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Etawah News: अस्तित्व खो रहे जीवन रेखा कहे जाने वाले ऐतिहासिक कुएं

Tue, 07 Jul 2026 11:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 11:03 PM IST
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Historic wells, known as lifelines, are losing their existence.
बकेवर। आधुनिकता और बढ़ते शहरीकरण की दौड़ में बकेवर कस्बे के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की ऐतिहासिक पहचान रहे पौराणिक कुएं और पारंपरिक जलस्रोत धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। कभी क्षेत्र की जीवनरेखा, धार्मिक आस्था के केंद्र और जल संरक्षण के प्रमुख साधन रहे यह कुएं आज उपेक्षा, अतिक्रमण और गंदगी से पटे हुए हैं।
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बकेवर कस्बे में पांच प्राचीन कुएं ऐसे हैं, जो सालों से रखरखाव के अभाव में या तो मलबे में दब गए हैं या अतिक्रमण की चपेट में आकर अपनी पहचान खो चुके हैं। कई कुओं पर झाड़ियां उग आई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर उन्हें कूड़ा डालने का स्थल बना दिया गया है। बकेवर के औरैया रोड स्थित परमहंस मंदिर के सामने, मगहई तालाब के सामने, पटेल नगर, गांधी नगर सहित आसपास स्थित कई कुएं कभी पेयजल का प्रमुख स्रोत थे। इन कुओं का निर्माण वर्षों पहले राजाओं, जमींदारों और समाजसेवियों ने कराया था। धार्मिक अनुष्ठानों, विवाह संस्कारों और पर्व-त्योहारों में इन जलस्रोतों का विशेष महत्व रहता था। गर्मी के दिनों में भी इनका जल लोगों की प्यास बुझाता था। हैंडपंप, नलकूप और पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति व्यवस्था के विस्तार के बाद इन कुओं की उपयोगिता कम होती गई। देखरेख के अभाव में अधिकांश कुएं मिट्टी और मलबे से पट गए, जबकि कई पर कब्जे होने लगे। इससे न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर विलुप्त हो रही है, बल्कि पारंपरिक जल संरक्षण की व्यवस्था भी समाप्त होती चली गई।
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जनता काॅलेज बकेवर के भूमि एवं जल संरक्षण विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके राजपूत ने बताया कि यदि इन प्राचीन कुओं और जलस्रोतों का वैज्ञानिक ढंग से पुनर्जीवित कराया जाए तो भूजल स्तर में सुधार के साथ वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत भी संरक्षित रह सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की जल संरक्षण और अमृत सरोवर जैसी योजनाओं में ऐसे पौराणिक जलस्रोतों को भी शामिल कर उनका जीर्णोद्धार कराया जाना चाहिए।
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नवादा गांव के ओमनारायण त्रिपाठी, शाला के विजय चतुर्वेदी, रामनरेश चतुर्वेदी, गोविंद चतुर्वेदी आदि ने प्रशासन से मांग की है कि बकेवर कस्बे और आसपास के गांवों में स्थित सभी प्राचीन कुओं एवं जलस्रोतों का सर्वे कराया जाए। अतिक्रमण हटाकर उनकी साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और संरक्षण की योजना बनाई जाए।
वर्जन
कुओं को लेकर कुछ ग्रामीणों ने जीर्णोद्धार की मांग की है। वह इस पर विचार विमर्श कर रहे हैं। उनकी कोशिश होगी कि ऐतिहासिक कुंओं का अस्तित्व बचा रहे।
श्याम बचन सरोज, ईओ नगर पंचायत
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