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Farrukhabad News: मठिया देवी मंदिर में गूंजे मां चंद्रघंटा के जयकारे
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फोटो-25 रेलवे रोड स्थित मठिया देवा का भव्य सजा दरबार। संवाद
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फर्रुखाबाद। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन रेलवे रोड स्थित प्राचीन मठिया देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। सुबह मंदिर के कपाट खुलते ही घंटा-घड़ियालों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। भक्तों ने मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
नवरात्र के उपलक्ष्य में मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मां का स्वर्णिम आभा से युक्त भव्य शृंगार किया गया, वहीं धूप-दीप और नैवेद्य की सुगंध से परिसर महकता रहा। श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर जय माता दी के जयकारों के साथ दर्शन किए। मंदिर के पुजारी राजकिशोर शुक्ल ने बताया कि मठिया देवी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं, इसी कारण दूर-दराज से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं।
आचार्य डॉ. प्रदीप नारायण शुक्ल ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, जो साहस और वीरता का प्रतीक है। बताया कि मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों के कष्टों का निवारण होता है और मन में शांति का वास होता है। उनकी दिव्य शक्ति पापों का नाश कर साधक को निर्भय बनाती है।
अंग्रेज भी नहीं हटा सके थे प्रतिमा
रेलवे सड़क पर स्थित मठिया देवी मंदिर लगभग 200 वर्ष से अधिक पुराना और जागृत शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि ब्रिटिश काल में सड़क निर्माण के दौरान देवी की मूर्ति को अंग्रेज अफसरों ने हटाने का प्रयास किया था। वहां पर स्थित छत्ते से निकली बर्र ने अफसरों से लेकर श्रमिकों तक घायल कर दिया था। इसके बाद मूर्ति हटाने की हिम्मत किसी की नहीं हुई। कहते हैं कि मंदिर महाभारत काल में देवी द्रौपदी द्वारा स्थापित किया गया था।
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नवरात्र के उपलक्ष्य में मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मां का स्वर्णिम आभा से युक्त भव्य शृंगार किया गया, वहीं धूप-दीप और नैवेद्य की सुगंध से परिसर महकता रहा। श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर जय माता दी के जयकारों के साथ दर्शन किए। मंदिर के पुजारी राजकिशोर शुक्ल ने बताया कि मठिया देवी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं, इसी कारण दूर-दराज से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं।
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आचार्य डॉ. प्रदीप नारायण शुक्ल ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, जो साहस और वीरता का प्रतीक है। बताया कि मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों के कष्टों का निवारण होता है और मन में शांति का वास होता है। उनकी दिव्य शक्ति पापों का नाश कर साधक को निर्भय बनाती है।
अंग्रेज भी नहीं हटा सके थे प्रतिमा
रेलवे सड़क पर स्थित मठिया देवी मंदिर लगभग 200 वर्ष से अधिक पुराना और जागृत शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि ब्रिटिश काल में सड़क निर्माण के दौरान देवी की मूर्ति को अंग्रेज अफसरों ने हटाने का प्रयास किया था। वहां पर स्थित छत्ते से निकली बर्र ने अफसरों से लेकर श्रमिकों तक घायल कर दिया था। इसके बाद मूर्ति हटाने की हिम्मत किसी की नहीं हुई। कहते हैं कि मंदिर महाभारत काल में देवी द्रौपदी द्वारा स्थापित किया गया था।

फोटो-25 रेलवे रोड स्थित मठिया देवा का भव्य सजा दरबार। संवाद