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Etawah News: राजीव की नौकरी सही, सात दिन में बकाया भुगतान के आदेश
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इटावा। नगर पालिका परिषद के लिपिक ने जून में चेयरमैन और ईओ पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर यमुना में कूदकर जान दे दी थी। इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में जांच की गई। जांच में लिपिक की नौकरी सही पाई गई। इसका संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने सात दिन में सभी बकाया भुगतान करने के आदेश चेयरमैन और ईओ को दिए हैं।
बता दें कि जून 2025 में नगर पालिका के लिपिक राजीव ने यमुना में कूदकर जान दे दी थी। लिपिक ने आरोप लगाया था कि उन्हें नौकरी से फर्जी तरीके से नौकरी करने और निकालने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे वह मानसिक रूप से परेशान थे। घटना के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में जांच कराई गई थी।
इसमें पता चला कि राजीव कुमार यादव को वर्ष 2000 में पालिका सेवा में लिया गया था और बाद में उन्हें वरिष्ठ लिपिक के पद पर समायोजित कर 2003 में स्थायी कर दिया गया। अभिलेखों में यह भी दर्ज है कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी। न ही उनके निधन के समय कोई जांच लंबित थी। इस आधार पर उनके सभी देयकों का भुगतान नियमानुसार किया जाने के आदेश सिटी मजिस्ट्रेट की टीम ने दिए थे। इस मामले का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कर्मचारी के खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई नहीं है तो उनके उनके भुगतान रोकना सही नहीं है। अधिशासी अधिकारी की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि सेवा पुस्तिका में किसी तरह की दंडात्मक प्रविष्टि नहीं है। भुगतान न होना लापरवाही को दर्शाता है।
आ आयोग ने ईओ नगर पालिका को निर्देश देते हुए कहा कि सात दिनों के भीतर सभी लंबित भुगतान राजीव यादव के आश्रित को किए जाएं। इस मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल 2026 को तय की गई है, जिसमें अनुपालन की समीक्षा होगी।
राजीव यादव की सेवा पुस्तिका में कोई भी दंडात्मक प्रविष्टि नहीं पाई गई है। उनकी नौकरी सही थी। ऐसे में मानवाधिकार आयोग ने सात दिन में सभी भुगतान करने के आदेश दिए हैं। उसके अनुपालन में कार्रवाई की जा रही है।
संतोष मिरा, ईओ नगर पालिका
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बता दें कि जून 2025 में नगर पालिका के लिपिक राजीव ने यमुना में कूदकर जान दे दी थी। लिपिक ने आरोप लगाया था कि उन्हें नौकरी से फर्जी तरीके से नौकरी करने और निकालने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे वह मानसिक रूप से परेशान थे। घटना के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में जांच कराई गई थी।
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इसमें पता चला कि राजीव कुमार यादव को वर्ष 2000 में पालिका सेवा में लिया गया था और बाद में उन्हें वरिष्ठ लिपिक के पद पर समायोजित कर 2003 में स्थायी कर दिया गया। अभिलेखों में यह भी दर्ज है कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी। न ही उनके निधन के समय कोई जांच लंबित थी। इस आधार पर उनके सभी देयकों का भुगतान नियमानुसार किया जाने के आदेश सिटी मजिस्ट्रेट की टीम ने दिए थे। इस मामले का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कर्मचारी के खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई नहीं है तो उनके उनके भुगतान रोकना सही नहीं है। अधिशासी अधिकारी की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि सेवा पुस्तिका में किसी तरह की दंडात्मक प्रविष्टि नहीं है। भुगतान न होना लापरवाही को दर्शाता है।
आ आयोग ने ईओ नगर पालिका को निर्देश देते हुए कहा कि सात दिनों के भीतर सभी लंबित भुगतान राजीव यादव के आश्रित को किए जाएं। इस मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल 2026 को तय की गई है, जिसमें अनुपालन की समीक्षा होगी।
राजीव यादव की सेवा पुस्तिका में कोई भी दंडात्मक प्रविष्टि नहीं पाई गई है। उनकी नौकरी सही थी। ऐसे में मानवाधिकार आयोग ने सात दिन में सभी भुगतान करने के आदेश दिए हैं। उसके अनुपालन में कार्रवाई की जा रही है।
संतोष मिरा, ईओ नगर पालिका