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Etawah News: सात का आलू, थाली में 20 का, बिचौलियों की चांदी
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इटावा। आलू की कीमतों में गिरावट से किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है। थोक में 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला आलू फुटकर में 18 से 20 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है। थोक और फुटकर कीमतों में तीन गुने के अंतर से बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आम लोग महंगे में खरीद रहे हैं, जबकि किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है।
जिले में पिछले वर्ष करीब 22 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी। जिले के 58 कोल्ड स्टोरों की कुल भंडारण क्षमता 6,80,370 मीट्रिक टन है। इस सीजन में 6,13,696 मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया। यह कुल क्षमता का 90.2 फीसदी है। अब तक सिर्फ 52,777 मीट्रिक टन आलू की निकासी हुई है। यह कुल भंडारण का 8.6 फीसदी है। करीब 5,60,919 मीट्रिक टन आलू अभी भी कोल्ड स्टोरों में डंप है।
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आलू की निकासी बहुत धीमी है। सामान्य तौर पर जुलाई तक 13 से 15 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरों से निकल जाता था। पिछले वर्ष भी इसी अवधि तक 12 से 13 फीसदी निकासी हो चुकी थी। इस बार बाजार में कम कीमत मिलने के कारण किसान आलू निकालने से बच रहे हैं।
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किसान अपना आलू सीधे उपभोक्ता को नहीं बेच पाते हैं। अधिकांश किसान कोल्ड स्टोर परिसर या मंडी में ही व्यापारियों को आलू बेच देते हैं। इसके बाद यही आलू कई हाथों से होकर फुटकर बाजार तक पहुंचता है। परिवहन और अन्य खर्च जोड़ने के बाद भी व्यापारियों का अनुमानित मार्जिन दोगुना तक पहुंच रहा है। व्यापारियों का स्टॉक ऊंचे दामों पर बिक रहा है।
आलू का कम भाव किसानों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है। पिछले वर्ष कोल्ड स्टोर का किराया 270 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस साल बढ़कर 280 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। परिवहन, मजदूरी और अन्य खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन मंडी में उन्हें लागत के अनुरूप कीमत नहीं मिल रही।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार का मानना है कि यदि किसान को बेहतर मूल्य दिलाने और विपणन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर अगले सीजन में आलू के रकबे पर भी पड़ सकता है। इस बार आलू की स्थितियां अच्छी नजर नहीं आ रही है। आलू की कम निकासी इस बात का प्रमाण है कि आने वाले दिनों में आलू की कीमतें किसानों को और परेशान कर सकती है।
आलू किसान अनमोल चंद्र का कहना है कि इस बार आलू ने तो किसानों को परेशान ही कर दिया है। आलू की कीमतों के कारण शुरूआती दिनों में ही उन्होंने अपनी उपज बेच दी थी।
नौगवां निवासी किसान राजेश यादव ने बताया कि इस बार शुरू से ही आलू की कीमतों के लिए किसानों को जूझना पड़ रहा है। कीमतें बढ़ने की उम्मीद भी अब टूटती जा रही है।
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जिले में पिछले वर्ष करीब 22 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी। जिले के 58 कोल्ड स्टोरों की कुल भंडारण क्षमता 6,80,370 मीट्रिक टन है। इस सीजन में 6,13,696 मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया। यह कुल क्षमता का 90.2 फीसदी है। अब तक सिर्फ 52,777 मीट्रिक टन आलू की निकासी हुई है। यह कुल भंडारण का 8.6 फीसदी है। करीब 5,60,919 मीट्रिक टन आलू अभी भी कोल्ड स्टोरों में डंप है।
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पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आलू की निकासी बहुत धीमी है। सामान्य तौर पर जुलाई तक 13 से 15 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरों से निकल जाता था। पिछले वर्ष भी इसी अवधि तक 12 से 13 फीसदी निकासी हो चुकी थी। इस बार बाजार में कम कीमत मिलने के कारण किसान आलू निकालने से बच रहे हैं।
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किसान अपना आलू सीधे उपभोक्ता को नहीं बेच पाते हैं। अधिकांश किसान कोल्ड स्टोर परिसर या मंडी में ही व्यापारियों को आलू बेच देते हैं। इसके बाद यही आलू कई हाथों से होकर फुटकर बाजार तक पहुंचता है। परिवहन और अन्य खर्च जोड़ने के बाद भी व्यापारियों का अनुमानित मार्जिन दोगुना तक पहुंच रहा है। व्यापारियों का स्टॉक ऊंचे दामों पर बिक रहा है।
आलू का कम भाव किसानों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है। पिछले वर्ष कोल्ड स्टोर का किराया 270 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस साल बढ़कर 280 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। परिवहन, मजदूरी और अन्य खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन मंडी में उन्हें लागत के अनुरूप कीमत नहीं मिल रही।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार का मानना है कि यदि किसान को बेहतर मूल्य दिलाने और विपणन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर अगले सीजन में आलू के रकबे पर भी पड़ सकता है। इस बार आलू की स्थितियां अच्छी नजर नहीं आ रही है। आलू की कम निकासी इस बात का प्रमाण है कि आने वाले दिनों में आलू की कीमतें किसानों को और परेशान कर सकती है।
आलू किसान अनमोल चंद्र का कहना है कि इस बार आलू ने तो किसानों को परेशान ही कर दिया है। आलू की कीमतों के कारण शुरूआती दिनों में ही उन्होंने अपनी उपज बेच दी थी।
नौगवां निवासी किसान राजेश यादव ने बताया कि इस बार शुरू से ही आलू की कीमतों के लिए किसानों को जूझना पड़ रहा है। कीमतें बढ़ने की उम्मीद भी अब टूटती जा रही है।