फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Paddy transplantation stalled; reliance on private resources.

Etawah News: थमी धान की रोपाई, निजी संसाधनों का सहारे

Sat, 18 Jul 2026 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 11:36 PM IST
विज्ञापन
Paddy transplantation stalled; reliance on private resources.
फोटो 22:::-------------------------
विज्ञापन

10 दिन से बारिश न होने से निजी नलकूप और नहरों के सहारे हो रही सिंचाई



धान की रोपाई की रफ्तार घटी, प्रति हेक्टेयर 10 से 12 हजार तक बढ़ी लागत



संवाद न्यूज एजेंसी



इटावा। जिले में पिछले 10 दिनों से बारिश नहीं होने का असर अब खरीफ की मुख्य फसल धान पर साफ दिखाई देने लगा है। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से धान की रोपाई की रफ्तार थम गई है। किसान निजी नलकूपों और नहरों के सहारे किसी तरह खेतों तक पानी पहुंचा रहे हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। जिन किसानों ने रोपाई कर दी है, उनकी फसल भी पानी के अभाव में पीली पड़ने लगी है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
विज्ञापन




कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में इस वर्ष 66,196 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि बारिश की कमी के कारण अब तक केवल 50 से 55 प्रतिशत क्षेत्र में ही रोपाई हो सकी है। पिछले वर्ष समय पर मानसून आने से इसी अवधि तक करीब 80 प्रतिशत रोपाई पूरी हो चुकी थी। ऐसे में इस बार रोपाई का रकबा और गति दोनों प्रभावित हुए हैं। आठ जुलाई को जिले में हुई तेज बारिश के बाद अब तक अच्छी वर्षा नहीं हुई है। इसके बाद हरदिन तेज धूप और उमस के कारण खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। धान की फसल इस समय अपने महत्वपूर्ण चरण में है लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसान चिंतित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन




किसान अरुण कुमार और पंकज दुबे ने बताया कि नर्सरी तो तैयार है लेकिन खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से रोपाई नहीं हो पा रही है। वहीं जिन किसानों ने निजी नलकूपों के सहारे किसी तरह रोपाई पूरी कर ली है, उनके खेतों में भी पानी की कमी के कारण धान के पौधे पीले पड़ने लगे हैं। उनका कहना है कि यदि कुछ दिन और बारिश नहीं हुई तो फसल सूखने का खतरा बढ़ जाएगा और पैदावार भी प्रभावित होगी।




कुछ इस प्रकार बढ़ रहा खर्चा



बारिश नहीं होने से सिंचाई के लिए किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है। डीजल, बिजली और मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च होने से धान की खेती महंगी हो गई है। किसानों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में एक हेक्टेयर धान की रोपाई 30 से 32 हजार रुपये खर्च आता है लेकिन बार-बार सिंचाई कराने और पानी की व्यवस्था करने से लागत में 10 से 12 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक की बढ़ोतरी हो रही है।



विशेषज्ञ की बात



कृषि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार का कहना है कि धान की फसल के लिए इस समय पर्याप्त पानी बेहद जरूरी है। यदि अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो रोपाई का रकबा और घट सकता है तथा उत्पादन पर भी सीधा असर पड़ेगा। किसान अब अच्छी बारिश की आस लगाए हुए हैं, क्योंकि समय पर वर्षा ही धान की फसल को नुकसान से बचा सकती है और बढ़ती खेती की लागत पर भी लगाम लगा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed