के विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। वर्ष 2018 से लगातार शिक्षकों की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। विद्यालय में मात्र नौ शिक्षक कार्यरत हैं। प्रधानाचार्य प्रज्ञा सिंह ने बताया कि वह हिंदी की शिक्षिका हैं। मजबूरी में विज्ञान विषय के कोई भी शिक्षक न होने की वजह से खुद कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। कई बार विभाग को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। (संवाद)
ये पद हैं खाली
जीजीआईसी जसवंतनगर में भी हिंदी, गणित, अंग्रेजी के दो-दो पद खाली हैं। यहां भी भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान सहित पांच विषयों के एक-एक शिक्षकों के पद खाली हैं।
केस-चार
उदी में 285 छात्राओं के लिए पांच शिक्षक
उदी। उदी के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की तस्वीर भी अलग नहीं है। यहां करीब 285 छात्राओं की पढ़ाई केवल पांच शिक्षकों के भरोसे चल रही है। अंग्रेजी को छोड़कर किसी भी विषय का प्रवक्ता तैनात नहीं है। हाईस्कूल के शिक्षक इंटरमीडिएट की कक्षाएं लेने को विवश हैं। विज्ञान, गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, हिंदी, संस्कृत और गृह विज्ञान सहित अधिकांश विषयों के पद रिक्त हैं। प्रधानाचार्य सुनीता कुशवाहा का कहना है कि सीमित स्टाफ के बावजूद सभी कक्षाओं का संचालन कराया जा रहा है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौती बन गया है। (संवाद)
ये पद हैं खाली
जीजीआईसी उदी में हिंदी, अंग्रेजी, कला, गणित और विज्ञान के शिक्षकों का एक-एक पद रिक्त है। इसके साथ ही यहां 12वीं की भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान पढ़ाने के लिए भी शिक्षक के पद खाली पड़े है।
टॉप-10 से बाहर रहे सभी राजकीय कॉलेज
इटावा। शिक्षकों की कमी का असर बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वर्ष 2025-26 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में जिले के किसी भी राजकीय इंटर कॉलेज का छात्र-छात्रा जिला मेरिट की टॉप-10 सूची में जगह नहीं बना सका। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि विषय विशेषज्ञों की कमी के कारण विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित होती है। कई विद्यालयों में गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों की पढ़ाई नियमित नहीं हो पा रही है। ऐसे में मेधावी छात्र भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षाविद अरविंद दुबे का कहना है कि यदि समय रहते रिक्त पद नहीं भरे गए तो आने वाले वर्षों में भी राजकीय विद्यालयों के परिणाम प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। (संवाद)
वर्जन
शासन को सहायक शिक्षक और प्रवक्ताओं की कमी को दूर करने के लिए पत्राचार किया है। इसके साथ ही डीएम के माध्यम से भी पत्राचार करवाया गया है। उम्मीद है कि इस बार शिक्षकाें की कमी की समस्या दूर हो जाएगी और इसी माह के अंत तक जिले के राजकीय कॉलेजों में कुछ शिक्षकों की तैनाती भी हो जाएगी।
-अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस