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Farrukhabad News: राजनीति में हनक की फसल

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2026 01:03 AM IST
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Harvest of power in politics
फोटो-18 शमसाबाद क्षेत्र में कटरी में लहलाहती गेहूं की फसल। संवाद
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फर्रुखाबाद। गंगा की कटरी हमेशा राजनीति से जुड़े लोगों की कमाई का सबसे सरल साधन रहता है। कुछ तो दस बीघा का पट्टा कराकर 100 बीघा भूमि पर कब्जा करा देते हैं तो कई लोग बिना पट्टे ही सैकड़ों बीघा भूमि पर काबिज होकर गेहूं की फसल उगाते हैं। गंगा के किनारे बसे गांवों के लोग इन खेतों में पसीना बहाते हैं और राजनीति से जुड़े मठाधीश अपना हिस्सा लेकर मालामाल होते हैं। यह सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। जिले के तीन तहसील क्षेत्र में गंगा की 50 किलोमीटर कटरी क्षेत्र में 10 हजार बीघा से अधिक जमीन पर अवैध कब्जा बताया जा रहा है। हर वर्ष प्रशासन शिकायत होने पर 100-200 बीघा भूमि की फसल जब्त कर बड़े खेल को ठंडे बस्ते में डाल देता है।
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जिले में कायमगंज तहसील के कंपिल क्षेत्र में कासगंज बॉर्डर पर बसे गांव लोचननगला के बाद कैरई, पलितपुरा, देहामाफी पुंथर, कारव, सिंघनपुर, कमरुद्दीननगर में करीब 2000 बीघा, शमसाबाद क्षेत्र के नगला बीच, चितार, समैचीपुर, गुटैटी दक्षिण 1500 बीघा, अमृतपुर तहसील के चंदनपुर सबलपुर, चंदपुर, सुंदरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, भाऊचौरासी, भवानीपुर, सैदापुर, नगला दुर्गू में 4000 बीघा, सदर तहसील के कटरी धर्मपुर, कटरी भीमपुर, माधौपुर एवं कमालगंज के कई गांवों में 2500 बीघा गंगा की कटरी में जमीन पर कब्जा होना बताया जा रहा है। अधिकांश जगह कब्जे के पीछे राजनीति से जुड़े लोगों का ही हाथ। जब जिस पार्टी की सरकार होती है उसी नेता अधिक कब्जा करते हैं। पर कुछ राजनीतिक लोग अपनी स्थानीय राजनीति के चलते काबिज बने रहते हैं। उन्हें कोई जल्द छेड़ता नहीं है। वह दस-दस पांच-पांच बीघे के पट्टे अपने चहेतों के नाम कराकर उस भूमि पर बंटाई पर फसल कराते हैं।
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एसडीएम अमृतपुर संजय कुमार सिंह ने बताया कि कटरी में हर साल भौगोलिक हालात बदलते हैं। वहां पैमाइश कराना बेहद मुश्किल है। पट्टी जसूपुर की शिकायतें आईं थीं। वहां 4000 बीघा जमीन सेना की बताई जा रही है। ग्रामीणों ने सेना की ओर से पट्टा करने की बात कही है। कागजों में यदि किसी किसान की 50 बीघा है, तो उसने 60 बीघा जोती होगी। मगर अधिक कब्जा करने की कोई सूचना नहीं है। यदि मिलेगी, तो कार्रवाई करेंगे।

संयुक्त सचिव मुख्यमंत्री के आदेश पर भी कार्रवाई नहीं

कंपिल। कमरुद्दीननगर की प्रधान पूजा गौतम ने सात जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री से 800 बीघा जमीन पर कब्जे की शिकायत की थी। इस पर संयुक्त सचिव अजय कुमार ओझा ने पत्र भेजकर जांच के बाद कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। राजस्व विभाग ने इस पर जांच कराई, मगर कठोर कार्रवाई नहीं की। राजस्व विभाग ने इस जमीन पर कब्जा होना पाया था। ऐसे ही हालात अन्य आसपास के गांवों में बताए जा रहे हैं। (संवाद)

