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Etawah News: 80 गांवों के लोगों को हमेशा बना रहता मगरमच्छ से खतरा
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फोटो: 32::: चंबल नदी के बीच टापू पर बैठे मगरमच्छ व घड़ियाल। स्रोत सेंचुरी विभाग
चंबल ही है दैनिक जीवन की मुख्य धारा, पशुओं को नहलाना, पानी पिलाना है रोज की मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। चंबल सेंचुरी क्षेत्र में मगरमच्छों के बढ़ते आतंक से नदी किनारे बसे करीब 80 गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। मुरेंग से पचनद तक फैले लगभग 84 किलोमीटर लंबे चंबल नदी क्षेत्र में रहने वाली एक लाख से अधिक आबादी डर के साए में जीने को मजबूर है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी उनके दैनिक जीवन का प्रमुख आधार है, लेकिन अब वही नदी जानलेवा साबित हो रही है। ग्रामीण प्रतिदिन अपने मवेशियों को पानी पिलाने, नहलाने, खेतों के लिए पानी भरने और घरेलू कार्यों के लिए नदी किनारे जाते हैं। इसी दौरान मगरमच्छ लोगों और पशुओं पर हमला कर देते हैं। बीते कुछ वर्षों में 50 से अधिक ऐसी ही घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही कई घटनाओं में मगरमच्छ ने मवेशियों को भी मार दिया है। ग्रामीणों के अनुसार हर साल मगरमच्छों के प्रजनन यानी नेस्टिंग पीरियड में हमलों की संख्या बढ़ जाती है। इस समय मगरमच्छ अधिक आक्रामक हो जाते हैं और नदी के किनारों पर आने-जाने वालों पर हमला कर देते हैं। इसके बावजूद सेंचुरी विभाग की ओर से केवल सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है, लेकिन सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जाते हैं। स्थानीय लोगों ने संवेदनशील घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, सुरक्षा घेराबंदी कराने, निगरानी बढ़ाने और मगरमच्छों की संख्या नियंत्रित करने की मांग सेंचुरी से की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में हादसे बढ़ते जाएंगे।
वर्जन
मगरमच्छ के नेस्टिंग के समय लोगों को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। पानी के पास जाना खतरे से खाली नहीं रहता, क्योंकि इस दौरान मगरमच्छ बेहद आक्रामक हो जाते हैं। इसको लेकर नेस्टिंग समय के पहले से ही लोगों को विभाग सर्तक करता रहता है।
कोटेश त्यागी. रेजर सेंचुरी
.....................................
पिछले सात वर्षों में हुईं प्रमुख घटनाएं
-17 मई 2026 को जानवरों कों पानी पिलाते समय धर्मपुरा के युवक पर मगरमच्छ ने हमला कर घायल कर दिया।
-26 अप्रैल 2025 को हरपुरा गांव में नहाते समय रामवीर निषाद को मगरमच्छ नदी में खींच ले गया, इसके बाद शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।
-22 मई 2024 को ख्यालीपुरा गांव में पानी भरने गए जगत नारायण पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जैसे तैसे युवक की जान बची।
-28 अप्रैल 2022 को ख्यालीपुरा निवासी 14 वर्षीय मुस्कान को मगरमच्छ ने नदी में खींच लिया, दो घंटे बाद शव मिला।
-14 सितंबर 2020 को 15 वर्षीय अनुज नहाते समय मगरमच्छ का शिकार बना, शव अगले दिन बरामद हुआ।
-28 जुलाई 2023 को धर्मपुरा में एक वर्ष के भैंस के बच्चे को मगरमच्छ खींच ले गया।
-आठ अप्रैल 2025 को कोला गांव में पशुपालक की एक लाख की जमुनापारी बकरी को मगरमच्छ खींच ले गया।
चंबल ही है दैनिक जीवन की मुख्य धारा, पशुओं को नहलाना, पानी पिलाना है रोज की मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। चंबल सेंचुरी क्षेत्र में मगरमच्छों के बढ़ते आतंक से नदी किनारे बसे करीब 80 गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। मुरेंग से पचनद तक फैले लगभग 84 किलोमीटर लंबे चंबल नदी क्षेत्र में रहने वाली एक लाख से अधिक आबादी डर के साए में जीने को मजबूर है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी उनके दैनिक जीवन का प्रमुख आधार है, लेकिन अब वही नदी जानलेवा साबित हो रही है। ग्रामीण प्रतिदिन अपने मवेशियों को पानी पिलाने, नहलाने, खेतों के लिए पानी भरने और घरेलू कार्यों के लिए नदी किनारे जाते हैं। इसी दौरान मगरमच्छ लोगों और पशुओं पर हमला कर देते हैं। बीते कुछ वर्षों में 50 से अधिक ऐसी ही घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही कई घटनाओं में मगरमच्छ ने मवेशियों को भी मार दिया है। ग्रामीणों के अनुसार हर साल मगरमच्छों के प्रजनन यानी नेस्टिंग पीरियड में हमलों की संख्या बढ़ जाती है। इस समय मगरमच्छ अधिक आक्रामक हो जाते हैं और नदी के किनारों पर आने-जाने वालों पर हमला कर देते हैं। इसके बावजूद सेंचुरी विभाग की ओर से केवल सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है, लेकिन सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जाते हैं। स्थानीय लोगों ने संवेदनशील घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, सुरक्षा घेराबंदी कराने, निगरानी बढ़ाने और मगरमच्छों की संख्या नियंत्रित करने की मांग सेंचुरी से की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में हादसे बढ़ते जाएंगे।
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वर्जन
मगरमच्छ के नेस्टिंग के समय लोगों को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। पानी के पास जाना खतरे से खाली नहीं रहता, क्योंकि इस दौरान मगरमच्छ बेहद आक्रामक हो जाते हैं। इसको लेकर नेस्टिंग समय के पहले से ही लोगों को विभाग सर्तक करता रहता है।
कोटेश त्यागी. रेजर सेंचुरी
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पिछले सात वर्षों में हुईं प्रमुख घटनाएं
-17 मई 2026 को जानवरों कों पानी पिलाते समय धर्मपुरा के युवक पर मगरमच्छ ने हमला कर घायल कर दिया।
-26 अप्रैल 2025 को हरपुरा गांव में नहाते समय रामवीर निषाद को मगरमच्छ नदी में खींच ले गया, इसके बाद शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।
-22 मई 2024 को ख्यालीपुरा गांव में पानी भरने गए जगत नारायण पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जैसे तैसे युवक की जान बची।
-28 अप्रैल 2022 को ख्यालीपुरा निवासी 14 वर्षीय मुस्कान को मगरमच्छ ने नदी में खींच लिया, दो घंटे बाद शव मिला।
-14 सितंबर 2020 को 15 वर्षीय अनुज नहाते समय मगरमच्छ का शिकार बना, शव अगले दिन बरामद हुआ।
-28 जुलाई 2023 को धर्मपुरा में एक वर्ष के भैंस के बच्चे को मगरमच्छ खींच ले गया।
-आठ अप्रैल 2025 को कोला गांव में पशुपालक की एक लाख की जमुनापारी बकरी को मगरमच्छ खींच ले गया।