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Farrukhabad News: लाइसेंस नवीनीकरण के बिना चल रहे 20 निजी अस्पताल, एक सील
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 06 Apr 2026 01:02 AM IST
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फर्रुखाबाद। जिले में बीस से अधिक निजी अस्पताल एक वर्ष से अधिक समय से लाइसेंस का नवीनीकरण कराए बिना संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की कथित मिलीभगत से चल रहे इन अमानक अस्पतालों के खिलाफ जिलाधिकारी के निर्देश पर कार्रवाई शुरू हुई है। इसी क्रम में रविवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्वयं एक निजी नर्सिंगहोम को सील कर दिया।
शहर के मसेनी स्थित राधा वल्लभ नर्सिंगहोम के खिलाफ जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी। जिलाधिकारी के आदेश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने डिप्टी सीएमओ के साथ रविवार को छापा मारा। हालांकि, विभागीय कर्मचारियों द्वारा सूचना लीक होने के कारण नर्सिंगहोम में कोई मरीज, डॉक्टर या कर्मचारी नहीं मिला। सीएमओ ने बताया कि ताला खुलवाकर देखने पर बेड मिले, लेकिन कोई मौजूद नहीं था, जिसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने कहा कि अब जिले में कोई भी अवैध, अमानक या बिना नवीनीकरण कराया निजी अस्पताल नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन स्वयं अभियान चलाकर ऐसे अमानक अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
गौरतलब है कि जिले में कुल 180 से अधिक निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, जबकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सूची में 130 एमबीबीएस डॉक्टर हैं। आरोप है कि अधिकांश निजी अस्पताल संचालक किराये पर डॉक्टरों की डिग्री लगाकर पंजीकरण कराते हैं और फिर झोलाछापों से मरीजों का इलाज कराकर उनकी जान जोखिम में डालते हैं। गत वर्ष शासन ने पांच वर्ष के लिए नवीनीकरण का आदेश दिया था और मानक भी निर्धारित किए थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने अमानक अस्पतालों का नवीनीकरण नहीं किया, लेकिन उन्हें बंद भी नहीं कराया।
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शहर के मसेनी स्थित राधा वल्लभ नर्सिंगहोम के खिलाफ जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी। जिलाधिकारी के आदेश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने डिप्टी सीएमओ के साथ रविवार को छापा मारा। हालांकि, विभागीय कर्मचारियों द्वारा सूचना लीक होने के कारण नर्सिंगहोम में कोई मरीज, डॉक्टर या कर्मचारी नहीं मिला। सीएमओ ने बताया कि ताला खुलवाकर देखने पर बेड मिले, लेकिन कोई मौजूद नहीं था, जिसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने कहा कि अब जिले में कोई भी अवैध, अमानक या बिना नवीनीकरण कराया निजी अस्पताल नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन स्वयं अभियान चलाकर ऐसे अमानक अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
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गौरतलब है कि जिले में कुल 180 से अधिक निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, जबकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सूची में 130 एमबीबीएस डॉक्टर हैं। आरोप है कि अधिकांश निजी अस्पताल संचालक किराये पर डॉक्टरों की डिग्री लगाकर पंजीकरण कराते हैं और फिर झोलाछापों से मरीजों का इलाज कराकर उनकी जान जोखिम में डालते हैं। गत वर्ष शासन ने पांच वर्ष के लिए नवीनीकरण का आदेश दिया था और मानक भी निर्धारित किए थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने अमानक अस्पतालों का नवीनीकरण नहीं किया, लेकिन उन्हें बंद भी नहीं कराया।