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Farrukhabad News: बाढ़ से गन्ने की फसल चौपट, बीज के दाम दोगुने
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:40 AM IST
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फोटो-13, खेत में बीज के लिए छोड़ी गई गन्ने की फसल। संवाद
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कायमगंज। तराई क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने गन्ना किसानों की कमर तोड़ दी। बाढ़ से करीब 2500 हेक्टेयर भूमि में खड़ी गन्ने की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। इसका सीधा असर चीनी मिल की पेराई पर पड़ा। मिल को इस सत्र में 16 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य मिला था, लेकिन बाढ़ और गन्ने की कमी के चलते मात्र 7.96 लाख क्विंटल गन्ने की ही पेराई हो सकी।
गन्ने की भारी कमी के कारण किसानों को बोआई के लिए बीज जुटाने में परेशानी उठानी पड़ी। जिन किसानों के पास गन्ना बचा, उन्होंने उसे बीज के रूप में बेचने के लिए रोक लिया। इससे गन्ना बीज के दाम दोगुने हो गए। किसानों का कहना है कि जहां पहले एक बीघा गन्ने का बीज करीब 25 हजार रुपये में मिल जाता था, वहीं इस बार कमी के चलते 50 हजार रुपये प्रति बीघा तक बिक रहा है।
चीनी मिल के सीसीओ प्रमोद यादव ने बताया कि पिछले वर्ष 4500 हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई थी, जो इस वर्ष घटकर 4075 हेक्टेयर रह गई। इसमें भी करीब 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ से फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। परिणामस्वरूप केवल 1575 हेक्टेयर क्षेत्र में ही गन्ने की फसल बच सकी। साथ ही क्रेशर और कोल्हू पर गुड़ बनाने के लिए भी गन्ने की खरीद हुई, जिससे मिल को और कम आपूर्ति मिल सकी। जीएम रमेश सिंह का कहना है कि यदि गन्ने की आपूर्ति सामान्य रहती, तो पेराई का लक्ष्य आसानी से पूरा किया जा सकता था।
बाढ़ में 3300 क्विंटल गन्ना हो गया बर्बाद
तराई के गांव धर्मपुर निवासी किसान नाजिम खां ने बताया कि वे हर साल चीनी मिल को करीब 4500 क्विंटल गन्ना सप्लाई करते थे, लेकिन इस बार बाढ़ में करीब 3300 क्विंटल गन्ना बर्बाद हो गया। मजबूरी में वह सिर्फ 1200 क्विंटल गन्ना ही मिल को दे सके, जबकि बीज के लिए भी गन्ना बचाना जरूरी था।
फसल बर्बाद होने से बीज की मांग बढ़ी
वहीं गांव लुधैया निवासी किसान व चीनी मिल के पूर्व डायरेक्टर विहारी यादव ने बताया कि तराई क्षेत्र की फसल बर्बाद होने से बीज की मांग अचानक बढ़ गई है। इसी कारण बीज गन्ना दोगुने दाम में बिक रहा है और चीनी मिल को भी पर्याप्त गन्ना नहीं मिल सका।
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गन्ने की भारी कमी के कारण किसानों को बोआई के लिए बीज जुटाने में परेशानी उठानी पड़ी। जिन किसानों के पास गन्ना बचा, उन्होंने उसे बीज के रूप में बेचने के लिए रोक लिया। इससे गन्ना बीज के दाम दोगुने हो गए। किसानों का कहना है कि जहां पहले एक बीघा गन्ने का बीज करीब 25 हजार रुपये में मिल जाता था, वहीं इस बार कमी के चलते 50 हजार रुपये प्रति बीघा तक बिक रहा है।
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चीनी मिल के सीसीओ प्रमोद यादव ने बताया कि पिछले वर्ष 4500 हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई थी, जो इस वर्ष घटकर 4075 हेक्टेयर रह गई। इसमें भी करीब 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ से फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। परिणामस्वरूप केवल 1575 हेक्टेयर क्षेत्र में ही गन्ने की फसल बच सकी। साथ ही क्रेशर और कोल्हू पर गुड़ बनाने के लिए भी गन्ने की खरीद हुई, जिससे मिल को और कम आपूर्ति मिल सकी। जीएम रमेश सिंह का कहना है कि यदि गन्ने की आपूर्ति सामान्य रहती, तो पेराई का लक्ष्य आसानी से पूरा किया जा सकता था।
बाढ़ में 3300 क्विंटल गन्ना हो गया बर्बाद
तराई के गांव धर्मपुर निवासी किसान नाजिम खां ने बताया कि वे हर साल चीनी मिल को करीब 4500 क्विंटल गन्ना सप्लाई करते थे, लेकिन इस बार बाढ़ में करीब 3300 क्विंटल गन्ना बर्बाद हो गया। मजबूरी में वह सिर्फ 1200 क्विंटल गन्ना ही मिल को दे सके, जबकि बीज के लिए भी गन्ना बचाना जरूरी था।
फसल बर्बाद होने से बीज की मांग बढ़ी
वहीं गांव लुधैया निवासी किसान व चीनी मिल के पूर्व डायरेक्टर विहारी यादव ने बताया कि तराई क्षेत्र की फसल बर्बाद होने से बीज की मांग अचानक बढ़ गई है। इसी कारण बीज गन्ना दोगुने दाम में बिक रहा है और चीनी मिल को भी पर्याप्त गन्ना नहीं मिल सका।