सरकारी भूमि पर दस करोड़ रुपये से अधिक का तैयार होता गेहूं



कायमगंज। फर्रुखाबाद के कायमगंज स्थित कटरी क्षेत्र में करीब दस हजार बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर गेहूं की फसल उगाई जा रही है। इस अवैध खेती से दस करोड़ रुपये से अधिक का गेहूं तैयार होता है, जिसमें स्थानीय राजनीति से जुड़े लोगों की संलिप्तता सामने आई है। प्रशासन आमतौर पर शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई करता है, अन्यथा फसल काटकर बाजार में बेच दी जाती है।



एक बीघा भूमि पर औसतन चार क्विंटल गेहूं होता है, जिसका सरकारी भाव 2585 रुपये प्रति क्विंटल है। इस हिसाब से एक बीघा गेहूं की कीमत 10,340 रुपये होती है, जिससे दस हजार बीघा भूमि पर उगने वाले गेहूं का कुल मूल्य दस करोड़ रुपये से अधिक हो जाता है। राजनीति से जुड़े लोग स्थानीय लोगों को सरकारी भूमि पर कब्जा दिलाकर फसल करवाते हैं। हाल ही में नगला बसोला में भी ऐसा ही हुआ, जहां प्रधान और उससे जुड़े किसानों ने सौ बीघा भूमि पर पट्टा निरस्त होने के बाद भी फसल बोई थी। प्रशासन को इसकी भनक नहीं लगी, लेकिन शिकायत होने पर फसल जब्त कर ली गई। कायमगंज की विधायक सुरभि के पति अजीत गंगवार ने कहा कि किसानों ने मेहनत से फसल तैयार की है, उन्हें उसे काटने दिया जाए। उन्होंने प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहारीपुर सवितापुर में पंद्रह सौ बीघा सरकारी भूमि पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। गंगवार ने यह भी बताया कि नगला बसोला में ही दो हजार बीघा फसल की भूमि काट ली गई है और अन्य स्थानों पर भी इसी तरह कब्जा कर फसल की गई है, जिस पर समान कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर एसडीएम कायमगंज अतुल कुमार ने कहा कि जिसने भी सरकारी भूमि पर फसल की है, वह बचेगा नहीं और सभी को नोटिस जारी किया जाएगा।
एसडीएम से नाराज विधायक बोलीं, बोने वाले किसानों को ही दिलाई जाएगी फसल

शमसाबाद। क्षेत्र के गांव पैलानी दक्षिण में बाढ़ राहत परियोजना का शुभारंभ करने पहुंची विधायक ने कहा कि बोने वाले किसानों को ही फसल दिलाई जाएगी। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि पट्टा निरस्त होने के बाद किसानों को तीन वर्ष से फसल बोने से क्यों नहीं रोका गया। अब फसल काटने से रोकना किसानों व गरीबों का शोषण है।
कायमगंज विधायक सुरभि ने गेहूं की फसल को लेकर किसानों के पक्ष में प्रशासन से कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि जब वर्ष 2023 में किसानों के पट्टे निरस्त किए जा चुके थे, तो प्रशासन ने समय रहते खेती करने से किसानों को क्यों नहीं रोका। उन्होंने कहा कि यदि पहले ही किसानों को बुवाई करने से रोक दिया जाता तो गरीब किसानों को नुकसान नहीं झेलना पड़ता। फसल तैयार होने पर काटने से अचानक रोकना किसानों के साथ अन्याय है। गरीब किसानों को उनकी मेहनत की फसल हर हाल में दिलाई जाएगी और इसके लिए वो संघर्ष करेंगी। (संवाद)

फोटो-18 शमसाबाद क्षेत्र में कटरी में लहलाहती गेहूं की फसल। संवाद

फोटो-18 शमसाबाद क्षेत्र में कटरी में लहलाहती गेहूं की फसल। संवाद

फोटो-18 शमसाबाद क्षेत्र में कटरी में लहलाहती गेहूं की फसल। संवाद

फोटो-18 शमसाबाद क्षेत्र में कटरी में लहलाहती गेहूं की फसल। संवाद

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