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Farrukhabad News: उपभोक्ता आयोग ने दिया बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sun, 22 Mar 2026 12:46 AM IST
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फर्रुखाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमित भैंस की मृत्यु के बाद दावा न देने के मामले में यूनाइटेड इंडिया बीमा कंपनी को परिवादी के पक्ष में भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 30 हजार रुपये की बीमा राशि 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित देने तथा 5 हजार रुपये मानसिक व आर्थिक क्षति और 3 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करने के आदेश दिए हैं।
तहसील कायमगंज के गांव फतेहपुर परौली निवासी उमाशंकर ने एक अप्रैल 2013 को शाखा प्रबंधक यूनाइटेड इंडिया बीमा कंपनी, मैनपुरी तथा उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक, कायमगंज के खिलाफ परिवाद दायर किया था। इसमें बताया था कि उसने 12 जनवरी 2011 को बैंक से भैंस पालन के लिए 90 हजार रुपये का ऋण लिया था। ऋण की धनराशि से उसने तीन भैंसें खरीदीं। इनमें से दो भैंसों का बीमा कराया था।
बताया कि टैग नंबर 87887 वाली भैंस की 6 सितंबर 2011 को मृत्यु हो गई थी। पशु चिकित्साधिकारी ने अगले दिन पोस्टमॉर्टम कर रिपोर्ट भी जारी की, लेकिन सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद बीमा कंपनी ने दावा का भुगतान नहीं किया।
आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्या नाजरीन बेगम और सदस्य विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर पाया कि बीमा कंपनी की ओर से दावा न देना, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 45 दिन के भीतर निर्धारित धनराशि का भुगतान करे, अन्यथा देय राशि पर 10 प्रतिशत ब्याज देना होगा। वहीं बैंक के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित न होने पर परिवाद निरस्त कर दिया गया।
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बताया कि टैग नंबर 87887 वाली भैंस की 6 सितंबर 2011 को मृत्यु हो गई थी। पशु चिकित्साधिकारी ने अगले दिन पोस्टमॉर्टम कर रिपोर्ट भी जारी की, लेकिन सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद बीमा कंपनी ने दावा का भुगतान नहीं किया।
आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्या नाजरीन बेगम और सदस्य विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर पाया कि बीमा कंपनी की ओर से दावा न देना, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 45 दिन के भीतर निर्धारित धनराशि का भुगतान करे, अन्यथा देय राशि पर 10 प्रतिशत ब्याज देना होगा। वहीं बैंक के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित न होने पर परिवाद निरस्त कर दिया गया।