{"_id":"69824658f9729cbcad0afb67","slug":"the-textile-printing-and-export-industry-will-receive-a-global-boost-farrukhabad-news-c-22-1-sknp1018-108936-2026-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: कपड़ा छपाई व निर्यात को मिलेगी वैश्विक मजबूती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: कपड़ा छपाई व निर्यात को मिलेगी वैश्विक मजबूती
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:32 AM IST
विज्ञापन
फोटो-22, कपिल साध
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। अमेरिकी टैरिफ की घोषणा के बाद संकट से जूझ रहे कपड़ा छपाई उद्योग की टैरिफ राहत की घोषणा से चिंता खत्म हो गई है। अब इसे वैश्विक मजबूती मिलना तय माना जा रहा है। यही नहीं आयात शुल्क में कमी का भी कपड़ा बाजार पर अच्छा असर पड़ेगा। कुछ ही दिनों में बड़े ऑर्डर मिलने की संभावनाएं भी मजबूत हो गई हैं।
शहर के मोहल्ला सधवाड़ा, अंगूरीबाग, जटवारा जदीद, चांदपुर, खानपुर, अमेठी जदीद, अमेठी कोहना, पांचाल घाट, लकूला के पीछे, चिलसरा रोड आदि क्षेत्रों में छोटे बड़े 150 कपड़ा छपाई कारखाने संचालित हैं। इनमें रोजाना चार करोड़ रुपये से अधिक का कपड़ा रंगाई, छपाई की क्षमता है। अधिकांश कारखानों में छपने वाला कपड़ा नोएडा में बैठे निर्यातक अपने यहां परिधान तैयार करवाकर विदेशों में भेजते हैं।
जिले में तैयार किया गया कुल माल का 50 फीसदी अकेला अमेरिका में ही जाता था। टैरिफ के बाद से इस उद्योग को बड़ा झटका लगा था। अब अमेरिकी टैरिफ वापसी की घोषणा के बाद कपड़ा उद्यमियों के चेहरे खिल उठे हैं। तो आइये जानते हैं उनके जुबानी राहत की कहानी...।
-- -- -
निर्यात उद्योग के लिए निर्णायक अवसर शुरू
फोटो-22, कपिल साध
शहर के सधवाड़ा निवासी स्टार एक्सपोर्ट हाउस के मालिक कपिल साध बताते हैं कि भारत-अमेरिका टैरिफ कटौती जिले से महिला वस्त्र निर्यात उद्योग के लिए निर्णायक अवसर है। आयात शुल्क भी कम हुआ है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की लैंडेड कॉस्ट घटेगी, जिससे बड़े ऑर्डर की संभावनाएं मजबूत होंगी। प्रिंटेड वूमेन गारमेंट्स और वैल्यू एडिशन सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। प्रिंटिंग, एम्ब्रॉयडरी, फिनिशिंग तथा पैकेजिंग जैसे सहायक उद्योगों में भी गति आएगी। टैरिफ कटौती लागत में कमी नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में परिधान निर्यात की सशक्त पुनर्स्थापना की शुरुआत है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
छपाई उद्योग को लगेंगे पंख, जल्द मिलेंगे बड़े ऑर्डर
फोटो-23, दिनेश साध
अमेरिका डाइंग के मालिक दिनेश साध कहते हैं कि कपड़ा छपाई व्यापार पर लगा ब्रेक खत्म हो गया। एक्सपोर्टर्स के लिए बाजार खुलेगा तो बड़े ऑर्डर मिलना शुरू होंगे। फरवरी के अंत तक कारोबार में अच्छे दिन लौटेंगे। अब जरूरत गुणवत्ता मानकों, तकनीकी उन्नयन फोकस बढ़ाना है। इसके बाद ही यह राहत दीर्घकालिक व्यापारिक स्थिरता में परिवर्तित हो सकती है।
Trending Videos
शहर के मोहल्ला सधवाड़ा, अंगूरीबाग, जटवारा जदीद, चांदपुर, खानपुर, अमेठी जदीद, अमेठी कोहना, पांचाल घाट, लकूला के पीछे, चिलसरा रोड आदि क्षेत्रों में छोटे बड़े 150 कपड़ा छपाई कारखाने संचालित हैं। इनमें रोजाना चार करोड़ रुपये से अधिक का कपड़ा रंगाई, छपाई की क्षमता है। अधिकांश कारखानों में छपने वाला कपड़ा नोएडा में बैठे निर्यातक अपने यहां परिधान तैयार करवाकर विदेशों में भेजते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में तैयार किया गया कुल माल का 50 फीसदी अकेला अमेरिका में ही जाता था। टैरिफ के बाद से इस उद्योग को बड़ा झटका लगा था। अब अमेरिकी टैरिफ वापसी की घोषणा के बाद कपड़ा उद्यमियों के चेहरे खिल उठे हैं। तो आइये जानते हैं उनके जुबानी राहत की कहानी...।
निर्यात उद्योग के लिए निर्णायक अवसर शुरू
फोटो-22, कपिल साध
शहर के सधवाड़ा निवासी स्टार एक्सपोर्ट हाउस के मालिक कपिल साध बताते हैं कि भारत-अमेरिका टैरिफ कटौती जिले से महिला वस्त्र निर्यात उद्योग के लिए निर्णायक अवसर है। आयात शुल्क भी कम हुआ है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की लैंडेड कॉस्ट घटेगी, जिससे बड़े ऑर्डर की संभावनाएं मजबूत होंगी। प्रिंटेड वूमेन गारमेंट्स और वैल्यू एडिशन सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। प्रिंटिंग, एम्ब्रॉयडरी, फिनिशिंग तथा पैकेजिंग जैसे सहायक उद्योगों में भी गति आएगी। टैरिफ कटौती लागत में कमी नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में परिधान निर्यात की सशक्त पुनर्स्थापना की शुरुआत है।
छपाई उद्योग को लगेंगे पंख, जल्द मिलेंगे बड़े ऑर्डर
फोटो-23, दिनेश साध
अमेरिका डाइंग के मालिक दिनेश साध कहते हैं कि कपड़ा छपाई व्यापार पर लगा ब्रेक खत्म हो गया। एक्सपोर्टर्स के लिए बाजार खुलेगा तो बड़े ऑर्डर मिलना शुरू होंगे। फरवरी के अंत तक कारोबार में अच्छे दिन लौटेंगे। अब जरूरत गुणवत्ता मानकों, तकनीकी उन्नयन फोकस बढ़ाना है। इसके बाद ही यह राहत दीर्घकालिक व्यापारिक स्थिरता में परिवर्तित हो सकती है।

फोटो-22, कपिल साध
