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आयात शुल्क घटाकर छह प्रतिशत किया जाए : आकाशदीप
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इटावा। आगामी बजट में सर्राफा कारोबारियों की मुख्य मांगें सोने-चांदी पर आयात शुल्क को और कम करने, तस्करी रोकने के लिए कड़े नियम लागू करने और डिजिटल गोल्ड को बढ़ावा देने पर केंद्रित होना चाहिए। यह बात शुक्रवार को विज्ञप्ति जारी करके इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रदेश सह प्रभारी आकाशदीप जैन ने कही। उन्होंने कहा कि ऊंची कीमतों और अवैध व्यापार से प्रभावित उद्योग को नीतिगत बदलावों से राहत की उम्मीद है। आयात शुल्क में कटौती और तस्करी पर नियंत्रण सरकार से मुख्य मांग आयात शुल्क में कटौती की है।
2024 में 15 फीसदी से घटाकर छह फीसदी किए जाने के बाद, उद्योग अब और कम शुल्क की उम्मीद कर रहा है। सोने की रिकॉर्ड कीमतों के कारण बढ़ रही तस्करी को रोकने के लिए कड़े उपाय और छह फीसदी शुल्क संरचना में बदलाव की मांग की जा रही है। डोरे पर ड्यूटी समानता और डिजिटल गोल्ड को बढ़ावा घरेलू रिफाइनरियों को बढ़ावा देने के लिए सोने-चांदी के डोरे (कच्ची धातु) और परिष्कृत बुलियन के बीच शुल्क अंतर को तर्कसंगत बनाने की मांग है।
डिजिटल गोल्ड को बढ़ावा देने और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं को पुनर्जीवित करने की मांग की गई है, ताकि भौतिक सोने की मांग कम हो और निवेश औपचारिक रूप से बढ़े। आभूषण निर्यात में प्रोत्साहन और भविष्य की राह उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निर्यात-उन्मुख नीतियों, जैसे कि ड्यूटी में और अधिक रियायतें, की भी मांग है। इन मांगों का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में सर्राफा व्यापार को सरल बनाना, अवैध कारोबार को कम करना और भारत को एक प्रमुख रिफाइनिंग हब के रूप में मजबूती प्रदान करना है।
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2024 में 15 फीसदी से घटाकर छह फीसदी किए जाने के बाद, उद्योग अब और कम शुल्क की उम्मीद कर रहा है। सोने की रिकॉर्ड कीमतों के कारण बढ़ रही तस्करी को रोकने के लिए कड़े उपाय और छह फीसदी शुल्क संरचना में बदलाव की मांग की जा रही है। डोरे पर ड्यूटी समानता और डिजिटल गोल्ड को बढ़ावा घरेलू रिफाइनरियों को बढ़ावा देने के लिए सोने-चांदी के डोरे (कच्ची धातु) और परिष्कृत बुलियन के बीच शुल्क अंतर को तर्कसंगत बनाने की मांग है।
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डिजिटल गोल्ड को बढ़ावा देने और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं को पुनर्जीवित करने की मांग की गई है, ताकि भौतिक सोने की मांग कम हो और निवेश औपचारिक रूप से बढ़े। आभूषण निर्यात में प्रोत्साहन और भविष्य की राह उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निर्यात-उन्मुख नीतियों, जैसे कि ड्यूटी में और अधिक रियायतें, की भी मांग है। इन मांगों का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में सर्राफा व्यापार को सरल बनाना, अवैध कारोबार को कम करना और भारत को एक प्रमुख रिफाइनिंग हब के रूप में मजबूती प्रदान करना है।
